क्लास में जब भी टीचर ब्लैकबोर्ड पर गणित का लंबा-चौड़ा सवाल लिखें और उसका जवाब कोई बच्चा टीचर के हाथ से चौक छूटने से पहले ही दे दे तो पूरी क्लास हैरान रह जाती है। राजस्थान की वंशिका शर्मा भी ठीक इसी करिश्माई टैलेंट की वजह से ‘मैथ्स गर्ल’ के नाम से पहचानी जाती हैं। हाल ही में जयपुर के एक कार्यक्रम में जब वंशिका मंच पर आईं तो उन्होंने अपने कंप्यूटर से भी तेज स्पीड में गणित के कठिन सवाल हल करने की खूबी बताई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तक को हैरान कर दिया था। इसके बाद से वंशिका को लेकर खूब चर्चाएं होनी लगीं। महज 20 साल की उम्र में 12 नेशनल-वर्ल्ड रिकॉर्ड्स अपने नाम कर चुकी वंशिका का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज कैसे चलता है? वह दोनों हाथों से एक साथ अलग-अलग मैथ्स प्रॉब्लम्स कैसे सॉल्व कर लेती हैं? यही जानेंगे आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कौन हैं यूथ आइकॉन अवॉर्ड से सम्मानित ‘मैथ्स गर्ल’ वंशिका शर्मा? जवाब: तारीख – 25 सितंबर। जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम मंच में भाजपा का युवा संवाद कार्यक्रम। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सामने कुर्सी पर एक युवती आकर बैठती है। कहती हैं कि ‘मैं देश की अकेली इंसान हूं, जो दोनों हाथों से एक साथ दो अलग-अलग मैथ्स की गणनाएं कर सकती हूं’। इस युवती का नाम है वंशिका शर्मा। वंशिका ने बिना किसी कैलकुलेटर या पेन-कागज के दिमाग में गणना करते हुए बोर्ड पर दोनों हाथों से एक साथ दो अलग-अलग भारी-भरकम टेबल्स लिखने की बात बताईं तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और नितिन नवीन भी दंग रह गए। अब जान लेते हैं आखिर कौन हैं वंशिका शर्मा वंशिका शर्मा मूल रूप से झुंझुनूं जिले के चिड़ावा की रहने वाली हैं। 2006 में जन्मी वंशिका की असाधारण क्षमता को निखारने में पिता मनोज कुमार शर्मा और मां वंदना (गायत्री शर्मा) की मेहनत भी है। परिवार राजस्थान की कोचिंग नगरी कोटा भी शिफ्ट हुआ। वंशिका ने अपनी स्कूली शिक्षा में लगातार 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। वर्तमान में वंशिका आईआईटी मद्रास से डेटा साइंस की पढ़ाई कर रही हैं। सवाल-2: दोनों हाथों से एक साथ अलग-अलग कैलकुलेशन, क्या है वंशिका के इस गजब के टैलेंट का राज? जवाब: एक ही समय में दोनों हाथों से अलग-अलग और कठिन गणित के सवाल हल करना इंसान के दिमाग और न्यूरोलॉजी के लिहाज से बेहद दुर्लभ है। न्यूरोलॉजिस्ट्स और मैथामेटिशियन के अनुसार, एक साथ दोनों हाथों से अलग-अलग गणना करना सिर्फ ‘दिमाग के दोनों हिस्से एक साथ काम करने’ का मामला नहीं है। इसके पीछे मेंटल अरिथमैटिक, अबैकस ट्रेनिंग, विजुअलाइजेशन और लंबे अभ्यास का बड़ा रोल हो सकता है। अबैकस सीखने के बाद बच्चे धीरे-धीरे असली अबैकस की जगह उसका एक काल्पनिक रूप दिमाग में बनाकर गणना करना सीखते हैं। इसे ‘मेंटल अबैकस’ कहा जाता है। रिसर्च में पाया गया है कि लंबे समय की अबैकस ट्रेनिंग से बच्चों की मानसिक गणना और दिमाग में किसी चीज की तस्वीर बनाकर उसे याद रखने और उसके साथ काम करने की क्षमता बेहतर हो सकती है। हालांकि, वंशिका खुद इस क्षमता को किसी खास ट्रिक की बजाय ‘गॉड गिफ्ट’ ज्यादा मानती हैं। सवाल-3: नॉर्मल बच्चे वंशिका जैसा ‘शार्प माइंड’ कैसे बना सकते हैं; क्या फॉर्मूला है? जवाब: बच्चों में गणित के डर को कम करने के लिए वंशिका अब तक मैथ्स केलकुलेशन को लेकर 16 किताबें लिख चुकी हैं। वंशिका का मानना है कि गणित का डर दूर करने के लिए सबसे जरूरी निरंतर अभ्यास और सही दिशा होती है। वंशिका का कहना है कि गणित कोई डरने वाला विषय नहीं है, बल्कि यह अंकों का एक मजेदार खेल है। अगर सही उम्र यानी 5 से 12 वर्ष के बच्चों के दिमाग को सही ट्रेनिंग दी जाए, तो कोई भी सामान्य बच्चा अपनी कैलकुलेशन स्पीड को कई गुना बढ़ा सकता है। वंशिका के अनुसार व्यावहारिक टिप्स का फॉर्मूला इस प्रकार है 1. छोटी उम्र में अबैकस से जोड़ें: बच्चों को छोटी उम्र से ही अबैकस और वैदिक गणित सिखाना शुरू कर दें। इससे बच्चे केवल पेन चलाने के बजाय दिमाग में ही संख्याओं की तस्वीर बनाने लगते हैं, जिससे गणनाएं काफी तेज हो जाती हैं।
2. मोबाइल और रील्स से दूर रखें: वंशिका की सफलता का बड़ा राज स्मार्टफोन से दूरी है। लगातार स्क्रीन देखने और रील्स चलाने से बच्चों का ध्यान भटकता है और याददाश्त कमजोर होती है।
3. रटाने के बजाय खेल-खेल में सिखाएं: पेरेंट्स बच्चों पर कभी भी मैथ्स के सवाल रटने का दबाव न बनाएं। इसे रोजमर्रा के कामों जैसे बाजार की खरीदारी, खेल-कूद और पहेलियों के जरिए सिखाएं।

