मुजफ्फरपुर के रामदयालु सिंह महाविद्यालय सभागार में शनिवार को RSS मुजफ्फरपुर महानगर की ओर से ‘तरूणोदय युवा संवाद’ कार्यक्रम हुआ। इसमें RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने युवाओं से संवाद किया। उन्होंने सोशल मीडिया, परिवार, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, पर्यावरण और राष्ट्र निर्माण जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। आंबेकर ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी में भारत को लेकर आत्मविश्वास बढ़ा है। युवाओं को देश की क्षमता पर भरोसा है और भारतीय युवा दुनिया के सामने अधिक आत्मविश्वास के साथ खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जानकारी के साथ भ्रम की संभावना भी बढ़ाई है। युवाओं को सही स्रोत और सही लोगों की पहचान करनी चाहिए। समाज के बीच जाकर प्रत्यक्ष अनुभव हासिल करना भी जरूरी है। ‘नई पीढ़ी को बिगड़ी हुई न कहें’ आंबेकर ने कहा कि युवाओं को ‘बिगड़ी हुई पीढ़ी’ कहकर खारिज नहीं करना चाहिए। आज बच्चों के सामने कम उम्र में ही ज्यादा आकर्षण और विकल्प हैं। ऐसे में परिवार और समाज को उनके साथ संवाद और सहानुभूति का माहौल बनाना चाहिए। उन्होंने परिवार में बचपन से ही बातचीत और संस्कार का वातावरण बनाने पर जोर दिया। ‘काम छोटा-बड़ा नहीं’ सामाजिक सम्मान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि खेती, सफाई, कपड़े धोने, बाल काटने या किसी अन्य काम को छोटा नहीं माना जाना चाहिए। समाज में ‘डिग्निटी ऑफ लेबर’ की भावना मजबूत करनी होगी। जातीय भेदभाव और अंतरजातीय विवाह के सवाल पर उन्होंने परिवारों के बीच संवाद से समाधान निकालने की बात कही। संस्कृति और सामाजिक भागीदारी पर जोर भारतीय संस्कृति पर आंबेकर ने कहा कि युवाओं में योग, ध्यान, ग्रंथों और परंपराओं को समझने की रुचि बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अच्छे विचार रखने वाले लोगों को मजबूती से सामने आना चाहिए और सकारात्मक सोच को संगठित शक्ति में बदलना जरूरी है। राष्ट्र निर्माण के सवाल पर उन्होंने युवाओं से इतिहास और मूल स्रोतों को समझने, राष्ट्रीय प्रतीकों और महापुरुषों का सम्मान करने तथा अपने पेशे को समाज और देश के हित में करने की अपील की। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष में बताए जा रहे पंच परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, परिवार में संवाद और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर सक्रिय भागीदारी की बात कही। युवाओं ने पूछे नशे, रोजगार और संस्कृति से जुड़े सवाल संवाद में MIT की छात्रा स्नेहा ने युवाओं की सबसे बड़ी समस्या पर सवाल किया। आंबेकर ने इंटरनेट से बढ़े भ्रम और सही स्रोतों से जुड़ने की जरूरत बताई। प्रथम सेमेस्टर की छात्रा मनीषा ने बेरोजगार युवाओं को कम सम्मान मिलने का मुद्दा उठाया तो उन्होंने श्रम के सम्मान की बात कही। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता मयंक ने भारतीय संस्कृति को लेकर सवाल किया। मुकेश कुशवाहा ने जातीय भेदभाव और अंतरजातीय विवाह का मुद्दा उठाया। पीजी छात्र अंकित कुमार ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पूछी। कर्नाटक की छात्रा पायल ने ब्रेन ड्रेन और एक छात्र ने कानून के गलत इस्तेमाल को लेकर सवाल किया। विद्यार्थी परिषद के महानगर विस्तारक रोहन कन्हाई झा ने युवाओं में बढ़ते नशे पर सवाल किया। आंबेकर ने कहा कि नशे की समस्या सिर्फ सरकार या पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। परिवार, मित्र और समाज को भी मदद और पुनर्वास के लिए आगे आना होगा। ‘समस्याओं को आउटसोर्स न करें’ आंबेकर ने कहा कि नशा, सामाजिक भेदभाव, पर्यावरण और परिवार जैसी समस्याओं को सरकार या किसी एक संगठन के भरोसे छोड़ने की आदत बदलनी होगी। उन्होंने युवाओं से केवल समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय समाधान के लिए खुद आगे आने की अपील की। कहा कि देश में बदलाव के लिए समाज की सहभागिता जरूरी है और युवा इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मुजफ्फरपुर के रामदयालु सिंह महाविद्यालय सभागार में शनिवार को RSS मुजफ्फरपुर महानगर की ओर से ‘तरूणोदय युवा संवाद’ कार्यक्रम हुआ। इसमें RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने युवाओं से संवाद किया। उन्होंने सोशल मीडिया, परिवार, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, पर्यावरण और राष्ट्र निर्माण जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। आंबेकर ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी में भारत को लेकर आत्मविश्वास बढ़ा है। युवाओं को देश की क्षमता पर भरोसा है और भारतीय युवा दुनिया के सामने अधिक आत्मविश्वास के साथ खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जानकारी के साथ भ्रम की संभावना भी बढ़ाई है। युवाओं को सही स्रोत और सही लोगों की पहचान करनी चाहिए। समाज के बीच जाकर प्रत्यक्ष अनुभव हासिल करना भी जरूरी है। ‘नई पीढ़ी को बिगड़ी हुई न कहें’ आंबेकर ने कहा कि युवाओं को ‘बिगड़ी हुई पीढ़ी’ कहकर खारिज नहीं करना चाहिए। आज बच्चों के सामने कम उम्र में ही ज्यादा आकर्षण और विकल्प हैं। ऐसे में परिवार और समाज को उनके साथ संवाद और सहानुभूति का माहौल बनाना चाहिए। उन्होंने परिवार में बचपन से ही बातचीत और संस्कार का वातावरण बनाने पर जोर दिया। ‘काम छोटा-बड़ा नहीं’ सामाजिक सम्मान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि खेती, सफाई, कपड़े धोने, बाल काटने या किसी अन्य काम को छोटा नहीं माना जाना चाहिए। समाज में ‘डिग्निटी ऑफ लेबर’ की भावना मजबूत करनी होगी। जातीय भेदभाव और अंतरजातीय विवाह के सवाल पर उन्होंने परिवारों के बीच संवाद से समाधान निकालने की बात कही। संस्कृति और सामाजिक भागीदारी पर जोर भारतीय संस्कृति पर आंबेकर ने कहा कि युवाओं में योग, ध्यान, ग्रंथों और परंपराओं को समझने की रुचि बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अच्छे विचार रखने वाले लोगों को मजबूती से सामने आना चाहिए और सकारात्मक सोच को संगठित शक्ति में बदलना जरूरी है। राष्ट्र निर्माण के सवाल पर उन्होंने युवाओं से इतिहास और मूल स्रोतों को समझने, राष्ट्रीय प्रतीकों और महापुरुषों का सम्मान करने तथा अपने पेशे को समाज और देश के हित में करने की अपील की। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष में बताए जा रहे पंच परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, परिवार में संवाद और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर सक्रिय भागीदारी की बात कही। युवाओं ने पूछे नशे, रोजगार और संस्कृति से जुड़े सवाल संवाद में MIT की छात्रा स्नेहा ने युवाओं की सबसे बड़ी समस्या पर सवाल किया। आंबेकर ने इंटरनेट से बढ़े भ्रम और सही स्रोतों से जुड़ने की जरूरत बताई। प्रथम सेमेस्टर की छात्रा मनीषा ने बेरोजगार युवाओं को कम सम्मान मिलने का मुद्दा उठाया तो उन्होंने श्रम के सम्मान की बात कही। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता मयंक ने भारतीय संस्कृति को लेकर सवाल किया। मुकेश कुशवाहा ने जातीय भेदभाव और अंतरजातीय विवाह का मुद्दा उठाया। पीजी छात्र अंकित कुमार ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पूछी। कर्नाटक की छात्रा पायल ने ब्रेन ड्रेन और एक छात्र ने कानून के गलत इस्तेमाल को लेकर सवाल किया। विद्यार्थी परिषद के महानगर विस्तारक रोहन कन्हाई झा ने युवाओं में बढ़ते नशे पर सवाल किया। आंबेकर ने कहा कि नशे की समस्या सिर्फ सरकार या पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। परिवार, मित्र और समाज को भी मदद और पुनर्वास के लिए आगे आना होगा। ‘समस्याओं को आउटसोर्स न करें’ आंबेकर ने कहा कि नशा, सामाजिक भेदभाव, पर्यावरण और परिवार जैसी समस्याओं को सरकार या किसी एक संगठन के भरोसे छोड़ने की आदत बदलनी होगी। उन्होंने युवाओं से केवल समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय समाधान के लिए खुद आगे आने की अपील की। कहा कि देश में बदलाव के लिए समाज की सहभागिता जरूरी है और युवा इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

