जयंत के गले में गमछा, जुबां पर ब्रज की बात:आगरा में रालोद मुखिया ने सियासी दांव खेला, पुरखों के संघर्ष भी याद दिलाए

जयंत के गले में गमछा, जुबां पर ब्रज की बात:आगरा में रालोद मुखिया ने सियासी दांव खेला, पुरखों के संघर्ष भी याद दिलाए

गले में गमछा, हाथ जोड़कर अभिवादन और भाषण में ब्रज की मिट्टी, किसान और पुरखों के संघर्ष का जिक्र। आगरा के जैंगारा गांव में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का अंदाज पूरी तरह देसी नजर आया। स्वाभिमान सभा में उन्होंने केवल सियासी ताकत दिखाने की कोशिश नहीं की, बल्कि ब्रज से अपने पारिवारिक और भावनात्मक रिश्तों को भी सामने रखा। कभी ब्रज की रज का महत्व बताया तो कभी वीर गोकुला की वीरता और चौधरी चरण सिंह की किसान राजनीति को याद किया। आलू किसानों की समस्याओं से लेकर 36 बिरादरियों की एकजुटता तक, उनके भाषण में ब्रज की पहचान और किसान राजनीति केंद्र में रही। जयंत चौधरी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि उन्हें यहां किसी चुनावी समीकरण ने नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे रिश्तों ने खींचकर बुलाया है। उनके इस बयान को ब्रज क्षेत्र से अपने पुराने जुड़ाव को दोहराने और रालोद के परंपरागत सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा गया। ब्रज से जयंत का जुड़ाव: भाषण में दिखे ये 5 रंग 1. ब्रज की रज को बताया सम्मान का प्रतीक जयंत चौधरी ने कहा कि वह खुद को ब्रज की रज की एक चुटकी के बराबर भी नहीं समझते। उन्होंने ब्रज की मिट्टी की महत्ता बताते हुए कहा कि देश-दुनिया से लोग यहां आते हैं और माथे पर रज लगाकर खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। इस भावनात्मक अंदाज से उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ अपने जुड़ाव को सामने रखा। 2. चुनाव नहीं, पीढ़ियों के रिश्तों की बात जयंत ने कहा कि अभी चुनाव का समय नहीं है। एमएलसी चुनाव जरूर चल रहे हैं, लेकिन उन्हें जैंगारा तक खींचकर लाने वाली वजह पीढ़ियों से चले आ रहे रिश्ते हैं। उन्होंने इस क्षेत्र से अपने पारिवारिक और राजनीतिक संबंधों को चुनावी फायदे से अलग बताते हुए स्थानीय लोगों के भरोसे और सम्मान की बात की। 3. वीर गोकुला की वीरता को किया याद सभा में वीर गोकुला के संघर्ष और बलिदान का जिक्र करते हुए जयंत ने उनकी गाथा को इतिहास और पाठ्यक्रम में उचित स्थान दिलाने की बात कही। उन्होंने बताया कि एनसीईआरटी की कक्षा नौ की किताब में वीर गोकुला की गाथा शामिल करने का फैसला लिया गया है। उनके मुताबिक, किसानों की सेना खड़ी करने वाले इस योद्धा का योगदान नई पीढ़ी तक पहुंचना चाहिए। 4. चौधरी चरण सिंह और अजित सिंह के पुराने रिश्ते याद किए जयंत चौधरी ने चौधरी चरण सिंह की किसान-केंद्रित राजनीति और चौधरी अजित सिंह के संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने आगरा के बगलघूसा गांव का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस तरह चौधरी अजित सिंह को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने के दौर में क्षेत्र के लोगों ने उनका स्वागत किया था। इस प्रसंग के जरिए उन्होंने रालोद की जड़ों को स्थानीय इतिहास और सामाजिक रिश्तों से जोड़ा। 5. किसान और गांव को राजनीति के केंद्र में रखा आलू किसानों की समस्याओं पर बात करते हुए जयंत ने आलू बोर्ड, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, अनुसंधान और बेहतर विपणन व्यवस्था की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। उनके भाषण में खेती-किसानी के मुद्दों ने ब्रज के ग्रामीण समाज से जुड़ाव को व्यावहारिक रूप दिया। सभा के 6 बड़े राजनीतिक संदेश
आलू बोर्ड की पैरवी: जयंत चौधरी ने कहा कि आलू किसानों की मांग उन्हें उचित लगी है। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के सामने चर्चा करने और केंद्र व राज्य सरकार के सहयोग से समाधान की कोशिश का भरोसा दिया। फूड प्रोसेसिंग और अनुसंधान: आलू की खेती के साथ प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन और अनुसंधान सुविधाओं को बढ़ाने की जरूरत बताई, ताकि किसानों को बेहतर कीमत मिल सके। 36 बिरादरियों की एकता: चौधरी चरण सिंह की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी जातियों और बिरादरियों को साथ लिए बिना कोई सफल नहीं हो सकता। यह रालोद के व्यापक सामाजिक गठजोड़ का संदेश था। तीन पीढ़ियों के संघर्ष की याद: जयंत ने पार्टी कार्यकर्ताओं के संघर्ष, लाठियां खाने और संगठन को बनाए रखने के प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कम सीटें होने के बावजूद पार्टी के पास जमीन पर काम करने वाले ईमानदार कार्यकर्ताओं की ताकत है। ब्रज के स्वाभिमान पर जोर: वीर गोकुला के बलिदान, क्षेत्र की वीर परंपरा और ब्रज की मिट्टी का उल्लेख कर उन्होंने स्थानीय अस्मिता को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखा। एनडीए और रालोद को मजबूत करने की अपील: प्रदेश अध्यक्ष ऐश्वर्य राज सिंह ने कार्यकर्ताओं से जयंत चौधरी को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे रालोद के साथ एनडीए गठबंधन भी मजबूत होगा। भीड़, स्वागत और जाम से चर्चा में रही सभा जैंगारा में जयंत चौधरी का गमछे वाला देसी अंदाज और कार्यकर्ताओं के बीच सहज मौजूदगी आयोजन के प्रमुख दृश्य रहे। कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। आयोजकों के मुताबिक, सभा में करीब पांच हजार लोग जुटे, जबकि आयोजन से जुड़े लोगों ने 50 हजार लोगों के पहुंचने का दावा किया था। आगरा के अलावा मथुरा, हाथरस, फिरोजाबाद, अलीगढ़ और राजस्थान के भरतपुर से भी लोगों के आने की बात कही गई। सभा के दौरान किरावली-कागारौल रोड पर करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। कुल मिलाकर, जैंगारा की स्वाभिमान सभा में जयंत चौधरी ने ब्रज की अस्मिता, किसान हितों और पारिवारिक विरासत को एक साथ पिरोया। देसी लुक और स्थानीय संदर्भों के सहारे उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि रालोद का ब्रज से रिश्ता केवल चुनावी राजनीति का नहीं, बल्कि किसान आंदोलनों, सामाजिक संबंधों और क्षेत्रीय पहचान का भी है। इस संदेश का वास्तविक राजनीतिक असर आने वाले समय में पार्टी की संगठनात्मक सक्रियता और जनसमर्थन से तय होगा।

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