Plagiocephaly: बच्चे के सिर का पिछला हिस्सा चपटा क्यों हो जाता है? क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें प्लेगियोसेफली के कारण

Plagiocephaly: बच्चे के सिर का पिछला हिस्सा चपटा क्यों हो जाता है? क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें प्लेगियोसेफली के कारण

Plagiocephaly Symptoms: क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कुछ छोटे शिशुओं के सिर का पिछला या एक तरफ का हिस्सा थोड़ा चपटा या चिपटा सा दिखाई देता है? जब घर में नया मेहमान आता है, तो अक्सर बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि बच्चे का सिर गोल बनाने के लिए उसे राई का तकिया लगाना चाहिए या सिर की सही मालिश करनी चाहिए। इसको प्लेगियोसेफली (Plagiocephaly या Flat Head Syndrome) कहा जाता है। नवजात बच्चों की खोपड़ी (Skull) बहुत ही मुलायम और लचीली होती है। जन्म के शुरुआती कुछ महीनों में जब बच्चा एक ही तरफ या पीठ के बल लगातार लेटा रहता है, तो सिर पर एक जगह लगातार दबाव पड़ने से वह हिस्सा चपटा हो जाता है। यह कोई बीमारी नहीं है और न ही इससे बच्चे के दिमाग के विकास पर कोई बुरा असर पड़ता है। फिर भी, माता-पिता के मन में इसे लेकर कई तरह के डर और सवाल रहते हैं। चलिए समझते हैं कि प्लेगियोसेफली क्या है, यह क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

प्लेगियोसेफली (Flat Head Syndrome) क्या होता है?

जॉन हॉपकिंस मेडिसिन के अनुसार, प्लेगियोसेफली का मतलब है बच्चे के सिर के आकार का असमान या चपटा हो जाना। जब शिशु के सिर के किसी एक हिस्से पर लगातार भारी दबाव पड़ता है, तो वह हिस्सा गोल रहने के बजाय चपटा हो जाता है। यह मुख्य रूप से दो तरह का होता है, पोजीशन (Positional Plagiocephaly) जिसमें सिर का पिछला हिस्सा या कोई एक साइड चपटी हो जाती है। जब बच्चा लेटा होता है, तो उसका सिर अक्सर एक ही तरफ झुका रहता है। ब्रेकीसेफली (Brachycephaly) में बच्चे के सिर का पूरा पिछला हिस्सा समान रूप से चपटा हो जाता है और सिर पीछे से चौड़ा दिखाई देने लगता है।

सिर चपटा होने के मुख्य लक्षण क्या हैं?

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, बच्चे के सिर में बदलाव को आप घर पर ही बहुत आसानी से देखकर पहचान सकते हैं;

  • सिर के एक तरफ चपटापन।
  • कानों की जगह में अंतर।
  • माथे या गाल का उभार।
  • सिर पर बालों की कमी।

बच्चे के सिर का हिस्सा चपटा होने के मुख्य कारण

प्लेगियोसेफली होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जिनमें से मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं;

  • एक ही तरफ पीठ के बल सोने की आदत- सुरक्षित नींद के लिए बच्चों को पीठ के बल सुलाया जाता है ताकि SIDS (अचानक शिशु मृत्यु) का खतरा न रहे। लेकिन अगर बच्चा घंटों एक ही करवट या सीधे पीठ के बल लेटा रहे, तो सिर पर लगातार दबाव बनने से वह चपटा हो जाता है।
  • गर्भाशय में जगह की कमी- अगर मां के पेट में जुड़वां (Twins) या तीन बच्चे हों, या गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूइड (पानी) कम हो, तो पेट के अंदर ही बच्चे के सिर पर दबाव पड़ने लगता है।
  • समय से पहले जन्म (Premature Birth)- प्री-मैच्योर बच्चों की खोपड़ी की हड्डियां सामान्य बच्चों की तुलना में और भी ज्यादा नरम होती हैं। साथ ही, इन्हें काफी समय अस्पताल के NICU में एक ही स्थिति में लेटे रहना पड़ता है।
  • टॉर्टिकोलिस (Torticollis – गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव)- यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे की गर्दन की मांसपेशियां एक तरफ से कड़ी या छोटी होती हैं। इस वजह से बच्चा अपनी गर्दन को दूसरी तरफ घुमा नहीं पाता और हमेशा एक ही तरफ सिर टिकाकर सोता है।

बच्चे के सिर को चपटा होने से कैसे बचाएं?

अगर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो बिना किसी बड़ी दवा या सर्जरी के सिर्फ बच्चे की पोजीशन बदलकर ही सिर को वापस गोल आकार दिया जा सकता है। इसके लिए ये आसान उपाय अपनाएं;

  • टमी टाइम (Tummy Time) दें।
  • सोते समय सिर की दिशा बदलें।
  • गोद में लेने का तरीका बदलें।
  • बेबी स्विंग और कार सीट में कम रखें।
  • खिलौनों का सही इस्तेमाल ताकि वह अपनी गर्दन घुमाने की कोशिश करे।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

ज्यादातर मामलों में जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, बैठना और रेंगना (Crawl) सीखता है, उसके सिर का आकार अपने आप ठीक होने लगता है। लेकिन अगर आपको नीचे दी गई बातें महसूस हों, तो डॉक्टर से सलाह लें;

  • टमी टाइम और पोजीशन बदलने के बाद भी 2-3 महीने में सिर के आकार में कोई सुधार न दिखे।
  • बच्चे को अपनी गर्दन घुमाने में बहुत तकलीफ या दर्द हो रहा हो।
  • सिर की हड्डियां आपस में जुड़ी हुई या बहुत कठोर महसूस हों।

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