नयी दिल्ली, छह अक्टूबर यहां की एक अदालत ने सोमवार को गिरफ्तार किए गए दो प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए “हिरासत में यातना” के आरोपों पर दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांगी, जबकि गैरकानूनी जमावड़े और सार्वजनिक स्थान को बाधित करने के आरोपी 17 लोगों को यह कहते हुए जमानत दे दी कि वे युवा हैं और उनका पूरा करियर उनके आगे है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने का अधिकार है, लेकिन ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर हमला करना गंभीर चिंता का विषय है, जिसकी शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में अनुमति नहीं दी जा सकती। सोमवार रात ड्यूटी न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिमेष कुमार ने यह आदेश पारित किया।
संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन करने के दौरान 17 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था। वे एसआईआर विवाद को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार से कथित तौर पर छेड़छाड़ करने वाले एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग कर रहे थे। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी (आईओ) के अनुसार, आरोपियों को इसलिए गिरफ्तार किया गया था क्योंकि वे एक गैरकानूनी सभा का हिस्सा थे और उन्होंने उस सार्वजनिक स्थान को बाधित या अवरुद्ध किया था, जहां निषेधाज्ञा लागू थी, और इसके अलावा, जब उन्हें हिरासत में लिया जा रहा था, तो उन्होंने महिला पुलिस अधिकारी सहित पुलिस अधिकारियों के साथ हाथापाई की।
पुलिस ने आरोप लगाया कि उन्होंने उस बस की खिड़की के शीशे और पीछे के शीशे भी तोड़ दिए, जिसमें उन्हें बैठाया जा रहा था, और उन्होंने जांच के दौरान सहयोग नहीं किया। अदालत ने कहा कि आरोपियों के वकील ने दलील दी कि कथित तौर पर प्रदर्शन कर रहे करीब 50 लोगों में से केवल 17 को गिरफ्तार किया गया था और कथित घटना की कोई सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई। अदालत ने कहा, “यह भी तर्क दिया गया है कि आरोपी व्यक्ति बहुत कम उम्र के हैं और उनमें से अधिकांश छात्र हैं जो असहमति व्यक्त करने और विरोध करने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर रहे थे।”
अपने आदेश में अदालत ने कहा, “यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि आरोपियों के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
आईओ द्वारा पेश किए गए मेडिको-लीगल केस (एमएलसी) के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी को कथित तौर पर चोटें आई हैं।”
उसने कहा कि किसी भी व्यक्ति को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है, ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों पर हमला करना गंभीर चिंता का विषय है, जिसकी शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में अनुमति नहीं दी जा सकती। उसने कहा कि आरोपी युवा हैं और ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वे आदतन अपराधी हैं। अदालत ने कहा, “उनका पूरा करियर उनके सामने है।
इसलिए, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, आरोपियों को 15,000 रुपये के जमानत बांड और इतनी ही राशि की एक जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर जमानत दी जाती है।”
अदालत ने कहा कि पूछताछ के दौरान, धर्मेंद्र और समर्थ नाम के आरोपियों ने बताया कि हिरासत में लिए जाने के बाद संसद मार्ग थाने के अंदर उनकी पिटाई की गई, जिसके कारण उन्हें चोटें आईं, जबकि शेख यूनुस ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान धक्का दिए जाने से उन्हें चोटें आईं। उसने कहा, “चूंकि आरोपी धर्मेंद्र और समर्थ ने हिरासत में यातना दिए जाने के आरोप लगाए हैं, इसलिए इस संबंध में डीसीपी नई दिल्ली से रिपोर्ट मंगाई जाए। थाना संसद मार्ग की संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी सुरक्षित रखी जाए।

