IND vs WI 3rd T20I: वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय टीम ने महज 14 रन से करीबी जीत दर्ज की है। एक समय मुकाबला काफी टाइट था, लेकिन अर्शदीप सिंह के एक ओवर ने मैच का रूख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया।
India vs West Indies 3rd T20I: भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ इंदौर के होल्कर स्टेडियम 14 रन से करीबी जीत दर्ज की है। इसके साथ ही सीरीज में 2-1 की बढ़त भी हासिल कर ली है। तीसरे टी20 में पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत की पूरी टीम निर्धारित 20 ओवर में 223 रन पर ऑलआउट हो गई। इसके जवाब में वेस्टइंडीज 7 विकेट खोकर 209 रन ही बना पाई। लेकिन, इस मैच में एक समय ऐसा लग रहा था कि वेस्टइंडीज की टीम रांची की तरह जीत दर्ज कर सकती है, लेकिन अर्शदीप सिंह ने 18वें ओवर में दो विकेट निकालते हुए विपक्षी टीम को बैकफुट पर धकेल दिया। मैच के बाद खुद अर्शदीप ने बताया कि यह सब कैसे संभव हो सका?
‘बॉल थोड़ी रिवर्स हो रही थी’
प्लेयर ऑफ द मैच रहे अर्शदीप सिंह से जब पूछा गया कि क्या सूखे हालात से आपकी बॉलिंग में मदद मिली? इस पर उन्होंने कहा कि यह बहुत अच्छा था। बॉल थोड़ी रिवर्स हो रही थी और डेथ ओवरों में बॉल थोड़ी रिवर्स होने पर बॉलिंग करना हमेशा मजेदार होता है और ओस के साथ भी बॉलिंग करना हमेशा अच्छा होता है। लेकिन, मैं पिछले गेम में अच्छा नहीं कर सका, इसलिए इस बार टीम के लिए अच्छा करना चाहता था और सही रिज़ल्ट भी मिला।
‘टीम में लीडर या सीनियर जैसी कोई चीज नहीं’
भारत के पेस अटैक का लीडर होने के नाते आप जिम्मेदारी कैसे संभालते हैं? उन्होंने कहा कि टीम में लीडर या सीनियर जैसी कोई चीज नहीं है। अभी माहौल बहुत शांत है और हम बस एक-दूसरे की सफलता का मजा ले रहे हैं और जब भी किसी का दिन खराब होता है, तो हम हमेशा यह पक्का करते हैं कि हम उसका साथ दें और उसे बताएं कि वह टीम का एक जरूरी हिस्सा है। एक इंटरनेशनल क्रिकेटर के तौर पर आपके अच्छे और बुरे दिन आते ही हैं। जब तक आप शांत रहेंगे, आप हमेशा वापस आएंगे और अच्छा करेंगे।
T20 क्रिकेट में अपना कंट्रोल कैसे बनाए रखते हैं?
आप T20 क्रिकेट में अपना कंट्रोल कैसे बनाए रखते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि मुझे सच में पर्सनली यह बहुत पसंद है, जब बैट्समैन शुरुआत में और डेथ ओवर में भी ज्यादा जोर लगाते हैं। यह एक अच्छा चैलेंज है और यही वह समय है जब आप खुद को अपनी स्किल्स को और खेल के उस फेज में अपनी मेंटल स्ट्रेंथ को भी टेस्ट करते हैं। तो यह बहुत मजेदार है।
शेड्यूल के हिसाब से खुद को कैसे ढालते हैं?
आप बदलते हालात और शेड्यूल के हिसाब से खुद को कैसे ढालते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि मेन फोकस बस जल्दी आना, नई बॉल से थोड़ी बॉलिंग करना, पुरानी बॉल से करना और जितना हो सके अपनी स्किल्स को बेहतर बनाना है। फिर, जैसा कि आपने कहा कि शेड्यूल हमेशा टाइट होता है। आपको बस जल्दी से एडजस्ट करना होता है। जो टीम जल्दी एडजस्ट करती है। इसलिए एक टीम के तौर पर हम बस एडजस्ट करने और हालात के हिसाब से खेलने की कोशिश करते हैं।
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