NCR और आसपास के इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने उद्योगों की निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। अब उद्योगों में ऐसे कैमरे लगाए जाएंगे, जिनके जरिए यह देखा जा सकेगा कि वहां किस तरह के ईंधन का इस्तेमाल हो रहा है और नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं। पराली जलाने और दीपावली के बाद पटाखों से एक्यूआई 500 तक पहुंच जाता है। कैमरों से होगी निगरानी आयोग ने कहा है कि उद्योगों को पहले से लगे कैमरों के अलावा कुछ और कैमरे लगाने होंगे। इन कैमरों से ईंधन रखने की जगह और जहां ईंधन मशीनों में डाला जाता है, उन स्थानों की लगातार निगरानी की जाएगी। अगर किसी उद्योग में गैस का इस्तेमाल होता है तो गैस का मीटर भी कैमरे की निगरानी में रहेगा। इन कैमरों से मिलने वाली तस्वीरें और वीडियो तुरंत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संबंधित अधिकारियों तक पहुंचेंगे। इससे अधिकारी दूर बैठकर भी यह देख सकेंगे कि उद्योगों में किस तरह का ईंधन इस्तेमाल किया जा रहा है। कैमरों और इंटरनेट की व्यवस्था बिजली जाने की स्थिति में भी चलती रहे, इसके लिए पर्याप्त बैकअप की व्यवस्था करना भी उद्योगों की जिम्मेदारी होगी। 31 अक्टूबर को लगाने होंगे कैमरे सभी उद्योगों को ये अतिरिक्त कैमरे 31 अक्टूबर 2026 तक लगाने होंगे। संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को इन कैमरों से मिलने वाली जानकारी देखने के लिए जरूरी व्यवस्था भी तैयार करनी होगी। इन सभी निर्देशों पर कितना काम हुआ है, इसकी जानकारी संबंधित विभागों को *1 नवंबर 2026 तक* आयोग को देनी होगी। आयोग ने बताया कि NCR में उद्योगों के लिए कुछ खास ईंधनों को ही इस्तेमाल करने की अनुमति है। इसके बावजूद निरीक्षण के दौरान कई उद्योगों में ऐसे ईंधन का इस्तेमाल पाया गया, जिनकी अनुमति नहीं है। इसी वजह से अब उद्योगों में ईंधन के इस्तेमाल पर लगातार नजर रखने का फैसला लिया गया है। प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या गाजियाबाद -NCR में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो जाती है। उद्योगों से निकलने वाला धुआं भी वायु प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण कारण है। इसी को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले भी उद्योगों में कैमरे और प्रदूषण की निगरानी करने वाले उपकरण लगाने के निर्देश दिए थे। अब कैमरों की निगरानी का दायरा बढ़ाया जा रहा है, जिससे अधिकारियों को यह पता चलता रहे कि उद्योगों में क्या हो रहा है और कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया जा रहा। इससे प्रदूषण पर नियंत्रण रखने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

