Russia US Diesel Deal: ट्रंप की रूस से डीजल डील पर बवाल, ऑस्ट्रेलिया ने साफ कहा-पुतिन को फायदा मंजूर नहीं

Russia US Diesel Deal: ट्रंप की रूस से डीजल डील पर बवाल, ऑस्ट्रेलिया ने साफ कहा-पुतिन को फायदा मंजूर नहीं

Donald Trump Vladimir Putin Deal: अमेरिका में महंगे डीजल से राहत दिलाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ईंधन आपूर्ति को लेकर समझौते का दावा किया है। लेकिन इस पहल ने ऊर्जा संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी गरमा दिया है। ऑस्ट्रेलिया के ऊर्जा मंत्री क्रिस बोवेन ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश रूसी ईंधन नहीं चाहता। अब सवाल यह है कि क्या रूस से होने वाली आपूर्ति अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत देगी या विवाद और गहराएगा?

Russia US Diesel Deal: रूस से डीजल मंगाने की तैयारी, ट्रंप का बड़ा दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक, पुतिन के साथ उनकी बातचीत बेहद सफल रही और रूस अमेरिका सहित वैश्विक बाजार में तत्काल 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल उपलब्ध कराएगा। ट्रंप ने आगे नवंबर में 5 लाख टन और उसके बाद 10 लाख टन अतिरिक्त डीजल देने की बात भी कही है। हालांकि, इन आपूर्तियों की वास्तविक समयसीमा और भुगतान की व्यवस्था पर व्हाइट हाउस ने तत्काल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।

यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि पिछले महीने ही ट्रंप ने रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई और युद्ध से जुड़े आर्थिक संसाधनों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से व्यापक प्रतिबंधों पर हस्ताक्षर किए थे। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को एक सामान्य लाइसेंस जारी कर 7 अप्रैल तक रूसी डीजल के आयात की अनुमति दी है।

ऑस्ट्रेलिया ने क्यों जताई असहमति?

ऑस्ट्रेलिया के ऊर्जा मंत्री क्रिस बोवेन ने Weekend Breakfast कार्यक्रम में कहा कि उनका देश रूसी ईंधन नहीं चाहता और न ही उसे इसकी जरूरत है। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ ऐसे प्रबंध कर रहा है, जिससे रूसी ईंधन वहां न पहुंचे।

बोवेन ने अमेरिका की सीधे तौर पर निंदा करने से परहेज किया, लेकिन रूस को यूक्रेन पर उसके अवैध और अनैतिक हमले के बावजूद किसी व्यवस्था से लाभ मिलने का विरोध किया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी ट्रंप की नई पहल की आलोचना करते हुए कहा कि पुतिन को मिलने वाले उपहार शांति नहीं ला सकते।

रूस की ओर से राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रिएव ने अमेरिका के साथ सहयोग की सराहना की। इससे साफ है कि डीजल की आपूर्ति का मामला केवल व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि युद्ध और कूटनीतिक संबंधों से भी जुड़ा है।

क्या अमेरिकी जनता को सस्ता डीजल मिलेगा?

अमेरिका में डीजल की कीमतों में तेज उछाल ने किसानों, ट्रक चालकों और परिवहन कारोबार पर दबाव बढ़ा दिया है। AAA के अनुसार, गुरुवार को औसत कीमत 6.28 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किए जाने के बाद से डीजल की कीमत करीब 70 प्रतिशत बढ़ चुकी है।

हालांकि, बाजार विशेषज्ञ इस समझौते को कीमतों में स्थायी गिरावट की गारंटी नहीं मान रहे। कमोडिटी बाजार के शोधकर्ता रोरी जॉनस्टन ने इसे सीमित प्रभाव वाला कदम बताया। वहीं, वुड मैकेंजी के विश्लेषक जिम मिशेल के अनुसार, रूसी आपूर्ति दबावग्रस्त बाजार को कुछ अतिरिक्त ईंधन दे सकती है, लेकिन यह संकट का संपूर्ण समाधान नहीं है।

ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अमेरिका की दूसरी तैयारी

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन घरेलू तेल शोधन और ईंधन उत्पादन बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। इसके तहत रक्षा उत्पादन अधिनियम (Defense Production Act) का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे महत्वपूर्ण उद्योगों को वित्तीय सहायता और उत्पादन बढ़ाने के निर्देश देने का रास्ता खुलता है।

रिफाइनरी उद्योग से जुड़े अधिकारियों ने प्रशासन को सुझाव दिया है कि नई रिफाइनरी बनाने के बजाय मौजूदा संयंत्रों की क्षमता और दक्षता बढ़ाने पर निवेश करना अधिक व्यावहारिक होगा।

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