Interstitial Cystitis Symptoms: दिनभर में बार-बार टॉयलेट के चक्कर काटना, रात को नींद टूटकर उठना और पेट के निचले हिस्से या ब्लैडर (मूत्राशय) में लगातार मीठा-मीठा दर्द या दबाव महसूस होना यह सब एक आम समस्या लग सकती है। अक्सर लोग इसे केवल यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) मानकर खुद ही दवाएं लेने लगते हैं या इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर यह तकलीफ हफ्तों या महीनों तक लगातार बनी रहे, तो यह साधारण इंफेक्शन नहीं, बल्कि Interstitial Cystitis (इंटरस्टिशल सिस्टाइटिस) हो सकता है। इसे मेडिकल भाषा में Painful Bladder Syndrome भी कहा जाता है। आइए समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, इसके पीछे के क्या कारण हो सकते हैं, शरीर में इसके क्या-क्या लक्षण दिखाई देते हैं और इससे राहत पाने के सही तरीके क्या हैं।
क्या है Interstitial Cystitis (इंटरस्टिशल सिस्टाइटिस)?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, इंटरस्टिशल सिस्टाइटिस मूत्राशय से जुड़ी एक लंबे समय तक चलने वाली क्रोनिक समस्या है। यह ब्लैडर में होने वाली एक ऐसी सूजन और बेचैनी है, जो बार-बार दर्द का कारण बनती है। एक स्वस्थ शरीर में, जब ब्लैडर में पेशाब भर जाता है, तो वहां की नसें दिमाग को संदेश भेजती हैं कि अब टॉयलेट जाने का समय हो गया है। दिमाग के इस सिग्नल के बाद ही इंसान को यूरिन पास करने की इच्छा होती है। हालांकि, Interstitial Cystitis से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में यह पूरा सिग्नल सिस्टम गड़बड़ा जाता है। इस बीमारी में ब्लैडर में बहुत थोड़ा सा पेशाब जमा होते ही दिमाग को गलत सिग्नल जाने लगता है, जिससे मरीज को लगता है कि उसका ब्लैडर पूरी तरह भर चुका है और उसे तुरंत टॉयलेट जाना जरूरी है।
मुख्य लक्षण जो बताते हैं कि समस्या गंभीर है
मेयो क्लिनिक के मुताबिक, इस बीमारी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों में ये लक्षण समय के साथ घटते-बढ़ते रहते हैं, तो कुछ में लगातार बने रहते हैं;
- पेल्विक एरिया में तेज या धीमा दर्द होना।
- पेशाब करने बार-बार जाते हैं।
- अचानक तेज इच्छा (Urgency)और ऐसा लगना कि टॉयलेट न पहुंचे तो नियंत्रण छूट जाएगा।
- थोड़े से पेशाब पर भी तेज दर्द।
- यौन संबंध के दौरान दर्द।
यह बीमारी क्यों होती है? इसके मुख्य कारण
- ब्लैडर की अंदरूनी परत का नुकसान।
- ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया (Autoimmune Response)।
- नसों की संवेदनशीलता।
- एलर्जी या आनुवंशिक कारण।
किन्हें होता है सबसे ज्यादा खतरा?
- महिलाओं में अधिक संभावना।
- आमतौर पर 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में।
- इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS), फाइब्रोमायल्जिया या अन्य पेन सिंड्रोम।
जीवनशैली में बदलाव और बचाव के उपाय
- अधिक मिर्च-मसाले वाला खाना, कैफीन (चाय और कॉफी)का सेवन कम करें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से ब्लैडर को ट्रेन करें।
- धूम्रपान छोड़ें।
- तनाव कम करें।
डॉक्टर से सपर्क कब करें?
यदि आपको बार-बार पेशाब आने और ब्लैडर में दर्द की शिकायत 2 से 3 सप्ताह से अधिक समय से है, तो बिना समय गंवाए किसी योग्य यूरोलॉजिस्ट (Urologist) को दिखाएं। सही समय पर सही जांच और लाइफस्टाइल में सुधार से इस स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है।

