Delhi Police ने गैंगस्टर Kapil Sangwan के नाम पर रंगदारी मांगने वाले दो आरोपियों को पकड़ा

Delhi Police ने गैंगस्टर Kapil Sangwan के नाम पर रंगदारी मांगने वाले दो आरोपियों को पकड़ा

दिल्ली पुलिस ने गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ ​​नंदू के नाम पर जबरन वसूली गिरोह चलाने और एक व्यापारी से तीन करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। एक पुलिस अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि आरोपी डर पैदा करने के लिए लक्षित लोगों के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कथित तौर पर गोलीबारी की योजना भी बना रहे थे।

उन्होंने बताया कि द्वारका में रहने वाले रोहित अरोड़ा (47) और उत्तम नगर निवासी सुधीर गहलोत उर्फ छोटा नंदू (44) ने कथित तौर पर रंगदारी की मांग को लेकर द्वारका इलाके के कई कारोबारियों को फोन किया और पैसे न देने पर उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी। अधिकारी के मुताबिक, “आरोपियों ने फोन करते समय अपनी पहचान छिपाने के लिए कथित तौर पर नकली ईमेल आईडी का इस्तेमाल करके मोबाइल ऐप से बनाए गए वर्चुअल मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया।”
उन्होंने बताया कि यह मामला तब सामने आया, जब आरोपियों के शिकायतकर्ता से तीन करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने की शिकायत के आधार पर छह सितंबर को बिंदापुर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी ने द्वारका के कम से कम पांच कारोबारियों को निशाना बनाया था, जिनमें तीन जान-पहचान के व्यापारी शामिल थे।

उन्होंने बताया कि आरोपियों ने शूटर का इंतजाम करने और लक्षित व्यापारियों के घरों या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर गोलीबारी करवाने की योजना बनाई थी, ताकि उनमें डर पैदा कर रंगदारी देने के लिए मजबूर किया जा सके। अधिकारी ने कहा, “अपराध शाखा की एक टीम ने जांच शुरू की और उस मोबाइल नंबर की तकनीकी निगरानी की, जिसका इस्तेमाल व्यापारी को धमकी देने के लिए किया गया था। एक संदिग्ध नंबर की पहचान की गई, जिसके गहलोत से जुड़े होने की बात सामने आई।”
उन्होंने बताया कि इसके बाद 23 सितंबर को अरोड़ा को द्वारका के सेक्टर-11 से गिरफ्तार कर लिया गया।

अधिकारी ने बताया कि अरोड़ा की निशानदेही पर गहलोत को 24 सितंबर को द्वारका इलाके से पकड़ा गया। उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों ने जबरन वसूली के मामले में अपनी संलिप्तता का खुलासा किया। अधिकारी के मुताबिक, आरोपियों ने एक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ की मदद से मोबाइल ऐप और फर्जी ईमेल आईडी का इस्तेमाल करके वर्चुअल नंबर बनाए।

उन्होंने बताया कि उक्त प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ की पहचान अजय के तौर पर हुई है, जो मध्यप्रदेश के रहने वाला है और जिसे हाल में कनाडा से निर्वासित किया गया था। अधिकारी के अनुसार, “गहलोत जेल में रहने के दौरान गैंगस्टर कपिल सांगवान के भाई ज्योति उर्फ ​​बाबा के संपर्क में आया था और बाद में उसने अपने जान-पहचान वालों के बीच सांगवान के साथ अपने जुड़ाव का जिक्र शुरू कर दिया। दोनों आरोपी क्रिकेट सट्टेबाजी और जुए में भारी नुकसान का सामना कर रहे थे, इसलिए उन्होंने अमीर व्यापारियों से पैसे ऐंठने के लिए सांगवान के नाम का इस्तेमाल करने का फैसला किया।”
उन्होंने बताया कि गहलोत ने अरोड़ा से 9,000 रुपये लेने के बाद उसके लिए एक नये स्मार्टफोन का इंतजाम किया और उसे तीन संभावित ‘शिकारों’ के मोबाइल नंबर दिए।

आरोप है कि अरोड़ा ने अगस्त के आखिरी दो हफ्तों में इन लोगों को धमकी भरे फोन किए। पुलिस के मुताबिक, बिंदापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अरोड़ा को गिरफ्तारी का डर सताने लगा; उसने फोन करने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल ठिकाने लगा दिया और अपने निजी फोन से सिम कार्ड निकाल दिया। पुलिस के अनुसार, अरोड़ा ने पूछताछ के दौरान बताया कि क्रिकेट सट्टेबाजी में उसे करीब 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ था और उसे घर तथा बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाने में दिक्कत हो रही थी।

पुलिस ने बताया कि अरोड़ा और गहलोत ने रंगदारी की रकम का इस्तेमाल अपनी आर्थिक देनदारियों को पूरा करने और खुद का जबरन वसूली का नेटवर्क बनाने के लिए करने की योजना बनाई थी। पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। उसने बताया कि गहलोत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी के कई मामलों में पहले से नामजद है, जबकि अरोड़ा के खिलाफ भी धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़ा एक मामला दर्ज है।

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