पंजाब सरकार और प्रशासन की सख्त हिदायतों व लगातार चलाई जा रही चेतावनी मुहिम के बावजूद खेतों में पराली (धान के अवशेष) जलाने की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। जिला तरनतारन में सैटेलाइट और चेकिंग टीमों की रिपोर्ट के आधार पर पराली में आग लगाने के आरोप में चार अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें दो किसानों को नामजद किया गया है, जबकि दो अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। प्रशासन ने पराली जलाने के मामले को रोकने के लिए अभियान चला रहा है। इसमे किसानों को इसके नुकसान और पराली प्रबंधन के फायदे बताए जा रहे हैं। किसानों को सरकार की ओर से दिए जाने वाले लाभ के बारे मे भी बताया जा रहा है। इसके साथ अधिकारियों इस पर कड़ी नजर रखने और पराली जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। झबाल और वेरोवाल थानों में दर्ज हुए मुकदमे एसएसपी तरनतारन सुरिंदर कुमार लांबा ने बताया कि पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा लगातार खेतों की निगरानी की जा रही है गांव चक्क सिकंदर और गांव पधरी के खेतों में पराली जलाने के मामले में दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने किसान लवजीत सिंह (निवासी तख्तू चक्क) और किसान अजय पाल सिंह (निवासी बिहारी पुर) को नामजद करते हुए उनके खिलाफ सरकारी आदेशों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया है। “जमीन की उपजाऊ शक्ति और मित्र कीटों का नुकसान” कृषि विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने एक बार फिर किसानों से पराली न जलाने की भावुक अपील की है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि पराली में आग लगाने से हवा में जहरीला धुआं घुलने से बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों की सेहत पर बेहद बुरा असर पड़ता है। आग की तेज लपटों से खेत की मिट्टी के ऊपरी हिस्से में मौजूद जरूरी मित्र कीट (केंचुए आदि) और पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे जमीन की उपजाऊ क्षमता घटती है। प्रशासन की किसानों से अपील प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एक तरफ जहाँ कृषि विभाग और पुलिस की विशेष टीमें गांवों में जाकर किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति जागरूक कर रही हैं, वहीं नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पराली को आग लगाने के बजाय कृषि विभाग द्वारा सुझाई गई आधुनिक मशीनों और विकल्पों का उपयोग कर इसके उचित प्रबंधन में सहयोग दें।

