Rajasthan Farmers : परंपरागत खेती से हटकर की खेती, तो लोगों ने उड़ाया मजाक, किसान अवधेश मीना ने कमाई से दिया जवाब

Rajasthan Farmers : परंपरागत खेती से हटकर की खेती, तो लोगों ने उड़ाया मजाक, किसान अवधेश मीना ने कमाई से दिया जवाब

Rajasthan Farmers : गंगापुरसिटी. वैसे तो सवाईमाधोपुर जिला देशभर में अमरूद उत्पादन के लिए अपनी अलग पहचान रखता है, लेकिन जिले के वजीरपुर क्षेत्र के फुलवाड़ा निवासी किसान अवधेश मीना ने परंपरागत खेती से हटकर मौसमी की खेती को अपनाकर नई मिसाल कायम की है। कभी जिन लोगों ने मौसमी की खेती करने पर उनका मजाक उड़ाया था, आज वही लोग उनकी सफलता की सराहना कर रहे हैं।
आइसीएआर पूसा नई दिल्ली से इनोवेटिव फार्मर अवार्ड से इन्हें नवाजा जा चुका है।

किसान अवधेश मीना ने पौध सामग्री के लिए सिट्रस एक्सीलेंस सेंटर, नांता (कोटा) से काटोल गोल्ड किस्म के पौधों का चयन किया। बागवानी के शुरुआती वर्षों में खाली स्थान का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने इंटरक्रॉपिंग के माध्यम से सब्जियों एवं अन्य फसलों की खेती की, जिससे मौसमी के पौधे फल देने से पहले भी खेत से अच्छी आमदनी होती रही।

चौथे साल में 150 पौधों से 2.30 लाख की आमदनी

मौसमी बाग अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। किसान अवधेश मीना के अनुसार इस वर्ष लगभग 150 फलदार पौधों से करीब 40 किलोग्राम प्रति पौधा उत्पादन प्राप्त हुआ। इस हिसाब से कुल उत्पादन लगभग 6,000 किलोग्राम यानी 6 टन रहा। स्थानीय बाजार में लगभग 40 रुपए प्रति किलोग्राम की दर मिलने पर संभावित सकल बिक्री लगभग 2.40 लाख रुपए बैठती है।

सलाह ने बदली खेती की दिशा

किसान अवधेश मीना ने बताया कि मौसमी की खेती में रोग, कीट प्रबंधन, पोषण, सिंचाई एवं उत्पादन तकनीक के संबंध में सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू लाल मीना से लगातार तकनीकी मार्गदर्शन लिया। उन्होंने बताया कि जब मौसमी के पौधे छोटे थे, उस समय कृषि अधिकारी की सलाह के अनुसार खेत में इंटरक्रॉपिंग के रूप में टमाटर की फसल ली। इससे एक बीघा में लगभग 2.18 लाख रुपए का उत्पादन प्राप्त हुआ। इसके बाद उसी खेत में शकरकंद की फसल लेकर लगभग 1.80 लाख रुपए का उत्पादन प्राप्त किया।

सिट्रस फलों के लिए अनुकूल है क्षेत्र

सवाईमाधोपुर क्षेत्र में नींबू, मौसमी, संतरा, माल्टा एवं अन्य सिट्रस फसलों की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है। वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ सिट्रस फसलों से किसानों को लंबे समय तक आय प्राप्त हो सकती है। काटोल गोल्ड जैसी अच्छी उत्पादन क्षमता वाली किस्म, स्वस्थ एवं प्रमाणित पौध सामग्री, उचित दूरी, संतुलित पोषण, सिंचाई प्रबंधन, कीट एवं रोगों की समय पर पहचान तथा उचित छंटाई जैसे उपायों से बाग की उत्पादकता को बेहतर किया जा सकता है।
पिन्टू लाल मीना, सहायक कृषि अधिकारी

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