प्रियांक खरगे बोले- दिग्विजय सिंह पक्के सनातनी:कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा- RSS को हिंदू धर्म का सिर-पैर नहीं पता

प्रियांक खरगे बोले- दिग्विजय सिंह पक्के सनातनी:कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा- RSS को हिंदू धर्म का सिर-पैर नहीं पता

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर दिए बयान का कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे ने खुलकर समर्थन किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक ने दिग्विजय सिंह को “पक्का सनातनी” बताते हुए RSS पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि RSS को इस धर्म का सिर-पैर तक पता नहीं है, फिर भी वह ऐसे व्यवहार करता है, जैसे करीब 3 हजार साल पुराने धर्म का अकेला संरक्षक वही हो। प्रियांक खरगे ने कहा- दिग्विजय सिंह एक पक्के सनातनी हैं। RSS को इस भावना का सिर या पैर तक नहीं पता। वे ऐसे व्यवहार करते हैं, जैसे वे 3 हजार साल पुराने धर्म के एकमात्र संरक्षक हैं, जबकि उन्हें बने हुए अभी 100 साल ही हुए हैं।” उन्होंने हिंदू धर्म और हिंदुत्व को अलग बताते हुए कहा, “हिंदू धर्म और हिंदुत्व में बड़ा अंतर है। हिंदुत्व RSS से शुरू हुआ, जबकि हिंदू धर्म हजारों साल से मौजूद है। इसलिए किसी हिंदू को RSS से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है।” प्रियांक यहीं नहीं रुके। उन्होंने RSS पर आरोप लगाते हुए कहा कि “RSS एक अनरजिस्टर्ड मनी लॉन्ड्रिंग यूनिट है, जो धर्म के नाम पर सभी अवैध गतिविधियां कर रही है।” दिग्विजय ने क्या कहा था, जिस पर प्रियांक ने समर्थन किया दिग्विजय सिंह ने अपने हालिया बयान में कहा था कि देश में सनातन धर्म की जगह हिंदुत्व को केंद्र में लाया गया है और RSS तथा VHP लगातार हिंदुत्व की बात कर रहे हैं। उन्होंने हिंदुत्व को सावरकर से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि इसके कारण हिंदू-मुस्लिम, हिंदू-सिख और हिंदू-ईसाई समाज के बीच विभाजन पैदा हुआ है। दिग्विजय ने कहा था कि “भारत सभी का है और अनेकता में एकता हमारी ताकत है।” दिग्विजय ने कहा कि आज लोग हिंदू धर्म की जगह सनातन धर्म की बात करते हैं, लेकिन ‘हिंदू’ शब्द वेद, उपनिषद और पुराणों में नहीं मिलता। उनके मुताबिक, सनातन धर्म की मूल भावना ‘वसुधैव कुटुंबकम’ है और RSS-VHP ने हिंदुत्व के नाम पर इस मूल विचार को बदल दिया है। उन्होंने कहा था कि वे RSS और VHP की विचारधारा के विरोधी हैं, लेकिन सनातन धर्म और भगवान राम में उनकी आस्था है। इसी सोच के साथ उन्होंने 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ निकालने की घोषणा की है। यात्रा को उन्होंने धर्म के नाम पर धन कमाने और धर्म को राजनीतिक हथियार बनाने वालों के खिलाफ बताया है। राम मंदिर के चंदे पर भी दिग्विजय के गंभीर आरोप दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे का इस्तेमाल BJP-RSS के कार्यालय बनाने और चुनावी गतिविधियों में किया गया। उन्होंने राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे में भी कथित हेराफेरी का आरोप लगाया है। दिग्विजय ने राम मंदिर में चढ़ाए गए कैश, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषणों की कथित चोरी का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि SIT की जांच में आरोपियों ने 2-3 करोड़ रुपए कैश और सोने-चांदी के गहने चोरी करने की बात कबूल की। उनका दावा है कि चोरी की घटनाओं की CCTV रिकॉर्डिंग थी, लेकिन करीब आठ महीने की फुटेज डिलीट कर दी गई। उन्होंने कुल कथित चोरी का अनुमान 200 से 300 करोड़ रुपए तक बताया है। 1989 की रामशिला पूजन का भी हिसाब मांगा दिग्विजय ने 1989 के रामशिला पूजन अभियान का हिसाब भी मांगा है। उनका दावा है कि उस दौरान करीब 1400 करोड़ रुपए जुटाए गए थे, जबकि VHP की ओर से 8.25 करोड़ रुपए मिलने की बात कही गई। उन्होंने चांदी की ईंटों का हिसाब भी सार्वजनिक करने की मांग की। दिग्विजय का कहना है कि उन्होंने 1989 में रामशिला पूजन के लिए दान दिया था और राम मंदिर निर्माण का समर्थन किया है, लेकिन RSS और VHP की विचारधारा से वे सहमत नहीं हैं। दिग्विजय के राम मंदिर चंदे के आरोप पर शाइना एनसी का पलटवार शिवसेना नेता शाइना एनसी ने दिग्विजय सिंह के राम मंदिर चंदे को लेकर लगाए आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिग्विजय को “चयनात्मक विस्मृति” है। उन्होंने 1989, 1990 और 2021 के प्रसंगों का जिक्र करते हुए पूछा कि अगर उन्हें चंदे में गड़बड़ी नजर आ रही थी तो उन्होंने उस समय सवाल क्यों नहीं उठाया। शाइना बोलीं- सीएम रहते क्यों हिसाब नहीं मांगा शाइना ने कहा कि दिग्विजय सिंह खुद रामशिला पूजन में शामिल हुए थे और उस समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। अगर उस समय चंदे के हिसाब में कुछ गलत था तो उन्होंने तभी सवाल क्यों नहीं पूछा और अदालत का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया? उन्होंने 1990 की राम रथ यात्रा के दौरान जुटाए गए पैसे और 2021 में VHP के चंदे को लेकर दिग्विजय के सवालों का भी जिक्र किया। शाइना ने कहा कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2021 में करीब 12.5 करोड़ परिवारों ने श्रद्धा और आस्था से राम मंदिर के लिए योगदान दिया। उनके मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट ने दान की रसीदें दीं और ऑडिटेड खाते भी उपलब्ध कराए। शाइना ने सवाल किया कि जब दिग्विजय सिंह 1989 में खुद मुख्यमंत्री थे और रामशिला पूजन में शामिल हुए थे, तब उन्होंने हिसाब क्यों नहीं पूछा? उन्होंने कहा कि अब ट्रस्ट की ओर से रसीद और ऑडिट प्रक्रिया होने के बावजूद सवाल उठाए जा रहे हैं। शाइना ने यह भी कहा कि राम मंदिर के लिए लोगों ने “श्रद्धा, आस्था और भक्ति” से पैसा दिया था और ट्रस्ट ने उसकी रसीद दी है। उन्होंने दिग्विजय के आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि ऐसे आरोप भगवान राम के प्रति आस्था रखने वाले लोगों की भावनाओं पर सवाल खड़े करते हैं।

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