GST काउंसिल की बैठक में हुए कई बड़े फैसले, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी बड़ी जानकारी

GST काउंसिल की बैठक में हुए कई बड़े फैसले, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी बड़ी जानकारी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि GST काउंसिल ने टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म कर दी है और मुकदमा चलाने की सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि GST काउंसिल ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर छोटे विक्रेताओं के लिए आसान नियमों को भी मंज़ूरी दी है। उन्होंने कहा कि रेट का ढांचा तय हो चुका है, इसलिए काउंसिल अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि टैक्स रोज़ाना कैसे काम करता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि GST रेट में बदलाव अब साल में एक बार होगा।

इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम के बारे में उन्होंने कहा कि 57वीं GST काउंसिल ने अधिकारियों की एक कमेटी बनाने का फ़ैसला किया है। यह कमेटी इस बात की जांच करेगी कि ऐसे असली खरीदार को कैसे सुरक्षित रखा जाए, जिसके पास सही इनवॉइस हो, जिसे सामान मिल गया हो और जिसने अपने सप्लायर को पूरा पेमेंट कर दिया हो। निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम दरों में बदलाव साल में सिर्फ़ एक बार करेंगे और यह फ़ैसला 1 अप्रैल से लागू होगा। GST काउंसिल के फ़ैसलों के अलावा, मैं केंद्र सरकार की एक पहल की घोषणा करना चाहती हूँ। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में अपनाए गए ‘फेसलेस’ तरीक़े की टैक्सपेयर्स ने तारीफ़ की है।

उन्होंने कहा कि उसी अनुभव के आधार पर, अब हम CGST एडमिनिस्ट्रेशन में भी इस सुधार को आगे बढ़ाना चाहते हैं। यह आज की मीटिंग के एजेंडा में शामिल नहीं था। यह आज की GST काउंसिल की मीटिंग का विषय भी नहीं है। हम इस मौक़े का फ़ायदा उठाकर इसकी घोषणा कर रहे हैं। इसीलिए मैं कह रही हूँ कि आज की GST काउंसिल के फ़ैसलों से अलग, मैं केंद्र सरकार की इस पहल की घोषणा करना चाहती हूँ।

उन्होंने कहा कि CGST एक्ट की धारा 16(2)(c) में बदलाव का एक एजेंडा था, जिसके तहत असली टैक्सपेयर को मिलने वाले ITC को रोक दिया जाता था या रिवर्स कर दिया जाता था। ऐसा तब होता था जब वैल्यू चेन में कोई सप्लायर जमा हुए ITC को जमा करने में नाकाम रहता था या नकली ITC पास करता था…अभी, ITC तब भी रोक दिया जाता है जब टैक्सपेयर के पास इनवॉइस होता है, उसे सप्लाई मिल चुकी होती है और उसने खुद सप्लायर को टैक्स का पैसा चुका दिया होता है। इसकी वजह यह है कि अगर सप्लाई चेन में किसी भी लेवल पर कोई सप्लायर नियमों का पालन नहीं करता है, तो समस्या वहीं से शुरू हो जाती है। इससे टैक्सपेयर के लिए मुश्किलें पैदा होती हैं। इसे सही करने की ज़रूरत है। काउंसिल ने आज इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया और इस गड़बड़ी को दूर करने के तरीकों पर चर्चा की। इसमें असली टैक्सपेयर की चिंताओं का ध्यान रखने और साथ ही ITC के गलत इस्तेमाल को रोकने के बीच संतुलन बनाना शामिल था।

सीतारमण ने कहा कि कई राज्यों के सुझावों और सहकारी संघवाद की भावना को ध्यान में रखते हुए, इस मामले की और जांच के लिए अधिकारियों की एक कमेटी बनाने का फैसला किया गया…हमने प्रस्ताव दिया था कि इसे सिर्फ़ टैक्सपेयर से जुड़े अगले सप्लायर तक ही सीमित रखा जाए, न कि पूरी चेन तक ले जाया जाए। लेकिन क्योंकि आज कुछ राज्यों ने अनुरोध किया है, इसलिए सहकारी संघवाद की भावना के तहत, हम इस मामले की और जांच के लिए अधिकारियों की एक कमेटी बनाने पर सहमत हुए हैं…अधिकारियों की कमेटी तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, और इसे तुरंत काउंसिल के सामने अंतिम फैसले के लिए रखा जाएगा; फैसला क्या होगा, यह मैं पहले से नहीं बता सकता। यह भी 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले एजेंडे का हिस्सा होगा। इस बैठक में GST दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जैसा कि मैंने पहले ही कहा है।

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