‘मिर्जापुर में सब कुछ बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया’, तिग्मांशु धूलिया बोले- ‘कट्टे ऐसे नहीं बनते’

‘मिर्जापुर में सब कुछ बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया’, तिग्मांशु धूलिया बोले- ‘कट्टे ऐसे नहीं बनते’

Tigmanshu Dhulia Ghamaasaan: फिल्ममेकर और अभिनेता तिग्मांशु धूलिया अपनी नई फिल्म ‘घमासान’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में हिंदी हार्टलैंड की पृष्ठभूमि में डकैत और आईपीएस अधिकारी के बीच टकराव की कहानी दिखाई गई है। इसी दौरान एक खास बातचीत में तिग्मांशु ने हिंदी हार्टलैंड की कहानियों और उनकी तुलना वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ से किए जाने पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि ‘मिर्जापुर’ में कई चीजों को काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।

‘हिंदी हार्टलैंड सिर्फ एक जगह नहीं है’

तिग्मांशु धूलिया ने हिंदी हार्टलैंड की कहानियों में लोकेशन के महत्व पर बात करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान को एक ही तरह से नहीं देखा जा सकता। इन राज्यों के भीतर भी अलग-अलग इलाके और उनकी अपनी अलग संस्कृति होती है।

उन्होंने कहा कि लोकेशन उनकी फिल्मों में एक महत्वपूर्ण किरदार की तरह होती है। वह अमेरिकी फिल्मों से प्रेरित हैं, जहां कई बार कहानी के साथ लोकेशन को भी अहम स्थान दिया जाता है।

‘मिर्जापुर में बहुत कुछ बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया’

जब तिग्मांशु से उनकी फिल्मों की तुलना ‘मिर्जापुर’ जैसी हार्टलैंड आधारित कहानियों से किए जाने को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह ‘मिर्जापुर’ पर ज्यादा टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन सीरीज में दिखाई गई कई चीजें वास्तविकता से काफी अलग और बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई थीं।

उन्होंने हथियारों और कानून-व्यवस्था को लेकर भी अपनी राय रखी। तिग्मांशु ने कहा कि जिस तरह से हथियार बनाए जाने और पूरी तरह की अराजकता को ‘मिर्जापुर’ में दिखाया गया है, वास्तविकता में चीजें इस तरह नहीं होतीं।

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर ज्यादा करीब थी’

तिग्मांशु धूलिया ने हिंदी हार्टलैंड की वास्तविकता के संदर्भ में अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ऐसी कहानियों की वास्तविकता के ज्यादा करीब थी।

उनकी टिप्पणी के बाद एक बार फिर हिंदी सिनेमा और ओटीटी पर उत्तर भारत के छोटे शहरों, अपराध, राजनीति और गैंग्स की कहानियों को दिखाने के तरीके को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

प्रतीक गांधी और अरशद वारसी की भी की तारीफ

इंटरव्यू के दौरान तिग्मांशु ने ‘घमासान’ के कलाकारों प्रतीक गांधी और अरशद वारसी के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि दोनों कलाकारों के लिए अपने शहरी व्यक्तित्व से बाहर निकलकर फिल्म के किरदारों में ढलना आसान रहा।

तिग्मांशु ने प्रतीक गांधी के सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वो इंजीनियर रह चुके हैं और थिएटर के साथ अलग-अलग काम भी कर चुके हैं। ‘स्कैम 1992’ के बाद उन्हें अभिनेता के तौर पर बड़ी पहचान मिली। तिग्मांशु के मुताबिक, प्रतीक ने अलग तरह की जिंदगी देखी है, जिसकी वजह से उनमें एक तरह की जमीनी समझ है।

वहीं अरशद वारसी को लेकर उन्होंने कहा कि वह मुंबई से आते हैं और दोनों की पृष्ठभूमि अलग है। तिग्मांशु ने अरशद को नैचुरल टैलेंट बताते हुए उनकी बहुमुखी प्रतिभा की तारीफ की।

क्या है ‘घमासान’ की कहानी?

‘घमासान’ में अरशद वारसी, प्रतीक गांधी और इशिता दत्ता अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी हिंदी हार्टलैंड की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें सत्ता, वफादारी, राजनीति और अस्तित्व की लड़ाई को दिखाया गया है।

फिल्म में अरशद वारसी का किरदार महाराज और प्रतीक गांधी का किरदार आदित्य आमने-सामने हैं। कहानी सिर्फ पुलिस और अपराधी के बीच संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सत्ता तंत्र और उसके आसपास बने माहौल को सामने लाती है। ‘घमासान’ का निर्माण जियो स्टूडियोज और गोल्डन रेशियो फिल्म्स ने किया है। फिल्म हिंदी ZEE5 पर स्ट्रीम हो रही है।

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