सिरसा के किसान सूखा और खाद की झेल रहे मार:पहले बारिश नहीं हुई, घग्गर सूखी जैसी, डीएपी मिल नहीं रही, चक्कर काट रहे

सिरसा के किसान सूखा और खाद की झेल रहे मार:पहले बारिश नहीं हुई, घग्गर सूखी जैसी, डीएपी मिल नहीं रही, चक्कर काट रहे

सिरसा जिले के किसान एक तरफ तो सूखा तो दूसरी ओर खाद की कमी की मार झेल रहे हैं। इस बार पूरा मानसून सीजन बीत गया, लेकिन बहुत कम बारिश हुई है। जिले के कुछ हिस्सों में बारिश तक नहीं हुई और आसपास के जिलों में भी बारिश कम हुई है। इसका असर घग्गर में आने वाले पानी पर पड़ा है, जो कभी फुल हो जाती थी। इस बार घग्गर भी सूखे जैसी है। सीजन बीत जाने के बावजूद घग्गर में पानी सिर्फ तलहटी तक ही चल रहा है और किनारों तक ही नहीं पहुंचा। घग्गर में मुश्किल से 500-600 क्यूसेक पानी चल रहा है। इसी घग्गर की बदौलत इससे निकलने वाली कच्ची नहरों में पानी छोड़ दिया जाता था। घग्गर के साथ लगते 25 से 30 गांवों के किसान घग्गर के पानी से अपनी फसल पका लेते थे। पर्याप्त पानी न मिलने से फसल बर्बाद हो गई। दूसरा, अब किसानों को आगे सरसों की बुवाई करनी है। डीएपी के लिए मारामारी हो रही है। किसान सुबह से ही डीएपी लेने के लिए अनाज मंडी में पहुंच जाते हैं, पर शाम तक चक्कर काटने के बाद भी खाद नहीं मिलती। कुछ किसानों को टोकन मिल जाते हैं तो कुछ किसान वंचित रह जाते हैं। सरकारी कार्यालयों से लेकर किसान रेस्ट हाउस में भी किसानों की भीड़ रहती है। खाद बांटने काे पुलिस बुलानी पड़ रही : किसान बणी निवासी किसान बलराज सिंह के अनुसार, नौबत ये आ गई है कि मार्केट कमेटी और प्रशासन को खाद बांटने के लिए पुलिस बुलानी पड़ रही है। कारण है कि किसानों की भीड़ ज्यादा होती है और अव्यवस्था हो जाती है। कई बार किसान लाइन में लगे होते हैं तो कुछ लाइन के बीच में घुस जाते हैं या किसी को टोकन पहले या ज्यादा मिल जाते हैं तो उनके बीच झगड़ा हो जाता है। टोकन के लिए भीड़ में मारामारी रहती है। ग्वार-मूंग की हरी फसल सूखी तो नरमा व धान की नहीं बनी हाईट जिले में सूखे की मार नरमा, ग्वार, मूंग और धान की फसल पर भारी पड़ी है। ग्वार और मूंग की खेत में खड़ी हरी-भरी फसल ही सूख गई और धान की फसल दिखने में हरी अवश्य है, पर उनमें धान सही से बना है और न ही हाईट में ग्रोथ हुई। नरमा की फसल बारिश न होने की वजह से प्रभावित हुई और उसकी हाईट तीन से चार फुट तक ही रह गई और टिंडा भी सही से नहीं खिला है। इसलिए किसान जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे हैं और किसान प्रतिनिधिमंडल ने डीसी को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। यह मुद्दा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष भी उठा था और इस पर मुख्यमंत्री का जवाब था कि नहरी पानी आया है। बारिश कम हुई है तो उस अनुसार सरकार उसका आंकलन करवाएगी। घग्गर के पानी से हो जाती थी सिंचाई : किसान नेजाडेला निवासी किसान इकबाल सिंह का कहना है कि सूखे की मार तो हर किसान पर है। जो धान की फसल पहले होती थी, वैसी इस बार नहीं है। इस बार बारिश नहीं हुई तो घग्गर में भी पानी नहीं आया। इस वजह से सूखा की मार ज्यादा है। वरना घग्गर के पानी से किसानों को धान या अन्य फसल में पानी सिंचाई के लिए मिल जाता था।

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