RPNLU में छात्रों के उत्पीड़न का मामला:स्टूडेंट ने विधि विभागाध्यक्ष पर जातीय भेदभाव के आरोप लगाए, बोले- मेरा उत्पीड़न किया

RPNLU में छात्रों के उत्पीड़न का मामला:स्टूडेंट ने विधि विभागाध्यक्ष पर जातीय भेदभाव के आरोप लगाए, बोले- मेरा उत्पीड़न किया

आईआईटी मुंबई (IIT Mumbai) में छात्र की आत्महत्या और उससे उपजे देशव्यापी भूचाल के बाद अब प्रयागराज स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (RPNLU) में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यूनिवर्सिटी में कथित जातीय भेदभाव और छात्रों के उत्पीड़न का प्रकरण इलाहाबाद हाईकोर्ट की देहरी पर पहुंच गया है। अदालत ने तल्ख तेवर अपनाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रयागराज में विधि शिक्षा की अलख जगाने के उद्देश्य से स्थापित डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना को दो साल ही हुए हैं, लेकिन अल्पकाल में ही यह संस्थान अकादमिक उत्कृष्टता के बजाय विवादों का अड्डा बन गया है। विवाद की शुरुआत यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के 12 पदों पर भर्ती प्रक्रिया से हुई। इस चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता को दरकिनार कर धांधली और भाई-भतीजावाद के कथित आरोप लगे। भर्ती में कथित अनियमितताओं की गूंज शासन तक पहुंची, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए सीनियर आईएएस एम देवराज की अध्यक्षता में तीन प्रमुख सचिवों की एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया। इस जांच कमेटी ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी जिम्मेदार सदस्यों को लखनऊ तलब किया था। यह उच्चस्तरीय जांच दो दिनों तक चली। बताया जा रहा है कि जांच कमेटी के सामने पूछताछ के दौरान विधि विभाग के विभागाध्यक्ष ने कुलपति के खिलाफ बयान दर्ज कराए। इसके बाद कुलपति और विधि विभाग प्रमुख के बीच तनाव बढ़ा। इसी बीच कुलपति ने विधि विभागाध्यक्ष समेत छह असिस्टेंट प्रोफेसरों के लैपटॉप जब्त कर उसकी फोरेंसिक जांच कराई। कैंपस के भीतर फैकल्टी के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स सीज करने और उन्हें कटघरे में खड़ा करने की इस कार्रवाई ने संस्थान की साख को तार-तार कर दिया। फैकल्टी और प्रशासन की इस खींचतान अब छात्रों से कथित जातीय भेदभाव तक तक पहुंच गई। दो छात्रों ने विधि विभागाध्यक्ष पर कथित जातीय भेदभाव का आरोप लगाया। चूंकि हाल ही में आईआईटी मुंबई में एक छात्र की आत्महत्या के प्रकरण ने देशभर में शैक्षणिक परिसरों के भीतर मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न के खिलाफ गंभीर आक्रोश पैदा किया है, ऐसे में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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