उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व प्रबंध निदेशक चित्रा रामकृष्ण की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उनके खिलाफ को-लोकेशन घोटाले मामले में भ्रष्टाचार-रोधी कानून के तहत अपराधों का संज्ञान लेने वाले आदेश को चुनौती दी गई थी। को-लोकेशन सुविधा के तहत एनएसई ब्रोकरों को एक निश्चित शुल्क पर अपने सर्वर एनएसई के डेटा सेंटर में रखने की अनुमति देता है, ताकि उन्हें शेयर बाजार के फीड तक तेजी से पहुंच मिल सके। रामकृष्ण ने दिल्ली उच्च न्यायालय के नौ जुलाई के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार-रोधी कानून के तहत अपराधों का संज्ञान लेने वाली अधीनस्थ अदालत के आदेश के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था।
उनकी याचिका पर न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ के सामने सुनवाई हुई। रामकृष्ण की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह ने दलील दी कि एनएसई एक निजी कंपनी है और यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता कोई सरकारी या सार्वजनिक दायित्व निभा रही थीं। उनकी याचिका का निपटारा करते हुए पीठ ने कहा कि यह बात सुनवाई अदालत के सामने उठाई जा सकती है, जो मामले पर तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर स्वतंत्र रूप से विचार करेगा।
अपने फैसले में उच्च न्यायालय ने कहा था कि एनएसई एक “जनहित का काम” करता है और याचिकाकर्ता, जो उसकी सीईओ और प्रबंध निदेशक थीं, उन्होंने भी “समान रूप से ऐसा कार्य एवं कर्तव्य निभाया, जिसमें आम जनता का हित निहित था।”
उच्च न्यायालय ने एनएसई के निदेशक मंडल की ओर से रामकृष्ण के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दी गई मंजूरी को भी बरकरार रखा। रामकृष्ण को-लोकेशन घोटाला मामले में आरोपी हैं। अदालत ने कहा कि यह आदेश केवल इस सीमित शर्त के अधीन था कि उनके मामले में भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम के लागू होने से जुड़े मुद्दों का निर्धारण किया जाए और केवल इसी आधार पर इसे रद्द नहीं किया जा सकता।
रामकृष्ण ने उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी थी कि भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम के तहत “लोक सेवक” की परिबेहद अस्पष्ट है और इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया था कि यह प्रावधान किसी निजी लिमिटेड कंपनी में कार्यरत निजी व्यक्तियों पर लागू नहीं किया जा सकता। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि उसे भ्रष्टाचार निवारण (पीसी) अधिनियम के तहत ‘‘लोक सेवक’’ की परिइतनी अस्पष्ट और अनिश्चित नहीं लगी कि उसे असंवैधानिक ठहराया जाए।
एनएसई को-लोकेशन घोटाला 2010 से 2014 के बीच कुछ ब्रोकरों द्वारा कुछ अज्ञात अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर एल्गोरिदम और को-लोकेशन सुविधा के दुरुपयोग से भारी मुनाफा कमाने से जुड़ा मामला है। उस समय याचिकाकर्ता एनएसई के कामकाज का प्रबंधन कर रही थीं। रामकृष्ण को 2009 में संयुक्त प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया था और वह 31 मार्च, 2013 तक इस पद पर रहीं।
इसके बाद एक अप्रैल, 2013 को उन्हें प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाया गया।

