Election Commission के खिलाफ धरने पर बैठे Rahul Gandhi हिरासत के बाद रिहा

Election Commission के खिलाफ धरने पर बैठे Rahul Gandhi हिरासत के बाद रिहा

नयी दिल्ली, छह अक्टूबर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव प्रणाली में कथित अनियमितता के खिलाफ मंगलवार को ‘इंडिया’ गठबंधन के मार्च की धुरी के रूप में सामने आए और निर्वाचन आयोग मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए, जिसके करीब आठ घंटे बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उनके साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, केसी वेणुगोपाल और विपक्षी दलों के कुछ अन्य नेताओं को भी हिरासत में ले लिया गया। हालांकि, करीब दो घंटे बाद रात लगभग 10 बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा और अन्य नेताओं को रिहा कर दिया गया।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं समेत करीब 260 लोगों को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों में 10 सांसद भी शामिल थे। हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा,
लोकतंत्र के गद्दारों को बचाने के लिए बचे-खुचे लोकतंत्र को घसीटा गया है।

हिसाब होगा, एक भी देशद्रोही बख्शा नहीं जाएगा।’’
राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक रूप से नाटकीय घटनाक्रम की शुरुआत विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों के मार्च से हुई, जो संसद भवन से निर्वाचन सदन के लिए निकाला गया था। पुलिस ने विपक्षी दलों के सांसदों को संसद मार्ग पर नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के सामने रोक दिया। इसके बाद विपक्षी सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।

कुछ देर बाद, पुलिस ने कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में ले लिया। हालांकि, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस तथा सहयोगी दलों के कुछ नेता आकाशवाणी भवन परिसर में एक बरगद के पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं का धरना दोपहर 12.20 बजे शुरू हुआ।

इस दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘वोट चोरी’ के जरिये देश को ‘‘हाईजैक’’ करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि यह ‘‘देशद्रोह’’ है और ऐसा करने वाले बच नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के सांसद निर्वाचन आयुक्तों से मिलना चाहते हैं और उन्हें मिलना पड़ेगा।

राहुल गांधी ने संवाददाताओं से कहा कि करीब 300 सांसद मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों से मिलने के लिए पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल किया, ‘‘पता नहीं, देश में क्या हो रहा है? अगर निर्वाचन आयोग जन प्रतिनिधियों से नहीं मिलेगा तो फिर लोकतंत्र का क्या मतलब है?’’
धरना स्थल पर कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता भी जमा हो गए और अपने नेताओं के पक्ष में तथा सरकार और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की।

पुलिस ने रात करीब आठ बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्षी दलों के अन्य नेताओं को बलपूर्वक उठाया और बस में बैठाकर वहां से ले गई। इन्हें जीटीबी नगर इलाके में स्थित किंग्सवे कैम्प ले जाया गया। पुलिस ने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, के. सुरेश, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और इमरान प्रतापगढ़ी के अलावा तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन, समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्ला नदवी और कुछ अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया।

हिरासत में लिए जाने के बाद नेताओं को कुछ देर किंग्सवे कैम्प में रखा गया। इसके बाद, रात करीब 10 बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को पुलिस ने रिहा कर दिया। इससे पहले ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसद सुबह करीब 11 बजे संसद भवन के मकर द्वार से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय ‘निर्वाचन सदन’ की ओर मार्च के लिए निकले थे।

संसद मार्ग पर नीति आयोग भवन के निकट सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद सांसद वहीं धरने पर बैठ गए। मार्च के दौरान विपक्षी दलों के सांसद मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आरएसएस के गणवेश में दर्शाने वाले कटआउट लेकर चल रहे थे। उन्होंने ‘‘भाजपा ही सीईसी, सीईसी ही भाजपा है’’, ‘‘वोट चोर, गद्दी छोड़’’ और ‘‘लोकतंत्र बेचना बंद करो’’ जैसे नारे लगाए।

राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी पुलिस के बैरिकेड पर चढ़ गए। प्रियंका गांधी को जबरन एक बस में बैठाया गया था, लेकिन वह जल्द ही बस से उतरकर अपने भाई राहुल गांधी के साथ आकाशवाणी भवन के गेट पर पहुंच गईं। पुलिस द्वारा रोके जाने के बावजूद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, वेणुगोपाल और हुड्डा स्वागत कक्ष वाले गेट से आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर गए और बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए।

धरना स्थल पर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ‘‘वोट चोरी’’ करके देश को ‘‘हाईजैक’’ किया है। उन्होंने कहा कि ‘‘इन लोगों ने जो किया है, वह देशद्रोह है’’ और दावा किया कि जिम्मेदार लोगों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ज्ञानेश, अब हो गया भाई।

इस्तीफा देने का समय आ गया है।’’
विपक्षी दलों की प्रमुख मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाना और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करना शामिल है।

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