चित्रकूट पितृ पक्ष की अमावस्या पर शनिवार को धर्मनगरी चित्रकूट में लाखों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी नदी के तट पर तर्पण कर स्नान किया। इसके बाद भगवान कामतानाथ के दर्शन कर पंचकोसी परिक्रमा शुरू की। सुबह से ही रामघाट और परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए 500 से अधिक पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई। चित्रकूट में हर माह अमावस्या पर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ती है। पितृ विसर्जनी अमावस्या पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के साथ छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में स्नान कर पितरों का तर्पण किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा कर भगवान कामतानाथ के दर्शन किए।
5 किमी का है परिक्रमा मार्ग कामदगिरि महाआरती के संत विपिन विराट महाराज ने बताया कि वनवास काल में भगवान श्रीराम ने भाई लक्ष्मण और पत्नी जानकी के साथ सबसे अधिक समय चित्रकूट में बिताया था। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम आज भी चित्रकूट में विराजमान हैं। इसी आस्था के चलते श्रद्धालु मंदाकिनी में स्नान के बाद कामतानाथ की परिक्रमा करते हैं। कामदगिरि पर्वत का परिक्रमा मार्ग करीब पांच किलोमीटर लंबा और गोलाकार है। यह मार्ग उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश, दोनों राज्यों की सीमा में आता है। श्रद्धालु इस मार्ग पर पैदल परिक्रमा करते हैं। कई भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना के साथ लेटकर यानी दंडवत परिक्रमा भी लगाते हैं। सुरक्षा व्यवस्था में जुटा रहा प्रशासन अमावस्या मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मियों को सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किया गया। रामघाट, कामदगिरि परिक्रमा मार्ग और प्रमुख आवागमन स्थलों पर पुलिस की निगरानी रही। प्रशासन का फोकस श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रखने और किसी भी अव्यवस्था को रोकने पर रहा। धार्मिक आस्था के इस पर्व पर पूरे दिन धर्मनगरी में भक्तिमय माहौल बना रहा।

