किशनगंज जिले में विभागीय आदेश के बावजूद ठाकुरगंज प्रखंड के 43 विद्यालयों में 8 अक्टूबर को ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर छात्रों की ऑनलाइन एंट्री लंबित पाए जाने का मामला सामने आया है। विभाग ने सभी संबंधित प्रधानाध्यापकों को 9 अक्टूबर तक कार्य पूरा करने का निर्देश दिया है। संबंधित प्रधानाध्यापक स्वयं जवाबदेह होंगे विभागीय निर्देश के अनुसार प्रत्येक कार्य दिवस में छात्रों की उपस्थिति की ऑनलाइन प्रविष्टि करना अनिवार्य है। इसके बावजूद कई विद्यालयों द्वारा लापरवाही बरते जाने पर विभाग ने नाराजगी जताई है। जारी संदेश में कहा गया है कि देश की जानकारी होने के बावजूद कतिपय विद्यालयों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है, जो खेदजनक है। निर्धारित समय-सीमा तक प्रविष्टि पूरी नहीं होने पर संबंधित प्रधानाध्यापक स्वयं जवाबदेह होंगे। MDM के आंकड़ों पर भी सवाल इस मामले में मध्याह्न भोजन योजना (MDM) के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई विद्यालयों में उपस्थित छात्रों की संख्या और मध्याह्न भोजन से लाभान्वित छात्रों की संख्या में अंतर देखा जा रहा है। नियमानुसार विद्यालय के उपस्थिति पंजी, मध्याह्न भोजन वितरण पंजी और ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज विवरण का मिलान होना चाहिए। यदि उपस्थिति और भोजन से लाभान्वित छात्रों की संख्या में अंतर है, तो इसके कारणों की पड़ताल आवश्यक है। दर्ज विवरण की सत्यता सुनिश्चित करना भी जरूरी हालांकि केवल संख्या में अंतर से अनियमितता की पुष्टि नहीं होती, इसके लिए अभिलेखों की जांच और स्पष्टीकरण जरूरी है। प्रशासनिक स्तर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऑनलाइन प्रविष्टि लंबित रहने के पीछे तकनीकी समस्या है या विद्यालय स्तर पर लापरवाही। MDM के दैनिक आंकड़ों का वास्तविक उपस्थिति से मिलान कर पोर्टल पर दर्ज विवरण की सत्यता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। किशनगंज जिले में विभागीय आदेश के बावजूद ठाकुरगंज प्रखंड के 43 विद्यालयों में 8 अक्टूबर को ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर छात्रों की ऑनलाइन एंट्री लंबित पाए जाने का मामला सामने आया है। विभाग ने सभी संबंधित प्रधानाध्यापकों को 9 अक्टूबर तक कार्य पूरा करने का निर्देश दिया है। संबंधित प्रधानाध्यापक स्वयं जवाबदेह होंगे विभागीय निर्देश के अनुसार प्रत्येक कार्य दिवस में छात्रों की उपस्थिति की ऑनलाइन प्रविष्टि करना अनिवार्य है। इसके बावजूद कई विद्यालयों द्वारा लापरवाही बरते जाने पर विभाग ने नाराजगी जताई है। जारी संदेश में कहा गया है कि देश की जानकारी होने के बावजूद कतिपय विद्यालयों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है, जो खेदजनक है। निर्धारित समय-सीमा तक प्रविष्टि पूरी नहीं होने पर संबंधित प्रधानाध्यापक स्वयं जवाबदेह होंगे। MDM के आंकड़ों पर भी सवाल इस मामले में मध्याह्न भोजन योजना (MDM) के आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई विद्यालयों में उपस्थित छात्रों की संख्या और मध्याह्न भोजन से लाभान्वित छात्रों की संख्या में अंतर देखा जा रहा है। नियमानुसार विद्यालय के उपस्थिति पंजी, मध्याह्न भोजन वितरण पंजी और ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज विवरण का मिलान होना चाहिए। यदि उपस्थिति और भोजन से लाभान्वित छात्रों की संख्या में अंतर है, तो इसके कारणों की पड़ताल आवश्यक है। दर्ज विवरण की सत्यता सुनिश्चित करना भी जरूरी हालांकि केवल संख्या में अंतर से अनियमितता की पुष्टि नहीं होती, इसके लिए अभिलेखों की जांच और स्पष्टीकरण जरूरी है। प्रशासनिक स्तर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऑनलाइन प्रविष्टि लंबित रहने के पीछे तकनीकी समस्या है या विद्यालय स्तर पर लापरवाही। MDM के दैनिक आंकड़ों का वास्तविक उपस्थिति से मिलान कर पोर्टल पर दर्ज विवरण की सत्यता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

