बाहर अपराधी जेल में शिक्षक, कैदियों में जगा रहे शिक्षा की ललक, वाराणसी के कारागार में पढ़ाने के लिए मिलता है वेतन

बाहर अपराधी जेल में शिक्षक, कैदियों में जगा रहे शिक्षा की ललक, वाराणसी के कारागार में पढ़ाने के लिए मिलता है वेतन

Varanasi Central Jail: अपराध करने के बाद सजा काट रहे कैदी जेल की चाहरदिवारी के भीतर एक अलग ही जिंदगी जी रहे हैं। यहां कुछ ऐसे भी कैदी हैं जो पढ़ाई में रुचि रखते हैं, जबकि कुछ तो पहले से पढ़े लिखे हैं और अपने साथी कैदियों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं। केंद्रीय कारागार में पढ़े-लिखे कैदियों को दूसरे कैदियों को शिक्षित बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बदले उन्हें प्रतिदिन 80 रुपए का भत्ता भी दिया जाता है। इन कैदियों को पढ़ाने के लिए जेल के बाहर से कोई शिक्षक नहीं पहुंचता। पिछले 5 वर्षों में केंद्रीय और जिला जेल के 43 बंदियों और कैदियों ने हाई स्कूल और इंटर की परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था और सबसे अच्छी बात है कि वे सभी पास भी हो गए।

अलग से कक्षा की व्यवस्था

केंद्रीय कारागार में वाराणसी समेत 18 जिलों के कैदी बंद हैं। इस बार हाई स्कूल के लिए आठ और इंटरमीडिएट के लिए 10 लोगों ने पंजीकरण कराया है। प्रत्येक सर्कल में कक्षा की व्यवस्था की गई है, जहां कैदी एकत्रित होकर पढ़ाई करते हैं। सबसे खास बात यह है कि इन कैदियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी उनके साथी कैदियों को दी गई है और वह शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। इसके बदले उन्हें मेहनताना भी दिया जाता है। ये कैदी बाकी कैदियों को अलग-अलग विषय भी पढ़ते हैं।

कौशल प्रशिक्षण का भी कोर्स

वहीं, जिला जेल में भी बंदियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी साथी बंदियों को दी गई है। हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा की लिए कैदियों ने अपना पंजीकरण कराया है। दोनों जिलों में बंदियों और कैदियों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए उन्हें कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि जेल से बाहर निकालने के बाद में अपराध की दुनिया को छोड़कर रोजगार की राह पकड़ लें। यही नहीं, बेहतर सोच के साथ परिवार और समाज के बीच सर उठाकर जी सके और समाज के लिए कुछ अलग कर सके।

दो शिफ्ट में पढ़ाई

केंद्रीय कारागार में बंदियों के लिए दो शिफ्ट में कक्षा चलाई जाती है। सुबह 7:30 से 10:30 बजे और दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक बंदी पढ़ाई करते हैं। हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा की तैयारी के साथ, उन्हें अन्य भी प्रशिक्षण दिया जाता है और वह व्यावहारिकता के साथ कई भाषाओं को भी ग्रहण करते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पढ़ाई में उम्र की कोई बाध्यता नहीं है। बंदियों और कैदियों को औपचारिक शिक्षा के अलावा कंप्यूटर, कढ़ाई, बुनाई इत्यादि का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसका एक मात्र उद्देश्य है कि जेल से बाहर निकालने के बाद वे अपने हुनर के साथ रोजगार प्राप्त कर सकें।

कई कैदी हुए पास

2022 से 2026 के बीच जिला कारागार में 25 बंदियों ने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें 9 हाई स्कूल और 16 इंटरमीडिएट के बंदी पढ़ाई कर रहे हैं। वर्तमान में हाई स्कूल के 9 और इंटर के नौ बंदी पास हो चुके हैं, जबकि 7 बंदी समय पूर्ण रिहा भी हो चुके हैं। ऐसे में केंद्रीय कारागार में कुल 18 कैदी पंजीकृत हैं। इनमें 8 हाई स्कूल और इंटर के लिए 10 कैदी अपना पंजीकरण करा चुके हैं। जिला कारागार के जेल अधीक्षक सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि जेल में बंद कैदियों को जेल प्रशासन किताबें मुहैया कराता है। इसके साथ ही कौशल विकास का हुनर भी सिखाया जाता है। उन्होंने बताया कि जेल से रिहा होने वाले कई ऐसे कैदी हैं, जो अपराध की दुनिया को छोड़कर समाज की मुख्य धारा से जुड़ चुके हैं।

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