गुरुवार को चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर बोलते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि पार्टी बार-बार उस ‘एंटी-इनकंबेंसी’ (सत्ता-विरोधी लहर) फैक्टर से क्यों बचती दिखती है, जो दूसरे राजनीतिक मुकाबलों में देखने को मिलता है। बीजेपी के चुनावी रिकॉर्ड पर बात करते हुए गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर सत्ता-विरोधी लहर (एंटी-इंकम्बेंसी) का असर राजनीतिक पार्टियों पर दिखता है, लेकिन मोदी, शाह और बीजेपी पर ऐसा होता नहीं लगता।
इसे भी पढ़ें: Kolkata Municipal Corporation और 6 नगर पालिकाओं के चुनाव दिवाली बाद नवंबर में संभव
राहुल ने कहा कि मैं हाल ही में चर्चा में रही कुछ बातों पर अपनी राय रखना चाहता हूँ… मैं एक राजनीतिक परिवार से आता हूँ और मैंने 50 से ज़्यादा साल ऐसे ही परिवार में बिताए हैं… भारत में ‘एंटी-इनकंबेंसी’ (सत्ता-विरोधी लहर) नाम की एक बुनियादी ताकत होती है, जो बहुत तेज़ी से किसी भी सरकार का विरोध करने लगती है। यह किसी को नहीं छोड़ती। इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश युद्ध जीता था, वे अपनी लोकप्रियता के शिखर पर थीं, और फिर अचानक, एक-दो साल के भीतर ही, ज़बरदस्त सत्ता-विरोधी लहर और भारी दबाव का सामना करना पड़ा। यही बात एक के बाद एक कई नेताओं के साथ होती है। यह कांग्रेस नेताओं के साथ होता है, क्षेत्रीय पार्टियों के साथ होता है, लेकिन न जाने क्यों, यह कभी भी नरेंद्र मोदी, शाह या बीजेपी के साथ नहीं होता।
इसे भी पढ़ें: Congress ने तेज की तैयारी, Parliament में CEC Gyanesh Kumar पर आएगा महाभियोग!
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वोट चोरी के बाद कानून चोरी और उससे संस्थाओं की चोरी होती है; आज वोट चला गया है, तो कानून बनाने वाली व्यवस्था भी चली गई है। ‘वोट चोरी’ करके जीतने वाले सांसदों का बनाया कोई भी कानून गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग इस वोट का संस्थागत संरक्षक है। वोट की रक्षा करना उनकी ज़िम्मेदारी है। और फिर सब कुछ वहीं से शुरू होता है। अगर वोट ही खत्म हो जाए, तो संविधान काम नहीं करता, कानून गैर-कानूनी हो जाते हैं और संस्थाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता। यही वो लोग हैं जिन्होंने ऐसा किया है।
राहुल ने साफ तौर पर कहा कि मैं हवा-हवाई बातें नहीं कर रहा हूँ। मैंने इसे सबूत के साथ दिखाया है। मैं आपको बता दूँ कि इस बात को 100 प्रतिशत पक्का करने के लिए पहले से ही काफी जानकारी मौजूद है – 99 प्रतिशत नहीं, बल्कि 100 प्रतिशत पक्का – कि भारतीय चुनाव, लोकसभा चुनाव, 2024 के चुनाव और विधानसभा चुनाव, सभी को खारिज किया जा रहा है। कांग्रेस द्वारा महाराष्ट्र, हरियाणा में ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाना शुरू करने के बाद दो ईसी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार का विरोध करना शुरू कर दिया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि हरियाणा में 50 सालों से कभी एक पार्टी की सरकार बनती है तो कभी दूसरी की। अचानक एंटी-इनकंबेंसी (मौजूदा सरकार के खिलाफ़ नाराजगी) गायब हो जाती है। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही होता है; अचानक यह गायब हो जाती है। उत्तर प्रदेश में भी यही हाल है। कभी समाजवादी पार्टी, तो कभी BSP; और एंटी-इनकंबेंसी गायब हो जाती है। मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही होता है। गुजरात में भी। यह हमारे लिए एक बुनियादी सवाल रहा है। हम किसी व्यक्ति की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज को तो समझ सकते हैं, लेकिन यह नहीं समझ पाते कि एंटी-इनकंबेंसी कैसे गायब हो जाती है। सद्दाम हुसैन के इराक में एंटी-इनकंबेंसी नहीं होती। उत्तर कोरिया में भी नहीं होती। दुनिया में ऐसी कोई डेमोक्रेसी नहीं है जहाँ एंटी-इनकंबेंसी न हो… वोट से ही, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, हमारे संविधान को ताकत मिलती है। संविधान से हमारे कानून बनते हैं, और कानूनों से हमारी संस्थाएँ बनती हैं। यह एक चेन है… अगर वोट ही खत्म हो गया, तो हमारा संविधान भी खत्म हो गया… अगर संविधान खत्म हो गया, तो हमारे कानून गैर-कानूनी हो जाते हैं। अगर कानून गैर-कानूनी हैं, तो हमारी संस्थाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता। यहाँ मुख्य सवाल यह है कि यह सिर्फ़ वोट पर हमला नहीं है; यह हर भारतीय नागरिक की सोच, बुनियादी ढांचे और अभिव्यक्ति पर हमला है। हम बार-बार यही कह रहे हैं कि वोट को लेकर कोई समस्या है।

