Nail Psoriasis: बिना चोट के नाखून खराब होने लगे तो ध्यान दें, नेल सोरायसिस हो सकती है वजह, AAD से जानें लक्षण

Nail Psoriasis: बिना चोट के नाखून खराब होने लगे तो ध्यान दें, नेल सोरायसिस हो सकती है वजह, AAD से जानें लक्षण

Nail Psoriasis Symptoms: हाथ और पैर के सुंदर और साफ नाखून न सिर्फ हमारी खूबसूरती बढ़ाते हैं, बल्कि हमारी सेहत का हाल भी बताते हैं। अक्सर जब नाखून पीले पड़ने लगते हैं, मोटे हो जाते हैं या टूटने लगते हैं, तो लोग सोचते हैं कि शायद कोई चोट लग गई होगी या फंगल इंफेक्शन हो गया होगा। लोग अक्सर कोई एंटीफंगल क्रीम या घरेलू नुस्खा अपनाकर इसे ठीक करने की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना किसी चोट के नाखूनों का रंग-रूप बदलना किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है? इस बीमारी का नाम है नेल सोरायसिस (Nail Psoriasis)। यह त्वचा से जुड़ी बीमारी सोरायसिस का ही एक रूप है, जो नाखूनों को असरदार तरीके से प्रभावित करती है। आइए जानते हैं कि नेल सोरायसिस क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और इसका इलाज कैसे किया जाता है।

क्या होता है नेल सोरायसिस?

अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी एसोसिएशन के अनुसार, ज्यादातर लोगों में सोरायसिस शुरू होने के कई साल बाद नाखूनों में सोरायसिस विकसित होता है। नेल सोरायसिस एक ऑटोइम्यून समस्या (Autoimmune Condition) है। जब हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) गड़बड़ हो जाती है, तो वह गलती से हमारे अपने ही स्वस्थ सेल्स पर हमला करने लगती है। सोरायसिस की बीमारी में त्वचा की कोशिकाएं बहुत तेजी से बनने लगती हैं। जब यही गड़बड़ी हमारे नाखूनों की जड़ों (नाखून बनने वाली जगह) में होती है, तो नाखून सही तरीके से नहीं बढ़ पाते। वे आड़े-तिरछे, ढीले, मोटे या बदरंग होने लगते हैं। जिन लोगों को त्वचा पर सोरायसिस (लाल चकत्ते और पपड़ी जमना) की शिकायत होती है, उनमें से लगभग आधे लोगों को नाखूनों में भी सोरायसिस हो जाता है। हालांकि, कई बार यह बिना त्वचा की बीमारी के भी सिर्फ नाखूनों में देखने को मिल सकता है।

नेल सोरायसिस के मुख्य लक्षण

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, अगर आपको अपने नाखूनों में नीचे दिए गए बदलाव दिखाई दें, तो समझ जाएं कि यह साधारण फंगल इंफेक्शन या चोट नहीं है;

  • नाखूनों में छोटे-छोटे गड्ढे होना (Pitting)।
  • रंग बदलना।
  • नाखून का मोटा होना और टूटना।
  • नाखून का अपनी जगह से अलग होना (Onycholysis)।
  • नाखून के नीचे पपड़ी जमना।
  • दर्द और छूने में तकलीफ।

फंगल इंफेक्शन और नेल सोरायसिस में फर्क

बहुत से लोग नेल सोरायसिस को फंगल इंफेक्शन समझकर गलती कर बैठते हैं। फंगल इंफेक्शन आमतौर पर एक या दो नाखूनों में शुरू होता है और धीरे-धीरे फैलता है। इसमें फंगस की दवाइयों से आराम मिल जाता है। नेल सोरायसिस हाथ और पैर के कई नाखूनों को एक साथ प्रभावित कर सकता है। यह कोई इंफेक्शन नहीं है, इसलिए इस पर आम एंटीफंगल क्रीम का कोई असर नहीं होता।

किन कारणों से बढ़ सकती है यह समस्या?

  • नाखूनों में चोट लगना।
  • मानसिक तनाव।
  • मौसम का असर।

बचाव और सही इलाज के तरीके

नेल सोरायसिस का इलाज थोड़ा धीमा होता है क्योंकि नए नाखून को पूरी तरह उगने में समय लगता है। इसके लिए सही डॉक्टर (स्किन स्पेशलिस्ट/डर्मेटोलॉजिस्ट) से परामर्श लेना बहुत जरूरी है। डॉक्टर आपकी स्थिति देखकर खास स्टेरॉयड क्रीम, नेल पॉलिश जैसी दवाएं, खाने की गोलियां या लाइट थेरेपी (Phototherapy) की सलाह देते हैं। नाखूनों को हमेशा छोटा और साफ रखें। उन्हें बार-बार कुरेदने या साफ करने के लिए नुकीली चीजों का इस्तेमाल न करें।बर्तन धोने या पानी का काम करने के बाद हाथों और नाखूनों पर अच्छा मॉयस्चराइजर या नारियल तेल लगाएं। कपड़े या बर्तन धोते समय या केमिकल्स का इस्तेमाल करते समय कॉटन की अस्तर वाले रबर के ग्लव्स जरूर पहनें।

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