सुप्रीम कोर्ट पहुंचा झारखंड DGP की नियुक्ति का विवाद:झारखंड सरकार और केंद्र में तकरार, आरोप- नियुक्तियों में SC की गाइडलाइन का पालन नहीं हुआ

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा झारखंड DGP की नियुक्ति का विवाद:झारखंड सरकार और केंद्र में तकरार, आरोप- नियुक्तियों में SC की गाइडलाइन का पालन नहीं हुआ

झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र ने शीर्ष अदालत में आवेदन दाखिल कर आरोप लगाया है कि झारखंड सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए 2025 में बनाई गई नियमावली में सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। केंद्र का कहना है कि राज्य ने नियमावली अधिसूचित करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से अनुमति भी नहीं ली। आवेदन में 2025 की नियमावली के तहत हुई डीजीपी नियुक्तियों को अवैध घोषित करने की मांग की गई है। इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का पक्ष रखते हुए मामला उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में भी झारखंड में नियमित डीजीपी की नियुक्ति को लेकर स्थिति पर ध्यान दिया था और अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। अनुराग गुप्ता को 2 साल का कार्यकाल देने पर आपत्ति केंद्र के आवेदन के अनुसार, झारखंड सरकार ने 2 फरवरी 2025 को अनुराग गुप्ता को डीजीपी नियुक्त किया था। उस समय उनकी सेवानिवृत्ति में करीब तीन महीने ही बचे थे और उनकी सुपरएनुएशन की तारीख 30 अप्रैल 2025 थी। इसके बावजूद उन्हें दो साल का कार्यकाल दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी के तौर पर उनकी नियुक्ति पर 22 अप्रैल, 3 मई और 23 मई 2025 को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी। केंद्र का आरोप है कि राज्य ने प्रकाश सिंह के निर्देशों में डीजीपी को दो साल का कार्यकाल देने वाले हिस्से को तो आधार बनाया, लेकिन नियुक्ति के लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2026 के आदेश में भी दर्ज किया था कि झारखंड में कार्यवाहक डीजीपी काम कर रहा था। राज्य की ओर से नियमित डीजीपी नियुक्ति के लिए प्रस्ताव यूपीएससी को नहीं भेजा गया था। तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के लिए बदला नियम केंद्र ने आवेदन में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति का भी उल्लेख किया है। राज्य सरकार ने 29 दिसंबर 2025 के प्रस्ताव के जरिए डीजीपी बनने के लिए छह महीने की शेष सेवा की शर्त हटा दी। इसके अगले दिन, 30 दिसंबर 2025 को तदाशा मिश्रा को डीजीपी नियुक्त किया गया, जबकि वह 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने वाली थीं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 6 जनवरी 2026 को राज्य सरकार से नियमावली और मिश्रा की नियुक्ति रद्द करने को कहा था। इस नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में एमिकस क्यूरी ने भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले नियुक्ति प्रकाश सिंह मामले में तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं थी। केंद्र का कहना है कि झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का चयनात्मक तरीके से इस्तेमाल किया। अब केंद्र ने शीर्ष अदालत से 2025 की नियमावली के तहत की गई डीजीपी नियुक्तियों को अवैध घोषित करने का आग्रह किया है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है। अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को है। झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र ने शीर्ष अदालत में आवेदन दाखिल कर आरोप लगाया है कि झारखंड सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए 2025 में बनाई गई नियमावली में सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। केंद्र का कहना है कि राज्य ने नियमावली अधिसूचित करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से अनुमति भी नहीं ली। आवेदन में 2025 की नियमावली के तहत हुई डीजीपी नियुक्तियों को अवैध घोषित करने की मांग की गई है। इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का पक्ष रखते हुए मामला उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में भी झारखंड में नियमित डीजीपी की नियुक्ति को लेकर स्थिति पर ध्यान दिया था और अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। अनुराग गुप्ता को 2 साल का कार्यकाल देने पर आपत्ति केंद्र के आवेदन के अनुसार, झारखंड सरकार ने 2 फरवरी 2025 को अनुराग गुप्ता को डीजीपी नियुक्त किया था। उस समय उनकी सेवानिवृत्ति में करीब तीन महीने ही बचे थे और उनकी सुपरएनुएशन की तारीख 30 अप्रैल 2025 थी। इसके बावजूद उन्हें दो साल का कार्यकाल दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी के तौर पर उनकी नियुक्ति पर 22 अप्रैल, 3 मई और 23 मई 2025 को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी। केंद्र का आरोप है कि राज्य ने प्रकाश सिंह के निर्देशों में डीजीपी को दो साल का कार्यकाल देने वाले हिस्से को तो आधार बनाया, लेकिन नियुक्ति के लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2026 के आदेश में भी दर्ज किया था कि झारखंड में कार्यवाहक डीजीपी काम कर रहा था। राज्य की ओर से नियमित डीजीपी नियुक्ति के लिए प्रस्ताव यूपीएससी को नहीं भेजा गया था। तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के लिए बदला नियम केंद्र ने आवेदन में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति का भी उल्लेख किया है। राज्य सरकार ने 29 दिसंबर 2025 के प्रस्ताव के जरिए डीजीपी बनने के लिए छह महीने की शेष सेवा की शर्त हटा दी। इसके अगले दिन, 30 दिसंबर 2025 को तदाशा मिश्रा को डीजीपी नियुक्त किया गया, जबकि वह 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने वाली थीं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 6 जनवरी 2026 को राज्य सरकार से नियमावली और मिश्रा की नियुक्ति रद्द करने को कहा था। इस नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में एमिकस क्यूरी ने भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले नियुक्ति प्रकाश सिंह मामले में तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं थी। केंद्र का कहना है कि झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का चयनात्मक तरीके से इस्तेमाल किया। अब केंद्र ने शीर्ष अदालत से 2025 की नियमावली के तहत की गई डीजीपी नियुक्तियों को अवैध घोषित करने का आग्रह किया है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जारी है। अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को है।  

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