सिक्किम की खूबसूरत पहाड़ियों तक पहुंचने का अनुभव अब एक नए अध्याय में प्रवेश करने जा रहा है। भारतीय रेल ने गंगटोक को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए 34 किलोमीटर लंबी रंगपो-गंगटोक रेल लाइन को प्राथमिकता के स्तर पर आगे बढ़ाया है। करीब 9,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना पूरी होती है तो देश के सबसे आकर्षक पर्वतीय पर्यटन स्थलों में शामिल गंगटोक तक रेल पहुंच का रास्ता खुल जाएगा।
यह प्रस्ताव हाल में प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत काम करने वाले इंटीग्रेटेड मल्टीमॉडल नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) के सामने रखा गया है। मकसद केवल एक नई रेल लाइन बनाना नहीं, बल्कि ऐसा क्रम तैयार करना है जिसमें सिवोक-रंगपो लाइन के चालू होते ही रंगपो-गंगटोक पर काम में बड़ा अंतर न आए।
फिलहाल पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग क्षेत्र के सिवोक को पूर्वी सिक्किम के रंगपो से जोड़ने वाली 44.96 किलोमीटर लंबी सिवोक-रंगपो रेल परियोजना निर्माणाधीन है। करीब 17,124 करोड़ रुपये की लागत वाली इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना लगभग 75 प्रतिशत भौतिक प्रगति हासिल कर चुकी है।
देखा जाये तो हिमालयी भूगोल ने इस रेलमार्ग को देश की सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे परियोजनाओं में शामिल कर दिया है। हम आपको बता दें कि पूरी लाइन का करीब 86 प्रतिशत हिस्सा यानी 38.623 किलोमीटर सुरंगों से होकर गुजरेगा। मार्ग में 14 सुरंगें, 13 बड़े और 10 छोटे पुल बनाए जा रहे हैं। सबसे लंबी सुरंग 5.30 किलोमीटर और सबसे छोटी 538 मीटर की होगी। सुरंग निर्माण के लिए न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) अपनाई जा रही है।
इस रेलखंड पर सिवोक, रियांग, मेल्ली, रंगपो और तीस्ता बाजार स्टेशन प्रस्तावित हैं। तीस्ता बाजार में भूमिगत हॉल्ट स्टेशन इस परियोजना को तकनीकी रूप से और भी खास बनाता है। 44.96 किलोमीटर में 41.55 किलोमीटर हिस्सा पश्चिम बंगाल और 3.41 किलोमीटर सिक्किम में होगा।
इस परियोजना का सामरिक महत्व भी कम नहीं है। पहाड़ी राज्य सिक्किम तक सड़क संपर्क मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है, जबकि रेल नेटवर्क एक अतिरिक्त और अपेक्षाकृत अधिक स्थिर परिवहन विकल्प उपलब्ध कराएगा। आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति, यात्रियों की आवाजाही और माल परिवहन को इससे मजबूती मिलने की उम्मीद है। आगे चलकर देश के अलग-अलग हिस्सों से सिक्किम के लिए लंबी दूरी की ट्रेन सेवाओं का रास्ता भी खुल सकता है।
इसके अलावा, सिक्किम पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल पहाड़ी सड़कों पर निर्भरता कई बार यात्रा का अनुभव प्रभावित कर देती है। बारिश, भूस्खलन, बर्फबारी या खराब मौसम के कारण सड़क मार्ग बाधित होने पर पर्यटकों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, यात्रा कार्यक्रम बिगड़ जाता है और कई बार गंगटोक तथा आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। दूर-दराज से सिक्किम पहुंचे पर्यटकों के लिए ऐसी परिस्थितियां खास तौर पर निराशाजनक होती हैं। ऐसे में रेल कनेक्टिविटी एक अतिरिक्त और अधिक भरोसेमंद परिवहन विकल्प उपलब्ध करा सकती है, जिससे पर्यटन सीजन में यात्रियों की आवाजाही सुगम होने के साथ सिक्किम की पर्यटन क्षमता को भी नया विस्तार मिल सकता है।
रणनीतिक स्तर पर देखें तो यह परियोजना केवल गंगटोक तक ट्रेन पहुंचाने की कहानी नहीं है। पूर्वोत्तर की राजधानियों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की राष्ट्रीय कोशिश के क्रम में सिक्किम का राजधानी-कनेक्टिविटी नेटवर्क में आना क्षेत्रीय संपर्क को नया आयाम देगा। सिवोक-रंगपो और उसके बाद रंगपो-गंगटोक का जुड़ाव यात्री परिवहन, माल ढुलाई, पर्यटन और व्यापक आर्थिक गतिविधियों को एक ही कॉरिडोर में जोड़ सकता है।
साथ ही पर्यटकों के लिए इसकी तस्वीर बेहद रोमांचक है। कल्पना कीजिए कि पहाड़ों के बीच सुरंग से निकलती ट्रेन, खिड़की के बाहर तीस्ता की घाटियां, घने जंगल, ऊंचे पहाड़ और फिर धीरे-धीरे गंगटोक की ओर बढ़ता रेलमार्ग। जिस सिक्किम की यात्रा अब तक मुख्यतः सड़क या हवाई मार्ग से जुड़ी रही है, वहां भविष्य में ट्रेन की यात्रा खुद एक पर्यटन अनुभव बन सकती है।
हम आपको याद दिला दें कि 2021 में सिवोक-रंगपो परियोजना की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देरी के लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए थे। अब परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। यदि इसके बाद रंगपो-गंगटोक विस्तार भी गति पकड़ता है, तो सिक्किम की पहाड़ियों में केवल रेल की पटरियां नहीं बिछेंगी बल्कि पर्यटन, व्यापार, आपूर्ति और रणनीतिक संपर्क के लिए एक नया गलियारा तैयार होगा।
बहरहाल, गंगटोक तब सिर्फ पहाड़ों की खूबसूरती देखने की मंजिल नहीं रहेगा; वह भारतीय रेल के नक्शे पर दर्ज एक ऐसा गेटवे बन सकता है, जहां रोमांचक हिमालयी यात्रा और आधुनिक परिवहन का संगम दिखाई देगा।
-नीरज कुमार दुबे

