कुडू|नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना विधि-विधान के साथ की जा रही है। कुड़ू शहरी क्षेत्र के पांच प्रमुख पंडालों में दुर्गा बाड़ी, मां भवानी संघ देवी मंडप, जय माता दी नीचे स्टैंड, मां अम्बे ब्लॉक चौक, मां शक्ति बस पड़ाव, शिव शक्ति संघ टाटी, सहित लगभग दो दर्जन स्थानों पर मां की आराधना की गई। मौके पर दुर्गा बाड़ी के पुरोहित अनंत पाठक, मां भवानी संघ देवी मंडप के पुरोहित प्रदीप वैद्य ने भक्तों को बताया। मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और साधना की प्रतीक हैं। मान्यता है कि इनकी पूजा करने से भक्तों को धैर्य, आत्मबल और दृढ़ संकल्प की प्राप्ति होती है। मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती हैं। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप: मां के दाहिने हाथ में जप की माला है। बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित है। देवी का यह स्वरूप सादगी, शांति और तपस्या का संदेश देता है। कुडू|नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना विधि-विधान के साथ की जा रही है। कुड़ू शहरी क्षेत्र के पांच प्रमुख पंडालों में दुर्गा बाड़ी, मां भवानी संघ देवी मंडप, जय माता दी नीचे स्टैंड, मां अम्बे ब्लॉक चौक, मां शक्ति बस पड़ाव, शिव शक्ति संघ टाटी, सहित लगभग दो दर्जन स्थानों पर मां की आराधना की गई। मौके पर दुर्गा बाड़ी के पुरोहित अनंत पाठक, मां भवानी संघ देवी मंडप के पुरोहित प्रदीप वैद्य ने भक्तों को बताया। मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और साधना की प्रतीक हैं। मान्यता है कि इनकी पूजा करने से भक्तों को धैर्य, आत्मबल और दृढ़ संकल्प की प्राप्ति होती है। मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती हैं। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप: मां के दाहिने हाथ में जप की माला है। बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित है। देवी का यह स्वरूप सादगी, शांति और तपस्या का संदेश देता है।

