चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच माह (अप्रैल-अगस्त) के दौरान चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस को भारत का निर्यात 34 प्रतिशत बढ़कर 19.9 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। इस वृद्धि में चीन को भेजे जाने वाले सामान में 39 प्रतिशत की तेजी का मुख्य रूप से योगदान रहा। इससे भारत के निर्यात विस्तार के लिए ब्रिक्स समूह के बढ़ते महत्व का पता चलता है।
एक अधिकारी ने कहा, भारत जैसे-जैसे ब्रिक्स समूह के साथ अपनी भागीदारी गहरी कर रहा है, सबसे मजबूत रफ्तार इसके संस्थापक सदस्यों – चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस की ओर से देखने को मिल रही है। मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से मिलकर बने ब्रिक्स का विस्तार 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल करके किया गया था, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ। इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाइलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के भागीदार देश बने।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इन चार प्रमुख ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं को होने वाला निर्यात 34 प्रतिशत बढ़ा है, जो अप्रैल-अगस्त, 2025-26 के 14.9 अरब डॉलर से बढ़कर अप्रैल-अगस्त, 2026-27 में 19.9 अरब डॉलर हो गया। भारत के कुल निर्यात में इन चार देशों की हिस्सेदारी चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में बढ़कर 9.2 प्रतिशत हो गई, जो 2025-26 की समान अवधि में 8.1 प्रतिशत थी। प्रमुख ब्रिक्स देशों में चीन सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा।
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में चीन को भारतीय निर्यात 39 प्रतिशत बढ़कर 9.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया। दक्षिण अफ्रीका के मामले में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई और इस अवधि में वहां होने वाला निर्यात 58 प्रतिशत बढ़ा। ब्राजील और रूस ने भी क्रमशः 13 प्रतिशत और 11 प्रतिशत की स्थिर दो अंक की वृद्धि बनाए रखी।
अधिकारी ने कहा कि अप्रैल-अगस्त, 2026-27 के दौरान जापान को भारत का निर्यात 43 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इसी प्रकार, इटली को भारत का निर्यात चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में 30 प्रतिशत बढ़कर 3.92 अरब डॉलर हो गया, जो अप्रैल-अगस्त, 2025-26 में 3.02 अरब डॉलर था। दक्षिण कोरिया को होने वाला निर्यात 22 प्रतिशत बढ़कर 3.21 अरब डॉलर रहा।

