Ahmedabad गर्मी का असर सिर्फ पसीने, डिहाइड्रेशन और लू तक सीमित नहीं है। तापमान बढ़ने के साथ दिल पर पड़ने वाला दबाव भी जानलेवा हो सकता है। भारत में उच्च तापमान से जुड़ी इस्कीमिक हार्ट डिजीज से होने वाली मौतों का अनुमानित आंकड़ा 1990 में 10874 था, जो 2021 में बढ़कर 40245 हो गया। यानी तीन दशक में ऐसी मौतों का बोझ करीब चार गुना बढ़ गया।
विश्व हृदय दिवस के मौके पर सामने आए ये आंकड़े बढ़ते तापमान और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर गंभीर संकेत देते हैं।ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी)-2021 की मानकीकृत पद्धति पर आधारित इस अध्ययन में तीस वर्षों तक भारत में उच्च तापमान के कारण इस्कीमिक हार्ट डिजीज से जुड़े मृत्यु, बीमारी के कारण गंवाए स्वस्थ जीवन-वर्ष और समय से पहले गंवाए जीवन-वर्षों का आकलन किया गया। 2021 में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 6202 मौतों का अनुमान लगाया गया, जबकि गुजरात 4821 मौतों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
70-74 वर्ष की उम्र में सबसे ज्यादा मौतें
स्टडी में शामिल व यूएन मेहता अस्पताल के सीनियर हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कमल शर्मा ने कहा कि इस अध्ययन के अनुसार 70 से 74 वर्ष के आयु वर्ग में उच्च तापमान से जुड़ी इस्कीमिक हार्ट डिजीज की सबसे अधिक 5,704 मौतों का अनुमान लगाया गया। वहीं बीमारी के कारण गंवाए स्वस्थ जीवन-वर्षों का सबसे बड़ा बोझ 55 से 59 वर्ष के आयु वर्ग में 1,32,936 रहा। पुरुषों पर इसका बोझ महिलाओं की तुलना में अधिक रहा। 1990 से 2021 के बीच पुरुषों में मौतों में कुल प्रतिशत वृद्धि 56 प्रतिशत रही, जबकि महिलाओं में यह 30 प्रतिशत थी।
गर्मी दिल पर कैसे डालती है दबाव
डॉ. शर्मा ने स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि गर्मी में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। पसीने के कारण पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी, रक्तसंचार में बदलाव और हृदय पर बढ़ा दबाव पहले से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या अन्य जोखिम वाले लोगों के लिए समस्या बढ़ा सकता है। यही वजह है कि गर्म मौसम में ऐसे लोगों को पर्याप्त पानी पीने, दोपहर की तेज गर्मी से बचने और दवाएं नियमित लेने की सलाह दी जाती है।

