यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthis) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) के बीच स्थिति काफी गंभीर हो गई है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग की वजह से इन दोनों पक्षों के बीच भी जंग के हालात पैदा हो गए हैं। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। इसी बीच अब हूतियों ने एक बार फिर सऊदी अरब पर हमले कर दिए हैं।
अरामको के ठिकानों और सैन्य एयरबेस पर किए हमले
हूती मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या सरी (Yahya Saree) ने जानकारी दी है कि उनकी सेना ने खमीस मुशेत में एक सैन्य एयरबेस पर हमला किया है। इतना ही नहीं, हूतियों ने यानबू में अरामको के ठिकानों पर भी हमले किए।
सऊदी अरब की तरफ से अब तक नहीं आई प्रतिक्रिया
इस हमले पर सऊदी अरब की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरी ने पहले ही यह चेतावनी दी थी कि अगर यमन में सऊदी अरब की कार्रवाई जारी रहे, तो उस पर और बड़े हमले किए जाएंगे। हूतियों के हमलों के जवाब में सऊदी अरब की सेना भी कार्रवाई कर रही है। ऐसे में हूतियों के हमले भी जारी हैं।
मक्का से बाब अल-मन्देब तक सऊदी की बढ़ी परेशानी
मक्का से बाब अल-मन्देब स्ट्रेट तक हूती विद्रोहियों ने सऊदी की चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब ने दावा किया है कि हूतियों ने मक्का पर भी ड्रोन से हमला करने की कोशिश की, जिसे सऊदी के एयर डिफेंस ने नाकाम कर दिया। हालांकि इसके कुछ देर बाद ही हूतियों ने सऊदी एयरफोर्स के F-15 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया। हालांकि हूती प्रवक्ता हेज़म अल-असद ने इस दावे को खारिज करते हुए बयान दिया कि मक्का को निशाना बनाने का दावा एक घिसा-पिटा झूठ हैं, जिसका इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है और अब इनसे कोई मूर्ख नहीं बनता। बाब अल-मन्देब स्ट्रेट पर भी हूती लगातार हमले कर रहे हैं। इस वजह से सऊदी की परेशानी बढ़ गई है।
हूतियों और सऊदी के बीच विवाद की क्या है वजह?
यमन में संघर्ष 2014 के आखिर में तब शुरू हुआ जब हूतियों ने सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में दखल दिया। तभी से दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। हूतियों को ईरान (Iran) का समर्थन प्राप्त है तो वहीँ यमन की सेना को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है।


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