राजसमंद : सरकारी दीवार पर 800 रुपए की जांच, मशीन बंद तो बाहर 3 से 10 हजार तक खर्च

राजसमंद : सरकारी दीवार पर 800 रुपए की जांच, मशीन बंद तो बाहर 3 से 10 हजार तक खर्च

राजसमंद. राजकीय आरके अस्पताल में मरीजों के लिए सीटी स्कैन की सुविधा जरूरत के वक्त ही ठप नजर आ रही है। करीब 15 से 16 साल पुरानी सीटी स्कैन मशीन तकनीकी खराबी के चलते बंद है और मशीन को खोलकर रखा गया है। अस्पताल की दीवार पर सीटी स्कैन की निर्धारित दरें आज भी दर्ज हैं, लेकिन मशीन बंद होने से मरीजों को निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि डॉक्टर जांच लिख रहे हैं तो मरीज जांच करवाएं कहां?

800 रुपए की जांच के लिए बाहर हजारों का खर्च

अस्पताल की रेट लिस्ट के अनुसार सिर, गर्दन, रीढ़ और पेट सहित कई सीटी जांचों की दर करीब 800 रुपए है। वहीं निजी जांच केंद्रों पर जांच के प्रकार के अनुसार 3 हजार से 10 हजार रुपए तक खर्च होने की स्थिति सामने आई। यानी सरकारी अस्पताल में तय दर और निजी केंद्र की जांच राशि के बीच बड़ा अंतर है।

चेस्ट में दर्द, जांच के लिए देने पड़े 3 हजार

पड़ताल के दौरान चेस्ट में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे एक मरीज को डॉक्टर ने सीटी स्कैन कराने की सलाह दी। मरीज अस्पताल में जांच कराने पहुंचा, लेकिन मशीन बंद होने के कारण उसे निजी केंद्र जाना पड़ा। वहां चेस्ट सीटी स्कैन के लिए करीब 3 हजार रुपए का भुगतान करना पड़ा। बीमारी का दर्द मरीज का था, लेकिन सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं मिलने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उसी पर आया।

हर महीने 500-600 मरीज, 5-6 लाख का बिल

सीटी स्कैन इंचार्ज संतोष ने बताया कि मशीन करीब 15-16 साल पुरानी है। उनके अनुसार हर महीने 500 से 600 मरीज सीटी स्कैन करवाते हैं और करीब 5 से 6 लाख रुपए का बिल बनता है। सेवा उदयपुर की कंपनी को दिए गए टेंडर के माध्यम से संचालित हो रही है। इंचार्ज के अनुसार कंपनी का अस्पताल से करीब 70 लाख रुपए का भुगतान बकाया है। पुरानी मशीन के बावजूद सेवा लगातार दी जा रही थी, लेकिन फिलहाल तकनीकी खराबी से मशीन बंद है। अस्पताल में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज इमरजेंसी में आते हैं, जिनमें 20 से 25 मरीजों को सीटी स्कैन की सलाह दी जाती है। ऐसे में मशीन खराब होने पर मरीजों के सामने इंतजार या निजी केंद्र जाने का विकल्प रह जाता है।

अब सवाल मशीन कब होगी ठीक?

करीब 15-16 साल पुरानी मशीन पर निर्भरता और उसके रखरखाव को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मशीन की नियमित तकनीकी जांच, खराबी दूर करने में लगने वाला समय और मशीन चालू होने तक मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर भी सवाल है।

इनका कहना है

मशीन और जगह अस्पताल की है, जबकि सरकार ने इसे निजी क्षेत्र को संचालन के लिए दिया है। तय रेट लिस्ट के अनुसार ही मरीजों की सीटी स्कैन जांच होती है और समय-समय पर भुगतान किया जाता है। उन्होंने बताया कि तकनीकी खराबी की सूचना संबंधित कंपनी ने दी है और टेक्नीशियन को बुलाया गया है। टेक्नीशियन दिल्ली से आएगा और जल्द ही मशीन ठीक करवा दी जाएगी।

– डॉ. रमेश रजक, पीएमओ, राजकीय आरके अस्पताल, राजसमंद

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