नालंदा- राजाकुआं आश्रम में संत बाबा महोत्सव में उमड़े श्रद्धालु:राजद नेता संत बाबा को बताया ‘त्रिकालदर्शी और निष्काम कर्मयोगी’, कहा- लालू जी का विशेष प्रेम रहा है

नालंदा- राजाकुआं आश्रम में संत बाबा महोत्सव में उमड़े श्रद्धालु:राजद नेता संत बाबा को बताया ‘त्रिकालदर्शी और निष्काम कर्मयोगी’, कहा- लालू जी का विशेष प्रेम रहा है

नालंदा के राजा कुआं आश्रम में बुधवार को संत महोत्सव के अवसर पर श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस पावन मौके पर त्रिकालदर्शी ‘संत बाबा’ के दरबार में हजारों श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई और उनके श्रीचरणों में अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस धार्मिक आयोजन में राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हिलसा के पूर्व विधायक और राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने नकटपुरा गांव के करीब एक हजार श्रद्धालुओं के साथ पैदल मार्च करते हुए संत बाबा के दरबार तक की यात्रा की। पूरे रास्ते श्रद्धालु संत बाबा के जयकारे लगाते रहे। ‘निष्काम कर्मयोगी और त्रिकालदर्शी थे संत बाबा’ आश्रम पहुंचकर संत बाबा की खड़ाऊं, धोती और लंगोटा चढ़ाकर श्रद्धा निवेदित करने के बाद शक्ति सिंह यादव ने संत बाबा की महिमा का बखान किया। उन्होंने संत बाबा को ‘निष्काम कर्मयोगी संत शिरोमणि’ बताते हुए कहा कि संत बाबा का यश सिर्फ इस इलाके में ही नहीं, बल्कि इससे बाहर भी फैला हुआ है। मुझे उनके जीवनकाल में भी यहां आने का मौका मिला था। उनका तपस्या कक्ष, कुआं और यहां का हर पेड़-पौधा उनके यश और कीर्ति की गवाही देता है। शक्ति यादव ने बताया कि संत बाबा प्रकृति के हर जीव (पशु-पक्षी, पेड़-पौधे) का आदर करते थे और सभी के लिए ‘जी’ शब्द का प्रयोग करते थे। उन्होंने कहा कि वे सच्चे त्रिकालदर्शी थे। अगर कोई मन में कटुता लेकर उनके पास पहुंचता था, तो वे तुरंत उसके मन की बात जान लेते थे। ना उनका किसी से कोई लेन-देन था और ना ही वे कभी कोई चढ़ावा स्वीकार करते थे। ‘लालू जी और तेजस्वी जी की ओर से नमन’ शक्ति सिंह यादव ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ओर से भी संत बाबा को नमन किया। उन्होंने एक पुराना संस्मरण साझा करते हुए बताया कि लालू प्रसाद जी स्वयं इस दरबार तक पहुंचे थे। उन्होंने एक बार संत बाबा से कहा था कि बाबा, हम यहां चहल-पहल और सुविधाएं करना चाहते हैं, तो बाबा ने हाथ जोड़कर मना कर दिया था और कहा था कि आप जगत को देखिए, हम यहीं रहना चाहते हैं।” शक्ति यादव ने कहा कि नकटपुरा के लोगों का संत बाबा से अगाध प्रेम रहा है और उनके रोम-रोम में संत बाबा समाए हुए हैं। उन्होंने राज्य की खुशहाली, सामाजिक सद्भाव और लालू जी के दीर्घायु होने की प्रार्थना की। ‘सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद होती थी पूरी’ वहीं, राजद के नालंदा जिले के निवर्तमान युवा जिलाध्यक्ष मनोज यादव ने संत बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाते हुए अपने बचपन के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि मैं जब 12-14 साल का था, तब अपनी मां के साथ यहां आया था। उस समय संत बाबा जीवित थे। मैंने उनकी खड़ाऊं का स्पर्श किया था और उनका आशीर्वाद लिया था। मनोज यादव ने संत बाबा को भगवान का रूप बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवन भर किसी से एक रुपये का चढ़ावा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन और श्रद्धा भाव से आकर यहां चरण स्पर्श करता था, उसकी मनोकामना निश्चित रूप से पूर्ण होती थी। आज हमने उनके दरबार में पहुंचकर सभी के स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु होने की कामना की है। नालंदा के राजा कुआं आश्रम में बुधवार को संत महोत्सव के अवसर पर श्रद्धा का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस पावन मौके पर त्रिकालदर्शी ‘संत बाबा’ के दरबार में हजारों श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई और उनके श्रीचरणों में अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस धार्मिक आयोजन में राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हिलसा के पूर्व विधायक और राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने नकटपुरा गांव के करीब एक हजार श्रद्धालुओं के साथ पैदल मार्च करते हुए संत बाबा के दरबार तक की यात्रा की। पूरे रास्ते श्रद्धालु संत बाबा के जयकारे लगाते रहे। ‘निष्काम कर्मयोगी और त्रिकालदर्शी थे संत बाबा’ आश्रम पहुंचकर संत बाबा की खड़ाऊं, धोती और लंगोटा चढ़ाकर श्रद्धा निवेदित करने के बाद शक्ति सिंह यादव ने संत बाबा की महिमा का बखान किया। उन्होंने संत बाबा को ‘निष्काम कर्मयोगी संत शिरोमणि’ बताते हुए कहा कि संत बाबा का यश सिर्फ इस इलाके में ही नहीं, बल्कि इससे बाहर भी फैला हुआ है। मुझे उनके जीवनकाल में भी यहां आने का मौका मिला था। उनका तपस्या कक्ष, कुआं और यहां का हर पेड़-पौधा उनके यश और कीर्ति की गवाही देता है। शक्ति यादव ने बताया कि संत बाबा प्रकृति के हर जीव (पशु-पक्षी, पेड़-पौधे) का आदर करते थे और सभी के लिए ‘जी’ शब्द का प्रयोग करते थे। उन्होंने कहा कि वे सच्चे त्रिकालदर्शी थे। अगर कोई मन में कटुता लेकर उनके पास पहुंचता था, तो वे तुरंत उसके मन की बात जान लेते थे। ना उनका किसी से कोई लेन-देन था और ना ही वे कभी कोई चढ़ावा स्वीकार करते थे। ‘लालू जी और तेजस्वी जी की ओर से नमन’ शक्ति सिंह यादव ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ओर से भी संत बाबा को नमन किया। उन्होंने एक पुराना संस्मरण साझा करते हुए बताया कि लालू प्रसाद जी स्वयं इस दरबार तक पहुंचे थे। उन्होंने एक बार संत बाबा से कहा था कि बाबा, हम यहां चहल-पहल और सुविधाएं करना चाहते हैं, तो बाबा ने हाथ जोड़कर मना कर दिया था और कहा था कि आप जगत को देखिए, हम यहीं रहना चाहते हैं।” शक्ति यादव ने कहा कि नकटपुरा के लोगों का संत बाबा से अगाध प्रेम रहा है और उनके रोम-रोम में संत बाबा समाए हुए हैं। उन्होंने राज्य की खुशहाली, सामाजिक सद्भाव और लालू जी के दीर्घायु होने की प्रार्थना की। ‘सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद होती थी पूरी’ वहीं, राजद के नालंदा जिले के निवर्तमान युवा जिलाध्यक्ष मनोज यादव ने संत बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाते हुए अपने बचपन के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि मैं जब 12-14 साल का था, तब अपनी मां के साथ यहां आया था। उस समय संत बाबा जीवित थे। मैंने उनकी खड़ाऊं का स्पर्श किया था और उनका आशीर्वाद लिया था। मनोज यादव ने संत बाबा को भगवान का रूप बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवन भर किसी से एक रुपये का चढ़ावा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन और श्रद्धा भाव से आकर यहां चरण स्पर्श करता था, उसकी मनोकामना निश्चित रूप से पूर्ण होती थी। आज हमने उनके दरबार में पहुंचकर सभी के स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु होने की कामना की है।  

​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *