7 साल, 15 दिन की सुनवाई, 30 घंटे की बहस और 169 पेज का फैसला…हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने 9 अक्टूबर को तय कर दिया कि मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण 27% नहीं, 14% ही रहेगा। आखिर विवाद शुरू कहां से हुआ, कोर्ट ने संशोधन को असंवैधानिक क्यों माना, 13% होल्ड पदों का अब क्या होगा, असर किन-किन भर्तियों पर पड़ेगा; डिकोड करेंगे मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में…. सवाल 1: OBC आरक्षण 14% से 27% करने की नौबत क्यों आई? जवाब- मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण बढ़ाने की कोशिश करीब तीन दशक से चल रही है। 1994 के कानून में OBC को 14% आरक्षण मिला था। SC को 16% और ST को 20% आरक्षण था। यानी कुल आरक्षण 50% था। सवाल 2: जब OBC की आबादी ज्यादा है, तो 27% आरक्षण देने में दिक्कत क्या थी? जवाब- हाईकोर्ट ने कहा कि OBC को आरक्षण देने पर विवाद नहीं है, सवाल यह है कि आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने के लिए जरूरी कानूनी आधार था या नहीं। कोर्ट को ऐसे ठोस कारण नहीं मिले, जिनसे 50% की तय सीमा पार करना जरूरी साबित हो। सवाल 3: 13% होल्ड पदों पर अब किसे नौकरी मिलेगी, पहले से नौकरी कर रहे उम्मीदवारों का क्या होगा? जवाब- हाईकोर्ट ने 13% रुकी हुई सूची पर फैसला सुना दिया है। अब इन पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति मिलेगी। लेकिन पहले से नौकरी कर रहे OBC उम्मीदवारों के मामले में तारीख के हिसाब से अलग नियम तय किया गया है। 29 सितंबर 2022 तक की नियुक्तियां: जिन OBC उम्मीदवारों को 14% से ज्यादा और 27% तक आरक्षण के आधार पर नौकरी मिल चुकी थी, उन्हें नहीं हटाया जाएगा। उनके पदों को अगली तीन भर्ती प्रक्रियाओं में समायोजित किया जाएगा। 29 सितंबर 2022 के बाद की नियुक्तियां: अगर किसी OBC उम्मीदवार को 14% से ज्यादा आरक्षण के आधार पर नियुक्ति मिली है, तो 14% से ऊपर की नियुक्ति निरस्त होगी। उसकी जगह अनारक्षित वर्ग की सूची से उम्मीदवार को नौकरी दी जाएगी। तीन महीने में प्रक्रिया पूरी करनी होगी: MPPSC, कर्मचारी चयन मंडल और दूसरी भर्ती एजेंसियों को रुके हुए 13% पदों पर अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों की नियुक्ति अधिकतम तीन महीने में करनी होगी। सवाल 4: अब नई भर्तियों और कॉलेजों में OBC को कितना आरक्षण मिलेगा? जवाब- अब सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में OBC आरक्षण 27% नहीं, 14% रहेगा। सवाल 5: क्या अब OBC आरक्षण पर दोबारा कोर्ट में लड़ाई हो सकती है? जवाब- हाईकोर्ट में 27% आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा हो गया है, लेकिन इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर की ये कड़ी भी पढ़िए… 29 की नौकरी गई, फिर भी नहीं मान रहे पटवारी:ऐसा भी क्या डर, एक दस्तखत से क्या हो जाएगा मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना की 50 लाख मुफ्त रजिस्ट्रियों पर एक दस्तखत का पेंच फंसा है। 24 हजार पटवारी हड़ताल पर हैं। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल का दावा है कि सरकार ने पटवारियों की मांग मान ली है। फिर भी पटवारी काम पर नहीं लौट रहे। अब तक कुल 3588 पटवारियों पर एक्शन हुआ है…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।

