जमुई में बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. त्रिपुरारी प्रसाद सिंह का 96वां जन्मदिवस मंगलवार को राजकीय समारोह के तौर पर मनाया गया। प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं और आम लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। समारोह की शुरुआत सुबह 10 बजे जमुई शहर में त्रिपुरारी बाबू के मूर्तिस्थल पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद त्रिपुरारी घाट स्थित उनके समाधि स्थल पर फूल चढ़ाए गए। अंत में महिसौड़ी स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि सभा हुई और प्रसाद बांटा गया। राज्य सरकार की ओर से परिवहन मंत्री दामोदर रावत, जिलाधिकारी नवीन और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। मंत्री रावत ने कहा कि त्रिपुरारी बाबू ने अन्याय और जुल्म के खिलाफ समाजवादी आंदोलन के जरिए संघर्ष किया। उन्होंने कमजोर वर्गों के लिए आवाज उठाई। रावत ने बताया कि गरही डैम का निर्माण भी उनके राजनीतिक संघर्ष की उपलब्धि है, जिससे कई गांवों को सिंचाई का लाभ मिल रहा है। जिलाधिकारी नवीन ने कहा कि त्रिपुरारी सिंह ने मानवता और जनकल्याण के लिए काम किया और ईमानदार राजनेता की छवि बनाई। उन्होंने खास संसदीय परंपराएं भी स्थापित कीं। त्रिपुरारी बाबू की धर्मपत्नी एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य इंदु सिंह ने कहा कि उन्होंने जनता और समाज के उत्थान के लिए जीवनभर संघर्ष किया और महज 57 वर्ष की उम्र में दुनिया से विदा हो गए। उनके पुत्र शांतनु सिंह और संदीप सिंह ने कहा कि उनके उच्च संसदीय जीवन, जनसंघर्ष और समाजवादी राजनीति में योगदान को देखते हुए बिहार सरकार ने 6 अक्टूबर को राजकीय समारोह के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। समारोह में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी रही। उमड़ी भीड़ ने यह संदेश दिया कि त्रिपुरारी बाबू आज भी जमुई के जनमानस में जीवित हैं और समाज के हर वर्ग में उनके प्रति सम्मान कायम है। जमुई में बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्व. त्रिपुरारी प्रसाद सिंह का 96वां जन्मदिवस मंगलवार को राजकीय समारोह के तौर पर मनाया गया। प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं और आम लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। समारोह की शुरुआत सुबह 10 बजे जमुई शहर में त्रिपुरारी बाबू के मूर्तिस्थल पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद त्रिपुरारी घाट स्थित उनके समाधि स्थल पर फूल चढ़ाए गए। अंत में महिसौड़ी स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि सभा हुई और प्रसाद बांटा गया। राज्य सरकार की ओर से परिवहन मंत्री दामोदर रावत, जिलाधिकारी नवीन और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। मंत्री रावत ने कहा कि त्रिपुरारी बाबू ने अन्याय और जुल्म के खिलाफ समाजवादी आंदोलन के जरिए संघर्ष किया। उन्होंने कमजोर वर्गों के लिए आवाज उठाई। रावत ने बताया कि गरही डैम का निर्माण भी उनके राजनीतिक संघर्ष की उपलब्धि है, जिससे कई गांवों को सिंचाई का लाभ मिल रहा है। जिलाधिकारी नवीन ने कहा कि त्रिपुरारी सिंह ने मानवता और जनकल्याण के लिए काम किया और ईमानदार राजनेता की छवि बनाई। उन्होंने खास संसदीय परंपराएं भी स्थापित कीं। त्रिपुरारी बाबू की धर्मपत्नी एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य इंदु सिंह ने कहा कि उन्होंने जनता और समाज के उत्थान के लिए जीवनभर संघर्ष किया और महज 57 वर्ष की उम्र में दुनिया से विदा हो गए। उनके पुत्र शांतनु सिंह और संदीप सिंह ने कहा कि उनके उच्च संसदीय जीवन, जनसंघर्ष और समाजवादी राजनीति में योगदान को देखते हुए बिहार सरकार ने 6 अक्टूबर को राजकीय समारोह के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। समारोह में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी रही। उमड़ी भीड़ ने यह संदेश दिया कि त्रिपुरारी बाबू आज भी जमुई के जनमानस में जीवित हैं और समाज के हर वर्ग में उनके प्रति सम्मान कायम है।

