कानपुर नगर निगम की कार्यकारिणी की बैठक में शुक्रवार को एक बार फिर कन्वेंशन सेंटर के एमओयू के मुद्दे पर महापौर प्रमिला पांडेय और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के बीच मतभेद हुए। महापौर ने कहा कि कार्यकारिणी और सदन को जानकारी दिए बिना फैसले लिए जा रहे हैं, जो उचित नहीं है। इसलिए कार्यकारिणी की ओर से कन्वेंशन सेंटर के एमओयू को रद्द किया जाता है। इस पर नगर आयुक्त ने आपत्ति जताई। बैठक में पार्षदों ने सफाई व्यवस्था के निजीकरण और मंगल भवन की कमेटी भंग करने को लेकर भी सवाल उठाए। इसके अलावा टेंडर प्रक्रिया के नियमों में बदलाव को लेकर भी विरोध दर्ज कराया गया। महापौर ने कहा कि नगर निगम से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले कार्यकारिणी और सदन की जानकारी में होने चाहिए। बिना चर्चा और जानकारी के निर्णय लेने से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका प्रभावित होती है। मंगल भवन को लेकर पहले भी महापौर और नगर आयुक्त के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं। बैठक में यह मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में रहा। टेंडर नियमों में बदलाव पर उठे सवाल बैठक में टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई गई। पार्षदों के मुताबिक, सदन में यह नियम बनाया गया था कि एस्टीमेट से 15 प्रतिशत से कम दर आने पर संबंधित टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा। वहीं, किसी टेंडर में एक ही दर आने की स्थिति में लॉटरी के माध्यम से चयन करने का प्रावधान भी तय किया गया था। आरोप है कि अब नगर आयुक्त ने पीडब्ल्यूडी के नियमों का हवाला देते हुए निर्धारित दर से कम रेट पर टेंडर डालने की छूट दे दी है। इस फैसले को लेकर बैठक में विरोध हुआ। पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब नगर निगम के सदन में नियम तय किए जा चुके हैं, तो उनमें बदलाव किस आधार पर किया गया। सफाई के निजीकरण और कन्वेंशन सेंटर के एमओयू पर भी चर्चा बैठक में सफाई व्यवस्था के निजीकरण के प्रस्ताव पर भी पार्षदों ने सवाल उठाए। इसके अलावा कन्वेंशन सेंटर से जुड़े एमओयू को लेकर भी चर्चा हुई। पार्षदों ने इन मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया और सदन को विश्वास में लेने की जरूरत पर जोर दिया। कार्यकारिणी की बैठक में मंगल भवन, टेंडर प्रक्रिया, सफाई व्यवस्था और कन्वेंशन सेंटर के मुद्दों पर उठे सवालों से नगर निगम में प्रशासनिक फैसलों और पार्षदों के बीच समन्वय का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया। खबर अपडेट की जा रही है…

