मझगांव डैम परियोजना से प्रभावित और विस्थापित आदिवासी परिवारों का ‘चिता आंदोलन’ शनिवार को 22वें दिन और अधिक उग्र रूप में पहुंच गया। एक तरफ जेल में बंद आंदोलन के अगुआ अमित भटनागर का आमरण अनशन लगातार छठे दिन भी जारी रहा, वहीं दूसरी तरफ आंदोलन स्थल पर प्रभावित महिलाओं और ग्रामीणों ने गले में रस्सी का फंदा डालकर पानी के बीच ‘जल-सत्याग्रह’ शुरू कर दिया। जेल में बंद आंदोलनकारी अमित भटनागर ने अंदर से ही अपना संदेश भेजा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कार्रवाई से विस्थापितों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। भटनागर ने कहा कि जब तक प्रभावित गरीब और आदिवासी परिवारों को उनका पूरा हक और न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका आमरण अनशन जेल के अंदर से भी जारी रहेगा। पानी में फंदा डालकर उतरीं महिलाएं, रिहाई की मांग जलभराव के बीच गले में फंदा डाले खड़ी महिलाओं ने शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। महिलाओं ने गुस्सा जताते हुए मांग की कि गिरफ्तार किए गए आंदोलनकारी अमित भटनागर, दिव्या दीदी, हिसाबी राजपूत समेत जेल में बंद सभी साथियों और ग्रामीणों को तुरंत रिहा किया जाए। आर-पार की लड़ाई का ऐलान ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक डैम से प्रभावित परिवारों को पूरा मुआवजा, उचित पुनर्वास और सभी कानूनी अधिकार नहीं मिल जाते, तब तक यह संघर्ष खत्म नहीं होगा। आंदोलनकारियों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि वह तुरंत उनसे बातचीत करे और मांगों का न्यायसंगत समाधान निकाले।

