‘कच्चा बादाम गर्ल’ बनीं सीता तो मचा बवाल:अंजली अरोड़ा ने ट्रोलर्स को जवाब दिया, बोलीं- पुरानी छवि मेरी पूरी जिंदगी नहीं

‘कच्चा बादाम गर्ल’ बनीं सीता तो मचा बवाल:अंजली अरोड़ा ने ट्रोलर्स को जवाब दिया, बोलीं- पुरानी छवि मेरी पूरी जिंदगी नहीं

अंजली अरोड़ा इन दिनों फिल्म ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ में सीता का किरदार निभाने को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उनके लुक और किरदार की तारीफ हो रही है, वहीं सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल भी किया जा रहा है। वजह उनकी पुरानी सोशल मीडिया इमेज, खासकर ‘कच्चा बादाम’ गाने पर वायरल हुईं डांसिंग रील्स हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में अंजली ने ट्रोलिंग और पुरानी छवि पर बात की। वहीं श्री राम का किरदार निभा रहे देव शर्मा ने कहा कि किसी के किए गए काम का असर उसकी पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है। ‘कच्चा बादाम’ वाली इमेज को लेकर ट्रोल हो रही हैं अंजली अंजली अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर डांसिंग रील्स से पहचान बनाई थी। खासतौर पर ‘कच्चा बादाम’ गाने पर उनका डांस वीडियो खूब वायरल हुआ था। इसके बाद वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के तौर पर पहचानी जाने लगीं। बाद में उन्होंने रियलिटी शो ‘लॉक अप सीजन 1’ में हिस्सा लिया। अब जब वह ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ में सीता का किरदार निभा रही हैं, सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी तस्वीरों और वीडियो को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोग उनकी ग्लैमरस और बिंदास सोशल मीडिया इमेज की तुलना सीता के किरदार से कर रहे हैं। इसी वजह से उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि डांसिंग और ग्लैमरस इमेज के लिए पहचानी जाने वाली अंजली सीता जैसे पवित्र किरदार को कैसे निभा सकती हैं। कुछ कमेंट्स में उन्हें ‘कच्चा बादाम गर्ल’ कहकर ट्रोल किया गया, तो कुछ यूजर्स ने लिखा कि ‘सीता के रोल में शूर्पणखा’। अंजली बोलीं- ‘वो मेरी पूरी जिंदगी नहीं है’ ट्रोलिंग को लेकर अंजली ने दैनिक भास्कर से कहा कि लोगों के पास किसी को जज करने का अधिकार है, लेकिन किसी की पुरानी जिंदगी उसकी पूरी पहचान नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, “लोगों का काम है जज करना और उनके पास हक है। जो चीजें हैं, वो हैं ही। हम किसी भी चीज को अपनी लाइफ का एक पार्ट कह सकते हैं, लेकिन वो हमारी पूरी लाइफ नहीं होती।” अंजली ने कहा कि अगर लोग उन्हें पुरानी सोशल मीडिया इमेज के लिए याद करते हैं तो वह भी ठीक है, लेकिन उन्होंने इसके अलावा भी बहुत काम किया है और आगे भी करना चाहती हैं। उनके मुताबिक, “मैं चाहती हूं कि लोग मेरी पर्सनालिटी को अलग रखकर इस सिनेमा में मेरे किरदार को देखें और फिर जज करें।” ‘सीता’ के किरदार को लेकर अंजली ने की तैयारी सीता का किरदार मिलने पर अंजली खुद हैरान थीं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके मन में सवाल था कि वह यह किरदार कैसे निभा पाएंगी और उन्हें ही सीता का रोल क्यों दिया गया। डायरेक्टर के विजन और भरोसे के बाद उन्होंने खुद पर काम शुरू किया। शूटिंग के दौरान उन्होंने सीता के किरदार की कई चीजें अपनाने की कोशिश की। अंजली के मुताबिक, सीता उनके लिए धैर्य, त्याग और सादगी की मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात के बावजूद सीता ने धैर्य नहीं खोया और गुस्से में ऐसा फैसला नहीं लिया जिससे किसी और को नुकसान पहुंचे। ‘मैं आजकल की लड़की हूं, सीता से तुलना नहीं करूंगी’ जब अंजली से पूछा गया कि सीता के व्यक्तित्व से उनमें कितनी समानताएं हैं, उन्होंने खुद की तुलना सीता से करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह आज की पीढ़ी की लड़की हैं और उनके अपने विचार और लाइफस्टाइल हैं। हालांकि वह अपने धर्म और विश्वास से जुड़ी हुई हैं। अंजली ने कहा कि उनका विश्वास है कि जो उनका है, वह उनके पास जरूर आएगा और जो उनका नहीं है, वह पास आकर भी चला जाएगा। बच्चों को धर्म और संस्कारों से जोड़ना जरूरी अंजली अरोड़ा ने आज की पीढ़ी की परवरिश को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बच्चों को आधुनिक सोच और लाइफस्टाइल के साथ आगे बढ़ने की आजादी मिलनी चाहिए, लेकिन उन्हें अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों की जानकारी भी होनी जरूरी है। अंजली ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें अपने धर्म से जुड़े रहने और अच्छे संस्कारों के साथ आगे बढ़ना सिखाया है। उनका मानना है कि आज के माता-पिता को भी बच्चों को समझाना चाहिए कि वे किस संस्कृति और परंपरा से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि संस्कार इंसान की जिंदगी में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। व्यक्ति कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, उसके संस्कार उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बने रहते हैं। अंजली के मुताबिक, इंसान देश में रहे या विदेश में, किसी भी जगह काम करे या किसी भी तरह की जिंदगी जिए, उसके संस्कार हमेशा उसके साथ रहते हैं। इसलिए बच्चों को बचपन से ही परिवार, धर्म, संस्कृति और अच्छे मूल्यों से जोड़ना जरूरी है। देव शर्मा बोले- ट्रोलिंग किसी की जिंदगी पर डाल सकती है असर फिल्म में श्री राम का किरदार निभा रहे देव शर्मा ने ट्रोलिंग के मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि रामायण से मिलने वाली सबसे बड़ी सीखों में से एक यह है कि इंसान को अपने हर काम के असर के बारे में सोचना चाहिए। देव ने कहा, “ट्रोलिंग या किसी का मजाक उड़ाना तब होता है, जब हम उसके आफ्टर इफेक्ट्स के बारे में नहीं समझते। हम उस समय काम कर देते हैं, लेकिन उसका इम्पैक्ट किसी इंसान की पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है।” उन्होंने कहा कि रामायण और दूसरे ग्रंथों की सीख यही है कि इंसान जाने-अनजाने ऐसा काम न करे, जिससे किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी प्रभावित हो। शील वर्मा बोले- रामायण को सुपरहीरो फिल्म की तरह नहीं दिखाया फिल्म में लक्ष्मण का किरदार निभा रहे शील वर्मा ने बताया कि ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ को ज्यादा वीएफएक्स और भव्यता के सहारे पेश करने की कोशिश नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि मेकर्स का फोकस रामायण की कहानी को सरलता और मूल भावना के साथ दिखाने पर रहा है। शील के मुताबिक, फिल्म को सुपरहीरो या मार्वल जैसी ग्रैंड फिल्म बनाने की कोशिश नहीं की गई। उन्होंने कहा कि “सिंप्लिसिटी हम परोस रहे हैं। रामायण को रामायण की तरह दिखा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों ने बचपन से जिस रामायण को देखा और सुना है, फिल्म में उन्हें उसकी झलक जरूर देखने को मिलेगी। उनके अनुसार, फिल्म में कहानी और किरदारों की सादगी बनाए रखते हुए इसे पर्दे पर पेश किया गया है।

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