चंडीगढ़, तीन अक्टूबर पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शनिवार को प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह से पूछा कि क्या वह बेअदबी रोधी विधेयक के समर्थन में हैं और यह भी सवाल किया कि जब वह शिरोमणि अकाली दल में थे, तब उन्होंने मादक पदार्थ की समस्या और बेअदबी के मुद्दे क्यों नहीं उठाये। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता चीमा ने पिछले कांग्रेस शासन में खेल और शिक्षा मंत्री के रूप में सिंह के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाया। कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफा देने के बाद शुक्रवार को सिंह को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को लेकर कई सप्ताह से जारी आंतरिक खींचतान के बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने वड़िंग की जगह सिंह को नियुक्त किया। इस खींचतान से अगले साल की शुरुआत में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के अभियान पर असर पड़ने की आशंका थी। सिंह की नियुक्ति को लेकर मीडिया से बात करते हुए चीमा ने कहा कि पूर्व ओलंपियन ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत शिरोमणि अकाली दल से की थी।
राज्य के वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि जब अकाली दल सत्ता में था, तब सिंह ने मादक पदार्थ की समस्या और गुरु ग्रंथ साहिब से संबंधित बेअदबी की घटनाओं के मुद्दे कभी नहीं उठाए। चीमा ने आरोप लगाया कि अकाली शासन के दौरान सिंह इन दोनों मुद्दों पर चुप रहे। चीमा ने दावा किया कि जब ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026’ विधानसभा में पेश किया गया था, तब सिंह ने कहा था कि कांग्रेस का एक धड़ा विधेयक के समर्थन में है और दूसरा धड़ा इसके समर्थन में नहीं है।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘मैं पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष से पूछना चाहता हूं कि वह अब कांग्रेस के किस धड़े का नेतृत्व कर रहे हैं।’’
पिछली सरकार में सिंह के खेल और शिक्षा मंत्री रहने के दौरान उनके प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए चीमा ने आरोप लगाया कि वह इन दोनों विभागों में ‘‘बुरी तरह विफल’’ रहे। उन्होंने सिंह के शिक्षा मंत्री रहते 1,158 असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया का उल्लेख किया। चीमा ने कहा कि चयन प्रक्रिया से संबंधित नियमों को दरकिनार किए जाने के कारण उच्चतम न्यायालय ने असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती निरस्त कर दी थी।
चीमा ने कहा कि खेल पृष्ठभूमि से आने के बावजूद जब सिंह के पास खेल विभाग था, तब खेल बजट के लिए ‘‘बहुत मामूली’’ राशि रखी गई थी। सिंह ने 2012 में जालंधर कैंट सीट से शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़कर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को हराया था।
वर्ष 2016 में सिंह को शिअद से निलंबित कर दिया गया। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए और 2017 एवं 2022 के विधानसभा चुनाव में जालंधर कैंट सीट से जीते।

