Caribbean Drug Trafficking: कैरेबियन सागर में अमेरिकी सेना ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक और बड़ा सैन्य ऑपरेशन अंजाम दिया है। अमेरिकी सेना के अनुसार, एक संदिग्ध पोत (बोट) पर किए गए हमले में 4 लोग मारे गए हैं। सेना का दावा है कि यह पोत मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल था। यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के उस अभियान का हिस्सा है, जिसमें कथित ‘नार्को-आतंकवादियों’ को निशाना बनाया जा रहा है।
10 दिन में दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सेना द्वारा जारी की गई यह जानकारी पिछले कुछ दिनों में हुई दूसरी बड़ी घटना है। इससे ठीक 10 दिन पहले भी कैरेबियन क्षेत्र में ही अमेरिकी बल के हमले में 3 लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रहे इन हमलों से समुद्री इलाकों में सख्ती काफी बढ़ गई है।
ट्रम्प प्रशासन का ‘नार्को-आतंकवाद’ पर एक्शन
यह कार्रवाई कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह पिछले साल से चलाए जा रहे एक बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा है। ट्रम्प प्रशासन के निर्देश पर चल रहे इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ‘नार्को-आतंकवादियों’ और अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के ठिकाने को खत्म करना है। इसके तहत कैरेबियन और पूर्वी प्रशांत महासागर के इलाकों में संदिग्ध बोट्स पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
अब तक 220 से ज्यादा मौतें, मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल
जब से यह विशेष सैन्य अभियान शुरू हुआ है, तब से कैरेबियन और पूर्वी प्रशांत महासागर के समुद्री मार्गों पर अमेरिकी हमलों में अब तक 220 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, लगातार बढ़ते मौतों के आंकड़ों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध भी शुरू हो गया है। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने इन घातक हमलों पर गंभीर चिंता जताते हुए इन्हें ‘न्यायेतर हत्याएं’ (Extrajudicial Killings) करार दिया है और अभियान की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
लैटिन अमेरिकी देशों के साथ समझौते की कोशिश
ट्रंप प्रशासन अपने इस सैन्य अभियान का दायरा सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे कई लैटिन अमेरिकी देशों में जमीन पर भी फैलाने के लिए सहयोगी देशों के साथ समझौते करने में जुटा हुआ है।
संयुक्त सैन्य अभियानों पर देशों का जवाब
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पिछले महीने पनामा दौरे के समय कहा था कि कोलंबिया, ग्वाटेमाला और होंडुरास ने अपने-अपने इलाकों में आपराधिक गिरोहों के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, ग्वाटेमाला ने किसी भी तरह का ऐसा समझौता होने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, दूसरी ओर इक्वाडोर ने मार्च में ही अमेरिका के साथ मिलकर इस तरह के अभियानों की शुरुआत कर दी थी।

