जमुई में कभी अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले चोरमरा में अब विकास की नई तस्वीर उभरने लगी है। जनजातीय विकास के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती और स्थानीय विरासत को पर्यटन से जोड़ने की पहल शुरू की गई है। जिला प्रशासन ने चोरमरा में इको-टूरिज्म की संभावनाओं को तलाशते हुए 20 एकड़ चिह्नित भूमि और प्रसिद्ध भट्ठा बाबा गर्म जलस्रोत का स्थलीय निरीक्षण किया। Support to Tribal Research Institute Scheme के तहत चोरमरा में एक दिवसीय जनजातीय विकास कार्यशाला आयोजित की गई। जिला पदाधिकारी और उप विकास आयुक्त ने संयुक्त रूप से कार्यशाला का उद्घाटन किया। कार्यशाला में जनजातीय समुदाय की जरूरतों, सरकारी योजनाओं की स्थिति और शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका तथा बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा हुई। बिजली की पहुंच सुनिश्चित करने का दिया आश्वासन कार्यशाला के दौरान डीएम ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं और अपेक्षाएं सुनीं। ग्रामीणों ने बिजली, सड़क, स्वास्थ्य उपकेंद्र समेत अन्य सुविधाओं की आवश्यकता बताई। डीएम ने चोरमरा के समग्र विकास के लिए प्रशासन की प्रतिबद्धता जताते हुए क्षेत्र में बिजली की पहुंच सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। प्रशासन के आश्वासन से ग्रामीणों में भी उम्मीद जगी। इसके बाद डीएम ने भट्ठा बाबा के समीप स्थित गर्म जलस्रोत का निरीक्षण किया। प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय आस्था से जुड़े इस स्थल को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की संभावनाओं पर अधिकारियों के साथ चर्चा की गई। स्थल की प्राकृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। ग्रामीणों को रोजगार का मिलेगा अवसर प्रशासन की इस पहल से चोरमरा में विकास और रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। प्राकृतिक स्थलों को इको-टूरिज्म से जोड़ने पर स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को रोजगार तथा आजीविका के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, चोरमरा की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को जिले के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलने की संभावना है। स्थलीय निरीक्षण के दौरान वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुंगेर, उप विकास आयुक्त, जमुई, सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग समेत संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे। जमुई में कभी अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले चोरमरा में अब विकास की नई तस्वीर उभरने लगी है। जनजातीय विकास के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती और स्थानीय विरासत को पर्यटन से जोड़ने की पहल शुरू की गई है। जिला प्रशासन ने चोरमरा में इको-टूरिज्म की संभावनाओं को तलाशते हुए 20 एकड़ चिह्नित भूमि और प्रसिद्ध भट्ठा बाबा गर्म जलस्रोत का स्थलीय निरीक्षण किया। Support to Tribal Research Institute Scheme के तहत चोरमरा में एक दिवसीय जनजातीय विकास कार्यशाला आयोजित की गई। जिला पदाधिकारी और उप विकास आयुक्त ने संयुक्त रूप से कार्यशाला का उद्घाटन किया। कार्यशाला में जनजातीय समुदाय की जरूरतों, सरकारी योजनाओं की स्थिति और शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका तथा बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा हुई। बिजली की पहुंच सुनिश्चित करने का दिया आश्वासन कार्यशाला के दौरान डीएम ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं और अपेक्षाएं सुनीं। ग्रामीणों ने बिजली, सड़क, स्वास्थ्य उपकेंद्र समेत अन्य सुविधाओं की आवश्यकता बताई। डीएम ने चोरमरा के समग्र विकास के लिए प्रशासन की प्रतिबद्धता जताते हुए क्षेत्र में बिजली की पहुंच सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। प्रशासन के आश्वासन से ग्रामीणों में भी उम्मीद जगी। इसके बाद डीएम ने भट्ठा बाबा के समीप स्थित गर्म जलस्रोत का निरीक्षण किया। प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय आस्था से जुड़े इस स्थल को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की संभावनाओं पर अधिकारियों के साथ चर्चा की गई। स्थल की प्राकृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। ग्रामीणों को रोजगार का मिलेगा अवसर प्रशासन की इस पहल से चोरमरा में विकास और रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। प्राकृतिक स्थलों को इको-टूरिज्म से जोड़ने पर स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को रोजगार तथा आजीविका के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, चोरमरा की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को जिले के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलने की संभावना है। स्थलीय निरीक्षण के दौरान वन प्रमंडल पदाधिकारी, मुंगेर, उप विकास आयुक्त, जमुई, सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग समेत संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहे।

