प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने वाले महिला स्व-सहायता समूहों और रसोइया बहनों ने विभिन्न समस्याओं के निराकरण और लंबित मानदेय के भुगतान की मांग को लेकर जिला मुख्यालय में हड़ताल शुरू कर दी है। बुधवार को प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। इस दौरान कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। मौके पर मौजूद कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी एवं पुलिस अमले ने महिलाओं को समझाइश देकर यातायात सुचारु कराया। महिला समूहों का कहना है कि उन्हें पिछले चार माह से राशि और मानदेय का भुगतान नहीं मिला है। समय पर खाद्यान्न व राशि उपलब्ध नहीं होने, कम लागत राशि, रसोइयों के कम मानदेय तथा किचन शेड सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समूहों ने वर्ष 2024, 2025 और 2026 में जून माह की 15 दिवस की लंबित राशि की जांच कर भुगतान कराने की मांग की है। उनका दावा है कि करीब 2.32 लाख रुपये की राशि रसोइया बहनों से संबंधित लंबित है। साथ ही प्रत्येक माह निर्धारित तिथि पर सभी जिलों में एक साथ राशि और खाद्यान्न जारी करने की पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई है। रसोइया बहनों ने साझा चूल्हा योजना के तहत मिलने वाले 500 रुपये मासिक मानदेय को बढ़ाकर 2 हजार रुपये करने, 65 वर्ष की आयु तक मानदेय देने और उचित पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की है। पूर्व में कार्य से हटाई गई रसोइया बहनों को भी पेंशन का लाभ देने की मांग रखी गई। इसके अलावा टीएचआर की दर वास्तविक लागत के अनुरूप निर्धारित करने, वर्ष 2002 से कार्यरत समूहों को शासकीय मान्यता देने, उचित मूल्य दुकान संचालन में समूहों को प्राथमिकता देने तथा साझा चूल्हा संचालन से ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने की मांग की गई है। खाद्यान्न उठाव में उचित मूल्य दुकान संचालक के फिंगरप्रिंट की व्यवस्था खत्म कर समूह अध्यक्ष व सचिव के बायोमेट्रिक सत्यापन से खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है। समूहों ने महिला एवं बाल विकास विभाग में कथित अनियमितताओं की जांच और बच्चों की संख्या के आधार पर आंगनवाड़ी केंद्रों को राशि व खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है। मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं होने पर अनिश्चितकालीन चूल्हा बंद हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

