Spinny IPO: किसी ऐसे शख्स के लिए, जिसने स्कूल में टॉप किया हो, IIT की प्रवेश परीक्षा दो बार पास की हो और आईआईटी दिल्ली जैसे संस्थान में पढ़ाई की हो, नाकामी शायद सबसे अनजान चीज होती है। लेकिन नीरज सिंह की कहानी यहीं से दिलचस्प होती है। स्टार्टअप की दुनिया में उतरने के बाद उन्हें एक नहीं, दो बार अपने कारोबार बंद करने पड़े। पिता को खोने का दर्द भी इसी दौर में मिला। लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं हुई। इन्हीं झटकों ने नीरज को एक ऐसी समस्या समझने का मौका दिया, जिसने आगे चलकर उन्हें भारत के यूज्ड कार बाजार के बड़े नामों में शामिल कर दिया। इसी सोच से 2015 में Spinny की शुरुआत हुई।
अब यही कंपनी शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुग्राम बेस्ड स्पिनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास आईपीओ के लिए गोपनीय तरीके से ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए हैं। कंपनी आईपीओ से करीब 3,000 से 3,500 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है।
30 शहरों में कार बेचती है स्पिनी
स्पिनी का मुकाबला यूज्ड कार बाजार में Cars24 जैसी कंपनियों से है। कंपनी अब तेजी से अपना नेटवर्क बढ़ाने पर काम कर रही है। मौजूदा समय में स्पिनी करीब 30 शहरों में कार बेचती है, जबकि उसका सप्लायर नेटवर्क करीब 100 शहरों तक फैला है। कंपनी निकट भविष्य में 10 और शहरों में पहुंच बनाने की योजना पर काम कर रही है। IPO से मिलने वाले नए फंड का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में कारोबार का विस्तार करने में किया जा सकता है।
कभी दो स्टार्टअप बंद हो गए थे
नीरज सिंह के लिए कारोबार की शुरुआत इतनी आसान नहीं रही। 2011 से 2014 के बीच उन्होंने स्टार्टअप की दुनिया में कदम रखा और दो अलग-अलग कारोबार शुरू किए। लेकिन दोनों ही कंपनियां बंद हो गईं। यह उनके लिए बड़ा झटका था। पढ़ाई में लगातार सफलता पाने वाले नीरज के सामने पहली बार कारोबार में असफलता की हकीकत थी। इसी दौरान उनके पिता का निधन भी हो गया। ऐसे वक्त में परिवार का सहारा भी छिन गया।
हालांकि, नीरज ने इस दौर से पीछे हटने के बजाय सीखने का रास्ता चुना। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि ग्राहक आखिर चाहता क्या है। इसी तलाश में उन्हें भारत के सेकेंड हैंड कार बाजार में एक बड़ी कमी नजर आई।
यूज्ड कार बाजार में सबसे बड़ी समस्या थी भरोसा
भारत में पहली कार खरीदने वाले लोगों के लिए पुरानी कार अक्सर बजट के लिहाज से बेहतर विकल्प होती है। शुरुआती नौकरी और सीमित आमदनी के बीच नई कार खरीदना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। लेकिन सेकेंड हैंड कार खरीदने में कई सवाल भी होते हैं। कार की असली हालत कैसी है? पहले कोई एक्सीडेंट हुआ था या नहीं? इंजन और दूसरे पार्ट्स कितने ठीक हैं? कीमत सही है या नहीं? यही भरोसे का संकट नीरज को एक कारोबारी मौके के तौर पर दिखाई दिया।
साल 2015 में उन्होंने स्पिनी की शुरुआत की। कंपनी का मकसद सिर्फ खरीदार और विक्रेता को एक-दूसरे से जोड़ना नहीं था। विचार यह था कि ग्राहक को पुरानी कार खरीदते समय भी वैसा ही भरोसा मिले, जैसा वह नई कार खरीदते वक्त महसूस करता है।
कार बेचने से ज्यादा जरूरी था भरोसा बनाना
स्पिनी ने शुरुआत में कारों की लिस्टिंग को सिर्फ एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस की तरह नहीं देखा। कंपनी ने कारों की जांच, उनकी क्वालिटी और खरीदारी की पूरी प्रक्रिया पर ज्यादा नियंत्रण रखा। ग्राहकों को पांच दिन की मनी-बैक गारंटी और एक साल की वारंटी जैसे विकल्प दिए गए। इससे कंपनी ने यूज्ड कार खरीदने के उस डर को कम करने की कोशिश की, जो इस बाजार की सबसे बड़ी समस्या थी। साल 2016 तक मॉडल ने असर दिखाना शुरू कर दिया था। कंपनी ने करीब 350 कारें बेचीं और 14 करोड़ रुपये का कारोबार किया।
इसके बाद निवेशकों की नजर भी स्पिनी पर गई। 2017 में Blume Ventures ने कंपनी में करीब 7 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस पैसे से स्पिनी ने दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में अपनी मौजूदगी बढ़ाई।
कारोबार बढ़ा, लेकिन मुश्किलें भी कम नहीं हुईं
बिक्री बढ़ने के बावजूद स्पिनी के सामने आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई। कंपनी का शुरुआती peer-to-peer मॉडल लंबे समय के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रहा था। 2017 तक कंपनी को करीब 6.3 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। दूसरी तरफ Cars24 और CarDekho जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियां तेजी से पूंजी जुटा रही थीं। ऐसे में नीरज को कारोबार का मॉडल बदलने का फैसला करना पड़ा। स्पिनी ने खुद कार खरीदने, उनकी मरम्मत और रीफर्बिशमेंट करने और फिर ग्राहकों को बेचने वाला फुल-स्टैक मॉडल अपनाया। लेकिन इसके लिए ज्यादा पैसा चाहिए था।
घर तक गिरवी रखना पड़ा
कंपनी में कर्मचारियों की संख्या बढ़कर करीब 75 हो चुकी थी और खर्च भी बढ़ रहा था। हालात इतने मुश्किल हुए कि नीरज ने कर्मचारियों की सैलरी देने और कारोबार को चालू रखने के लिए अपना घर तक गिरवी रख दिया। धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा वापस आया
2018 में स्पिनी की बिक्री में गिरावट आई। फिर कंपनी ने क्वालिटी और पारदर्शिता पर जोर बनाए रखा। इसका असर धीरे-धीरे दिखने लगा। साल 2020 तक कंपनी हर साल करीब 3,750 कारें बेच रही थी और पांच शहरों तक पहुंच चुकी थी। इस दौरान कंपनी को करीब 270 करोड़ रुपये की नई फंडिंग मिली, जिससे कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिली। फिर आया 2021, जो स्पिनी के लिए निर्णायक साबित हुआ।
कंपनी ने ज्यादा मार्जिन वाले लग्जरी कार सेगमेंट पर ध्यान बढ़ाया और कारों की रीफर्बिशमेंट की क्वालिटी को और मजबूत किया। सालाना बिक्री बढ़कर करीब 7,200 कारों तक पहुंच गई। कोरोना महामारी के दौरान भी कंपनी ने कारोबार को नए तरीके से चलाने की कोशिश की। कॉन्टैक्टलेस खरीदारी, घर तक कार की डिलीवरी और क्वालिटी से जुड़े तय मानकों ने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने में मदद की।
2021 में मिली बड़ी फंडिंग और Unicorn का दर्जा
2021 में Tiger Global और General Catalyst जैसे बड़े निवेशकों से स्पिनी को बड़ी रकम मिली। इससे कंपनी को आठ और शहरों में विस्तार करने में मदद मिली। नवंबर 2021 तक स्पिनी 20,000 से ज्यादा कारें बेच चुकी थी और कंपनी ने करीब 2,000 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई थी। इसी दौर में कंपनी की वैल्यूएशन करीब 12,000 करोड़ रुपये पहुंच गई और स्पिनी यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गई।
आज स्पिनी का कारोबार शुरुआती दिनों के मुकाबले काफी बड़ा हो चुका है। नीरज सिंह की कहानी की खास बात सिर्फ इतनी नहीं है कि उन्होंने करोड़ों रुपये की कंपनी खड़ी की। असली मोड़ उन शुरुआती असफलताओं में था, जिन्होंने उन्हें यह समझने का मौका दिया कि बाजार में ग्राहक की सबसे बड़ी जरूरत क्या है।


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