वाराणसी के केंद्रीय कारागार में नवरात्र के प्रथम दिन बंदियों की ओर से मंचित दस दिवसीय रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजन के साथ हुआ। पहले दिन नारद मोह की लीला का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि कामदेव ने नारद की समाधि भंग करने का प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। इसके बाद कामदेव ने नारद के चरणों में गिरकर क्षमा मांगी। इस घटना से नारद को अहंकार हो गया कि उन्होंने कामदेव पर विजय प्राप्त कर ली है। नारद ने यह समाचार भगवान शिव को सुनाया। इस पर शिव ने उन्हें सलाह दी कि यह बात भगवान विष्णु को न बताएं। इसके बावजूद नारद ने अभिमानवश भगवान विष्णु को भी यह प्रसंग सुना दिया। इसी दृश्य के साथ पहले दिन की लीला का समापन हुआ।

