Corns and Calluses Hindi: अक्सर हम अपने चेहरे और हाथों की देखभाल में तो काफी ध्यान देते हैं, लेकिन पैरों की ओर हमारा ध्यान तभी जाता है जब उनमें कोई तकलीफ शुरू हो जाती है। कई बार पैरों के तलवों, एड़ियों या उंगलियों के आसपास की चमड़ी अचानक बहुत मोटी, सख्त और खुरदरी होने लगती है। लोग आमतौर पर इसे अनदेखा कर देते हैं या इसे मामूली सूखी त्वचा समझकर छोड़ देते हैं। अगर आपके पैरों में भी ऐसी मोटी और कड़क त्वचा बन रही है, तो मेडिकल भाषा में इसे कॉर्न (Corn) और कैलस (Callus) कहा जाता है। आम बोलचाल की भाषा में कॉर्न को गोखरू या कील भी कहते हैं। भले ही शुरुआत में यह कोई बड़ी बीमारी न लगे, लेकिन सही समय पर ध्यान न देने पर यह काफी दर्दनाक हो सकती है। आइए समझते हैं कि यह समस्या क्यों होती है, कॉर्न और कैलस में क्या फर्क है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
क्या होते हैं कॉर्न और कैलस?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब हमारी त्वचा पर बार-बार घर्षण (रगड़) या बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है, तो त्वचा खुद का बचाव करने के लिए उस जगह को मोटा और सख्त बना लेती है। यह शरीर का एक प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र (Defense Mechanism) है।
- कॉर्न (Corn)- ये आकार में छोटे होते हैं और अक्सर उंगलियों के ऊपर या उनके बीच में बनते हैं। इनके बीच में एक सख्त केंद्र (Hard Center) होता है, जो दबाने पर सुई की तरह चुभता है और तेज दर्द देता है।
- कैलस (Callus)- ये कॉर्न से बड़े होते हैं और फैलकर बनते हैं। ये ज्यादातर पैरों के तलवों, एड़ियों या हाथों की हथेलियों पर बनते हैं। कैलस में आमतौर पर दर्द नहीं होता, लेकिन त्वचा बहुत खुरदरी और सख्त हो जाती है।
त्वचा मोटी और सख्त क्यों होने लगती है?
मेयो क्लिनिक के अनुसार, पैरों की त्वचा मोटी होने के मुख्य कारण हमारी रोजमर्रा की आदतें ही हैं;
- गलत साइज या तंग जूते पहनना।
- बिना मोजे के जूते पहनना।
- गलत मोजे चुनना।
- ज्यादा देर पैदल चलना या खड़े रहना।
- पैरों की बनावट में बदलाव।
इसके मुख्य लक्षण क्या हैं?
अगर आपके पैरों में यह समस्या हो रही है, तो आपको ये लक्षण दिखेंगे;
- त्वचा का एक हिस्सा बहुत खुरदरा, मोटा और सूखा दिखाई देना।
- त्वचा पर कोई सख्त या उभरा हुआ दाना जैसा बनना।
- चलने या जूते पहनने पर उस जगह पर चुभन या दर्द होना।
- प्रभावित जगह की त्वचा का मोमी (Waxy) या परतदार (Flaky) दिखना।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
सामान्य तौर पर कॉर्न या कैलस नुकसानदायक नहीं होते और घर पर थोड़ी देखभाल से ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर आपको डायबिटीज (शुगर) है या आपके पैरों में खून का बहाव सही से नहीं होता, तो आपको खुद से इलाज करने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। डायबिटीज के मरीजों में छोटे से कॉर्न या कैलस में भी घाव (Ulcer) बन सकता है, जिससे गंभीर इन्फेक्शन का खतरा रहता है। इसके अलावा, अगर कॉर्न में लालिमा, सूजन या बहुत तेज दर्द हो रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
कॉर्न और कैलस से बचाव के उपाय
कॉर्न और कैलस से बचना और इन्हें ठीक करना काफी आसान है, बस अपनी दिनचर्या में कुछ छोटे बदलाव करें;
- सही नाप के जूते चुनें।
- मोजे जरूर पहनें।
- सॉफ्ट पैडिंग का इस्तेमाल करें।
- सफाई और नमी का ध्यान रखें।
- ब्लेड या कैंची का इस्तेमाल न करें।

