सोमवार को भागलपुर में कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची विवाद को लेकर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के बुलावे पर जिला कांग्रेस कार्यकर्ता समाहरणालय पहुंचे। सुरक्षा के चलते मुख्य गेट बंद कर दिया गया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने बाहर ही नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान ‘वोट चोर गद्दी छोड़ो’ जैसे नारे लगे। कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर नाराजगी जताई। यह प्रदर्शन कांग्रेस के देशव्यापी अभियान का हिस्सा था। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें पद से हटाने की मांग की है। कांग्रेस जिला प्रभारी ने किया प्रदर्शन का नेतृत्व भागलपुर कांग्रेस जिला प्रभारी राहुल सिंह चौहान ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठा रही है। राहुल चौहान ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारियों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कांग्रेस ने इसी आधार पर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों के बीच निर्वाचन आयोग की ओर से यह कहा गया है कि आयोग के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। इसलिए कांग्रेस के आरोपों और निर्वाचन आयोग के पक्ष को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना जरूरी है। ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई की मांग कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कई मांगें रखीं। पार्टी की ओर से उन्हें पद से हटाने, उनके खिलाफ कार्रवाई करने और उनके कार्यकाल में लिए गए चुनाव संबंधी फैसलों तथा मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की गई। युवा कांग्रेस के प्रतिनिधि प्रशांत बनर्जी ने भी केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से नहीं चल रही है और कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। कलेक्ट्रेट गेट के बाहर बढ़ता गया आक्रोश प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार नारेबाजी करते रहे। समाहरणालय के मुख्य द्वार पर ताला लगे होने के बावजूद कार्यकर्ताओं ने वहीं सभा कर अपनी मांगें रखीं। पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। समाहरणालय की ओर आने वाले रास्तों और प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने के बाद प्रदर्शन समाप्त कराया गया। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनका ज्ञापन स्वीकार कर लिया गया और इसके बाद भीड़ को वहां से हटा दिया गया। बिना अनुमति प्रदर्शन पर प्रशासन ने जताई आपत्ति सदर एसडीओ विकास कुमार ने बताया कि कचहरी के मुख्य द्वार पर चल रहे प्रदर्शन को प्रशासन ने समाप्त करा दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के लिए विधिवत अनुमति नहीं ली गई थी। प्रदर्शनकारियों के नेताओं और प्रतिनिधियों से बातचीत कर उन्हें समझाया गया और उनका ज्ञापन स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में एमएलसी चुनाव के मद्देनजर बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। ऐसे में बिना अनुमति प्रदर्शन या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधि पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन के अनुसार प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया और किसी बड़े उपद्रव की सूचना नहीं है। ज्ञापन सौंपकर खत्म हुआ प्रदर्शन प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस नेताओं ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल भागलपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में पार्टी द्वारा चुनाव प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। कांग्रेस ने संकेत दिया कि जब तक उसके उठाए सवालों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक वह इस मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर उठाती रहेगी। सोमवार को भागलपुर में कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची विवाद को लेकर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के बुलावे पर जिला कांग्रेस कार्यकर्ता समाहरणालय पहुंचे। सुरक्षा के चलते मुख्य गेट बंद कर दिया गया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने बाहर ही नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान ‘वोट चोर गद्दी छोड़ो’ जैसे नारे लगे। कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर नाराजगी जताई। यह प्रदर्शन कांग्रेस के देशव्यापी अभियान का हिस्सा था। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें पद से हटाने की मांग की है। कांग्रेस जिला प्रभारी ने किया प्रदर्शन का नेतृत्व भागलपुर कांग्रेस जिला प्रभारी राहुल सिंह चौहान ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठा रही है। राहुल चौहान ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारियों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कांग्रेस ने इसी आधार पर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों के बीच निर्वाचन आयोग की ओर से यह कहा गया है कि आयोग के फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। इसलिए कांग्रेस के आरोपों और निर्वाचन आयोग के पक्ष को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना जरूरी है। ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई की मांग कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कई मांगें रखीं। पार्टी की ओर से उन्हें पद से हटाने, उनके खिलाफ कार्रवाई करने और उनके कार्यकाल में लिए गए चुनाव संबंधी फैसलों तथा मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की गई। युवा कांग्रेस के प्रतिनिधि प्रशांत बनर्जी ने भी केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से नहीं चल रही है और कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। कलेक्ट्रेट गेट के बाहर बढ़ता गया आक्रोश प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार नारेबाजी करते रहे। समाहरणालय के मुख्य द्वार पर ताला लगे होने के बावजूद कार्यकर्ताओं ने वहीं सभा कर अपनी मांगें रखीं। पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। समाहरणालय की ओर आने वाले रास्तों और प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने के बाद प्रदर्शन समाप्त कराया गया। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनका ज्ञापन स्वीकार कर लिया गया और इसके बाद भीड़ को वहां से हटा दिया गया। बिना अनुमति प्रदर्शन पर प्रशासन ने जताई आपत्ति सदर एसडीओ विकास कुमार ने बताया कि कचहरी के मुख्य द्वार पर चल रहे प्रदर्शन को प्रशासन ने समाप्त करा दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के लिए विधिवत अनुमति नहीं ली गई थी। प्रदर्शनकारियों के नेताओं और प्रतिनिधियों से बातचीत कर उन्हें समझाया गया और उनका ज्ञापन स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में एमएलसी चुनाव के मद्देनजर बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। ऐसे में बिना अनुमति प्रदर्शन या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधि पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन के अनुसार प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया और किसी बड़े उपद्रव की सूचना नहीं है। ज्ञापन सौंपकर खत्म हुआ प्रदर्शन प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस नेताओं ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल भागलपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में पार्टी द्वारा चुनाव प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। कांग्रेस ने संकेत दिया कि जब तक उसके उठाए सवालों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक वह इस मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर उठाती रहेगी।

