Lilavati Hospital Trust वित्तीय धोखाधड़ी मामला: Mumbai Sessions Court ने FIR के आदेश को सही ठहराया

Lilavati Hospital Trust वित्तीय धोखाधड़ी मामला: Mumbai Sessions Court ने FIR के आदेश को सही ठहराया

मुंबई, नौ अक्टूबर शहर की एक सत्र अदालत ने शुक्रवार को मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसमें पुलिस को लीलावती ट्रस्ट के कोष के गबन और ट्रस्टी किशोर मेहता की मौत का कारण बने कथित उत्पीड़न के आरोपों पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट (एलकेएमएमटी) मुंबई के बांद्रा इलाके में स्थित लीलावती हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का प्रबंधन करता है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कुणाल धनाजी जाधव ने पूर्व ट्रस्टी चेतन मेहता और अन्य आरोपियों की ओर से दायर पुनर्विचार अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत का फैसला ‘‘अधिकार क्षेत्र के दायरे में’’ है और उसमें किसी दखल की ज़रूरत नहीं है।

यह विवाद लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट की ओर से न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) के सामने दायर की गई एक शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चेतन मेहता और अन्य सह-आरोपियों ने ट्रस्टी के तौर पर काम करते हुए करोड़ों रुपये का गबन किया और ऐसे गैर-कानूनी लेन-देन किए, जिनसे ट्रस्ट गंभीर आर्थिक संकट में फंस गया। सभी दलीलें सुनने के बाद, सत्र अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि ‘‘कानून के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किया गया।

इसलिए मजिस्ट्रेट का आदेश (पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देना) अधिकार क्षेत्र के दायरे में है।

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