अस्पतालों की फार्मेसी में मरीजों को अब दवा की खरीद और बिक्री कीमत दोनों की जानकारी मिलेगी। 1 नवंबर से अस्पतालों की फार्मेसियों को दवाओं की खरीद कीमत (पीटीआर) और मरीज को बेचने की कीमत (पीटीसी) सार्वजनिक करनी होगी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने इसके निर्देश जारी किए हैं। क्यूआर कोड स्कैन कर सकेंगे मरीज फार्मेसी काउंटर पर वेबसाइट का यूआरएल और क्यूआर कोड लगाया जाएगा। मरीज या तीमारदार इसे मोबाइल से स्कैन कर दवा की खरीद कीमत, बिक्री कीमत, निर्माता, ब्रांड और जेनेरिक नाम देख सकेंगे। मेडिकल डिवाइस और न्यूट्रास्युटिकल्स की जानकारी भी उपलब्ध होगी। हर हफ्ते अपडेट करना होगा स्टॉक सभी रिटेल फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट बनानी होगी। इसमें लाइसेंस नंबर, लाइसेंस धारक, फार्मासिस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, पता और दवाओं के स्टॉक की जानकारी देनी होगी। स्टॉक की जानकारी हर सप्ताह अपडेट करनी होगी। 130 दवाओं की जांच में सामने आया बड़ा अंतर एफएसडीए ने 214 अस्पताल फार्मेसियों से मिले आंकड़ों में 130 दवाओं की कीमतों का विश्लेषण किया। इनमें 36 दवाओं की एमआरपी खरीद कीमत से 10 गुने से ज्यादा मिली। कुछ दवाओं में खरीद कीमत और एमआरपी का अंतर 67 गुने तक था। पॉलीमिक्सिन-बी में 74 से 4,980 रुपये तक का अंतर जांच में पॉलीमिक्सिन-बी इंजेक्शन की खरीद कीमत 74.09 रुपये मिली, जबकि इसकी एमआरपी 4,980.94 रुपये थी। एफएसडीए ने दवाओं की कीमतों में इस अंतर को लेकर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) से हस्तक्षेप की मांग की है। थोक लाइसेंस पर लगी रोक भी हटेगी नए थोक दवा बिक्री लाइसेंस जारी करने पर लगी रोक 11 अक्टूबर से हटाई जाएगी। नवरात्रि को देखते हुए दवा कारोबारियों को यह राहत दी गई है।

