Investment Tips: पिछले 1 साल में निफ्टी-50 ने दिया -7.1% रिटर्न, उधर इन 4 एसेट क्लास ने कराया 25% तक का मुनाफा

Investment Tips: पिछले 1 साल में निफ्टी-50 ने दिया -7.1% रिटर्न, उधर इन 4 एसेट क्लास ने कराया 25% तक का मुनाफा

Asset Allocation: अगर पिछले एक साल में आपके म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो का रिटर्न निगेटिव रहा है, तो जरूरी नहीं कि निवेश के सभी विकल्पों में नुकसान हुआ हो। हो सकता है कि भारतीय शेयर बाजार में आपका ज्यादा पैसा लगा हो, जबकि इसी दौरान गोल्ड, अमेरिकी शेयरों और रियल एस्टेट जैसे दूसरे विकल्पों ने बेहतर कमाई कराई हो। निवेश में सिर्फ एक बाजार या एक एसेट क्लास पर निर्भर रहना कई बार भारी पड़ सकता है। बीते एक साल के आंकड़े यही संकेत देते हैं। बीते 1 साल में निफ्टी-50 टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) में 7.1% की गिरावट आई है। वहीं, अमेरिकी शेयरों ने 25%, सोने ने 18%, रियल एस्टेट ने 8.5% और डेट में निवेश ने 5% का रिटर्न दिया है।

एक साल में कहां कितना मिला रिटर्न?

निवेश विकल्प एक साल का रिटर्न
भारतीय शेयर (निफ्टी 50 TRI) -7.1%
अमेरिकी शेयर 25%
सोना 18%
रियल एस्टेट 8.5%
डेट निवेश 5%
सोर्स- फंड्सइंडिया (30 सितंबर तक के CAGR रिटर्न)

ये आंकड़े बताते हैं कि अगर किसी निवेशक ने अपना पूरा पैसा भारतीय शेयर बाजार में लगाया होता, तो उसे नुकसान उठाना पड़ सकता था। वहीं, अलग-अलग विकल्पों में पैसा बांटने से पोर्टफोलियो का कुल रिटर्न बेहतर हो सकता था।

1 लाख रुपये के निवेश पर समझें पूरा गणित

मान लीजिए आपने एक साल पहले निफ्टी 50 को ट्रैक करने वाले इंडेक्स फंड में 1 लाख रुपये लगाए थे। इंडेक्स के 7.1% निगेटिव रिटर्न के हिसाब से आपके निवेश की वैल्यू घटकर करीब 92,900 रुपये रह जाती। यानी 7,100 रुपये का नुकसान होता। यह गणना ट्रैकिंग एरर को शामिल किए बिना की गई है। अब इसी 1 लाख रुपये को पांच अलग-अलग एसेट क्लास में 20-20 हजार रुपये के हिसाब से बांटकर निवेश करने की स्थिति देखते हैं।

निवेश का विकल्प शुरुआती निवेश रिटर्न एक साल बाद वैल्यू मुनाफा या नुकसान
भारतीय शेयर ₹20,000 -7.1% ₹18,580 -₹1,420
अमेरिकी शेयर ₹20,000 25% ₹25,000 +₹5,000
सोना ₹20,000 18% ₹23,600 +₹3,600
रियल एस्टेट ₹20,000 8.5% ₹21,700 +₹1,700
डेट निवेश ₹20,000 5% ₹21,000 +₹1,000
कुल ₹1,00,000 9.88% ₹1,09,880 +₹9,880

इस उदाहरण में पांचों विकल्पों में बराबर निवेश करने पर कुल पोर्टफोलियो की वैल्यू बढ़कर 1,09,880 रुपये हो जाता। यानी 9,880 रुपये का फायदा होता। इसके उलट, पूरा पैसा निफ्टी 50 इंडेक्स फंड में लगाने पर 7,100 रुपये का नुकसान होता। हालांकि, यह एक उदाहरण है। वास्तविक रिटर्न निवेश के तरीके, संबंधित फंड के परफॉर्मेंस, लागत, टैक्स और विदेशी निवेश में करेंसी के उतार-चढ़ाव जैसे फैक्टर्स से अलग हो सकता है।

लंबी अवधि में कौन सा निवेश विकल्प रहा आगे?

निवेश के अलग-अलग समय में किसी एक एसेट क्लास का दबदबा नहीं रहा। तीन और पांच साल की अवधि में सोने ने सबसे ज्यादा कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दिया। वहीं, तीन साल में भारतीय शेयर और पांच साल में डेट इन्वेस्टमेंट का परफॉर्मेंस सबसे कमजोर रहा। दस और 15 साल की अवधि में अमेरिकी शेयरों ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया, जबकि रियल एस्टेट सबसे पीछे रहा। 20 साल की अवधि में भी अमेरिकी शेयरों का परफॉर्मेंस सबसे बेहतर रहा। इस दौरान रियल एस्टेट और डेट निवेश दोनों का CAGR 7.5% रहा, जो इन अवधियों में सबसे कम था। यहां CAGR का मतलब सालाना औसत चक्रवृद्धि रिटर्न है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि किसी निवेश की वैल्यू एक निश्चित अवधि में औसतन किस दर से बढ़ी या घटी।

निवेश में डायवर्सिफिकेशन क्यों जरूरी है?

शेयर बाजार, सोना, रियल एस्टेट और डेट जैसे विकल्प अलग-अलग परिस्थितियों में अलग परफॉर्म कर सकते हैं। ऐसे में अगर किसी एक मार्केट में गिरावट आती है, तो दूसरे विकल्प पोर्टफोलियो के नुकसान को कुछ हद तक संतुलित कर सकते हैं। लेकिन डायवर्सिफिकेशन का मतलब यह नहीं है कि नुकसान नहीं होगा या मुनाफे की गारंटी मिल जाएगी। इसका मकसद जोखिम को अलग-अलग निवेश विकल्पों में बांटना है, ताकि किसी एक एसेट क्लास पर पूरी निर्भरता न रहे।

म्यूचुअल फंड निवेशक कैसे बनाएं बैलेंस्ड पोर्टफोलियो?

सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, निवेशक अपनी जरूरत, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। इनमें भारतीय शेयरों में निवेश करने वाले फंड, लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप फंड, अंतरराष्ट्रीय फंड, डेट फंड, गोल्ड ईटीएफ और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, सभी विकल्पों में पैसा लगाना हर निवेशक के लिए जरूरी नहीं है। पोर्टफोलियो बनाते समय यह देखना चाहिए कि पैसे की जरूरत कब पड़ेगी, कितना जोखिम उठाया जा सकता है और निवेश का टार्गेट क्या है। एक बात ध्यान रखें कि सिर्फ बीते रिटर्न को देखकर किसी एसेट क्लास के पीछे न भागें। सही रणनीति वह है जो आपके वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम लेने की क्षमता के अनुरूप हो।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

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