विकास के उजाले में भविष्य के सवाल

विकास के उजाले में भविष्य के सवाल

योगेंद्र सेन @ पत्रिका. हर दौर अपने साथ कुछ नए सवाल लेकर आता है। कभी सवाल आजादी के थे, कभी लोकतंत्र को मजबूत करने के। कभी विकास की असमानताओं के और आज सवाल सूचना की विश्वसनीयता के हैं। माध्यम बदलते रहे, तकनीक बदलती रही, खबरों की गति बदलती रही, लेकिन पत्रकारिता का मूल उद्देश्य नहीं बदला। समाज के सवालों को सामने लाना और जिम्मेदारों से जवाब मांगना। राजस्थान पत्रिका बाड़मेर संस्करण का 16वां स्थापना दिवस केवल पीछे मुडकऱ देखने का अवसर नहीं हैं। यह उस यात्रा को समझने और आगे की राह तय करने का भी दिन है। वर्षों की पत्रकारिता ने यह साबित किया है कि अखबार की असली ताकत उसके पाठकों के भरोसे में होती है। यह भरोसा एक दिन में नहीं बनता। वर्षों की यात्रा में समाज बदला, शहर बदले, गांव बदले और चुनौतियां भी बदलीं। पश्चिमी राजस्थान में तो पत्रकारिता की जिम्मेदारी और भी व्यापक है। पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यावरण, सीमावर्ती सुरक्षा और औद्योगिक विकास जैसे मुद्दे यहां के वर्तमान के साथ भविष्य को भी तय करते हैं।

पचपदरा की रिफाइनरी से लेकर सौर ऊर्जा की अपार संभावनाओं तक विकास के नए रास्ते खुल रहे हैं। ऐसे में पत्रकारिता का दायित्व सिर्फ यह बताना नहीं कि क्या हुआ, बल्कि यह पूछना भी है कि इस बदलाव का लाभ आम आदमी तक कितना पहुंचा? और आने वाली पीढिय़ों के लिए इसका क्या अर्थ है। इस विकास में स्थानीय समाज की भागीदारी और उसका भविष्य क्या है? पश्चिमी राजस्थान में तेल, गैस, ऊर्जा और पर्यटन ने बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा जिलों में विकास को रफ्तार दी है। यहां आर्थिक समृद्धि आई है। पर चिंता का विषय यह भी है कि इस उन्नति के साथ कई चुनौतियां भी आ खड़ी हुई हैं। थार का अपना मूल अस्तित्व बचाना भी जरूरी है। यहां की सांस्कृ़तिक खुशबू में कई विसंगतियां भी दस्तक दे रही हैं। प्रकृति से दूरी बढ़ रही है। ओरण-गोचर धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। खेजड़ी वृक्षों को बचाना चुनौति बन गया है। पूर्वजों ने ‘देव-भूमि’ मानकर संजोया और संरक्षित किया। जिस गोचर भूमि को कभी छूना भी पाप माना जाता था, उस पर निर्माण हो रहे हैं। वहीं अपणायत के लिए अलग पहचान रखने वाले इसे क्षेत्र में सबसे बड़ी चिंता अपराध और नशे की दस्तक से है। हनी ट्रैप जैसे मामलों में महिलाओं का शामिल होना गंभीर सवाल खड़े करता है। एमडी ड्रग का फैलता जाल और नशे की गिरफ्त में आता युवा अब इस क्षेत्र का सबसे बढ़ा दर्द बनकर उभरा है।

पिछले एक साल में ही एमडी ड्रग्स बनाने की छह से ज्यादा फैक्ट्री पकड़ी जा चुकी हैं। यह नशा केवल शहरों तक सीमित नहीं है। गांव-ढाणियों तक पहुंच चुका है। राजस्थान पत्रिका ने लोगों की इसी पीड़ा को समझा और ‘नशामुक्तिसंग्राम’ अभियान शुरू किया। नशे के सौदागरों, ठिकानों को उजागर किया। कई जगह कार्रवाई हुई। लेकिन यह काफी नहीं है। इसलिए विकास के साथ-साथ इन चुनौतियों से भी पार पाना होगा। दूसरी बड़ी चुनौती पिछले कुछ सालों में पश्चिमी राजस्थान में बढ़ता तापमान यानी हीट वेव का खतरा है। सितम्बर के अंत में गर्मी रेकॉर्डतोड़ रही है। इस साल मानूसनरूठने से ग्रामीण क्षेत्रों में अकाल जैसे हालात हैं। इस भूभाग में हो रहा यह बदलाव आने वाले कल की गंभीर चुनौती का संकेत है। भविष्य बचाना है तो चुनौतियों से निपटने के ठोस प्रबंध करने होंगे।

yogendra.sen@in.patrika.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *