बदलती जीवनशैली में स्वस्थ रहना है तो खेलों को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा

बदलती जीवनशैली में स्वस्थ रहना है तो खेलों को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा

ग्वालियर. बदलती जीवनशैली, बढ़ती व्यस्तता और शारीरिक गतिविधियों में कमी के बीच स्वस्थ रहने के लिए नियमित शारीरिक सक्रियता को दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है। खेल, योग और नियमित व्यायाम न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार को शासकीय कमलाराजा कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय (केआरजी) में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने यह बात कही। महाविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग की ओर से ‘आधुनिक युग में स्वास्थ्य, वेलनेस और शारीरिक शिक्षा व खेल की अनिवार्य आवश्यकताएं’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य, फिटनेस, मानसिक संतुलन और खेलों के बीच संबंध की जानकारी दी।

सही ब्रीदिंग तकनीक की दी जानकारी

मुख्य अतिथि डॉ. अनिल करवंडे ने विद्यार्थियों को सही तरीके से सांस लेने की ब्रीदिंग तकनीक के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव कर स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। नियमित व्यायाम, खेल और शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करने से शरीर को सक्रिय रखने के साथ कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी बचाव किया जा सकता है। मुख्य वक्ता डॉ. संगीता श्रीवास्तव ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए हेड, हार्ट और हैंड के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। व्यक्ति की सोच, भावनाओं और दैनिक गतिविधियों के बीच संतुलन उसकी जीवनशैली को प्रभावित करता है। खान-पान, दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों में संतुलन बनाकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जा सकती है।

खेलों से विकसित होती है टीम भावना

पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. केशव सिंह गुर्जर ने विद्यार्थियों से नियमित रूप से खेलों में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खेल केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से विद्यार्थियों में टीम भावना, अनुशासन, सहयोग और नेतृत्व क्षमता का भी विकास होता है। पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रणवीर सिंह रुहल ने कहा कि खेल युवाओं में आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं। खेल के मैदान में परिस्थितियों का सामना करने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव व्यक्तिगत जीवन पर भी पड़ता है। प्राचार्य डॉ. साधना श्रीवास्तव ने कहा कि खेल विद्यार्थियों को जीत के साथ हार को स्वीकार करना और उससे सीखना सिखाते हैं। खेल भावना जीवन में चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करती है। आयोजन सचिव एवं क्रीड़ा अधिकारी मनोहर कटारिया ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना और शारीरिक शिक्षा एवं खेलों के महत्व को समझाना था। कार्यशाला में करीब 300 छात्राएं मौजूद रहीं। संचालन डॉ. कृष्णा सिंह ने किया। सेमीनार में वरिष्ठ क्रीड़ा अधिकारी लखविन्द्र सिंह, पूर्व क्रीड़ा अधिकारी एके सक्सेना, केके तिवारी, मनोज राणा, अरविंद आदि उपस्थित रहे।

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